टाटा संस के चेयरमैन का इस्तीफा: इस अवधि तक संभालेंगे जिम्मेदारी; बोर्ड में सहमति न बनने के बाद लिया फैसला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, मुंबई।
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वे अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति तक यानी फरवरी 2027 तक चेयरमैन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।
उनका यह फैसला 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (AGM) से कुछ दिन पहले आया है।
चंद्रशेखरन ने तीसरे कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति नहीं मांगने का फैसला किया है। फरवरी 2026 में उनके कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया था, लेकिन इस पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ पाया।
चंद्रशेखरन ने कहा- नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी
चंद्रशेखरन ने कहा कि उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। उनके अनुसार, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके कार्यकाल को अगले पांच साल के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी। यह प्रस्ताव टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड के सामने भी रखा गया था।
हालांकि, बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण इस पर निर्णय टल गया। करीब छह महीने तक स्थिति स्पष्ट नहीं होने के बाद चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि टाटा संस के कई महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट निर्णायक दौर में हैं। ऐसे समय में फरवरी 2027 के बाद संगठन का नेतृत्व कौन करेगा, इसे लेकर कर्मचारियों, निवेशकों, कारोबारी साझेदारों और अन्य हितधारकों के बीच स्पष्टता होना जरूरी है।
नोएल टाटा के साथ मतभेद की खबरें
चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ मतभेद की खबरें पहले से सामने आती रही हैं।
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी है। फरवरी में बोर्ड की बैठक में चंद्रशेखरन के तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएल टाटा ने टाटा समूह के कुछ नए कारोबारों के प्रदर्शन, पूंजी के इस्तेमाल और रणनीतिक फैसलों को लेकर सवाल उठाए थे।
हालांकि, चंद्रशेखरन के इस्तीफे के पीछे किसी एक व्यक्ति या मुद्दे को आधिकारिक तौर पर कारण नहीं बताया गया है।
2017 में संभाली थी टाटा संस की कमान
एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। वे टाटा परिवार से बाहर के पहले पेशेवर चेयरमैन थे।
इससे पहले वे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के प्रमुख रह चुके थे। टाटा के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, उनका मौजूदा कार्यकाल 21 फरवरी 2022 से 20 फरवरी 2027 तक है।
उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी, डिजिटल कारोबार और एविएशन जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। एयर इंडिया का अधिग्रहण भी इसी दौर में हुआ।
रेवेन्यू और कारोबार का दायरा बढ़ा
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया। समूह की कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी जैसे क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए।
उनके समर्थकों का कहना है कि इस दौरान समूह का कारोबार और बाजार मूल्य काफी बढ़ा। वहीं, नए कारोबारों में भारी निवेश और कुछ कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर समूह के भीतर सवाल भी उठे हैं। यही मुद्दे उनके कार्यकाल के विस्तार पर चर्चा के दौरान महत्वपूर्ण रहे।
टाटा की कंपनियों के शेयरों पर असर
चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद बुधवार को टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला।
TCS, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील समेत कई शेयरों में गिरावट आई। कारोबार के दौरान कुछ टाटा समूह के शेयरों में गिरावट 6% तक पहुंची।
निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से टाटा संस में नेतृत्व परिवर्तन और समूह की भविष्य की रणनीति को लेकर है।
खासकर सेमीकंडक्टर, बैटरी, एविएशन और नए कारोबारों में बड़े निवेश के बीच नए चेयरमैन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
अब नए चेयरमैन की तलाश होगी
चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 तक पद पर बने रहने के बावजूद टाटा समूह को अब उनके उत्तराधिकारी की तलाश शुरू करनी होगी।
टाटा संस के चेयरमैन का चयन कंपनी के बोर्ड और प्रमुख शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स के बीच समन्वय से होता है।
आम तौर पर प्रक्रिया में संभावित उम्मीदवारों पर विचार, उनके अनुभव और प्रदर्शन का आकलन तथा बोर्ड की मंजूरी जैसे चरण शामिल होते हैं।
नया चेयरमैन टाटा समूह की मौजूदा रणनीति को आगे बढ़ाता है या नए क्षेत्रों में निवेश और पूंजी आवंटन की दिशा बदलता है, यह आने वाले महीनों में अहम सवाल रहेगा।
टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस और टाटा ग्रुप में क्या अंतर है?
टाटा ट्रस्ट्स: टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी रखने वाला प्रमुख शेयरधारक समूह है। इसके तहत कई परोपकारी ट्रस्ट काम करते हैं। वर्तमान में नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं।
टाटा संस: यह टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है। यह समूह की प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े रणनीतिक फैसलों में केंद्रीय भूमिका निभाती है।
टाटा ग्रुप: यह कोई एक कंपनी नहीं, बल्कि टाटा नाम से संचालित कई स्वतंत्र कंपनियों का समूह है। इसमें TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा कंज्यूमर, टाटा पावर, टाइटन, एयर इंडिया सहित कई प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
एन. चंद्रशेखरन का इस्तीफा तत्काल नेतृत्व परिवर्तन नहीं है। वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे। लेकिन अब टाटा संस को उनके उत्तराधिकारी का चयन करना होगा।
ऐसे समय में जब समूह सेमीकंडक्टर, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एविएशन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश कर रहा है, नए चेयरमैन का चयन टाटा समूह की अगली रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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