बप्पा की पाठशाला: नवम काल्पनिक अवतार; चित्तेश्वर और विक्षेपासुर
KHULASA FIRST
संवाददाता

राजकुमार जैन स्वतंत्र लेखक, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुद्गल पुराण के अनुसार गणेशजी के आठ अवतारों ने आठ असुरों यानी मानव चेतना के आठ विकारों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, ईर्षा, अहंकार, ममत्व और अभिमान पर विजय पाने की राह दिखाई थी।
इस वर्ष गणेशोत्सव में विसर्जन से पूर्व मिला एक अतिरिक्त दिन मानो नियति का दिया वह दुर्लभ एकांत है, जहां ठहरकर हम समय की नब्ज़ टटोल सकें। यह ठहराव हमें कल्पना के द्वार खोलने का अवसर देता है: आज की कृत्रिम, आभासी और सूचना-संक्रमित दुनिया में यदि बप्पा एक नया नौवां अवतार लेते, तो कौनसा रूप धरते और उनका सामना किस असुर से होता?
निश्चित ही वह असुर और कोई और नहीं, हमारे ध्यान को बांटने वाला ‘विक्षेपासुर’ होता; और उसके शमन के लिए अवतरित होते चित्त और चेतना के परम स्वामी स्वयं ‘चित्तेश्वर’। यह कोई पुरातन आख्यान नहीं, हमारे दैनिक जीवन का यथार्थ रूपक है।
विक्षेपासुर के तरकश में कोई पारंपरिक अस्त्र नहीं होते। वह हमारी जेब में रहता है, मेज पर जगमगाता है और रात को सिरहाने तक चला आता है। उसके हथियार हैं, लगातार बजती नोटिफिकेशन की घंटियाँ, अंतहीन स्क्रॉलिंग का मायाजाल, ब्यूटी फ़िल्टर्स का सम्मोहन और आधी-अधूरी सनसनीखेज सूचनाएँ।
वह हमारा धन नहीं लूटता; वह आज की सबसे महँगी मुद्रा चुराता है, हमारा समय हमारा ‹ध्यान› यानि अटेन्शन। पुस्तक खुली है, पर दृष्टि स्क्रीन पर टिकी है। परिवार सम्मुख बैठा है, पर उँगलियाँ किसी अनजान संदेश पर थिरक रही हैं।
मित्र व्यथा सुना रहा है, पर आँखें डिस्प्ले पर चमकती नई सूचना ढूँढ रही हैं। विक्षेपासुर की सबसे चतुर चाल यह है कि वह हमें मारता नहीं, बल्कि हर जगह थोड़ा-थोड़ा बिखेरकर कहीं भी पूरा उपस्थित नहीं रहने देता।
इसके साथ ही वह हमारी वास्तविकता को संदिग्ध बना देता है। चेहरे पर फिल्टर का आवरण, बनावटी मुस्कान और कृत्रिम पूर्णता का उन्माद। हम दुनिया को अपना सहज रूप दिखाने से कतराने लगे हैं। ऊपर से उसका एक और वार, आधा सच। पूरा झूठ तो पकड़ में आ जाता है, पर संदर्भविहीन क्लिप्स, भ्रामक हेडलाइंस और एआई निर्मित आंशिक सच हमें तुरंत प्रभावित करते हैं।
हम एक सिरे से सूचना बटोरते हैं और दूसरे सिरे से बगैर सोचे-समझे फॉरवर्ड करने लगते हैं; बीच का सबसे अनिवार्य पड़ाव ‘चिंतन’, सत्यता परीक्षण कहीं खो जाता है। हमारी इस कथा में जब व्यथित मानवता ने चित्तेश्वर से गुहार लगाई कि प्रभु, इस असुर ने
हमारा समय और सच दोनों छीन लिए। चित्तेश्वर मुस्कुराए और शांत स्वर में बोले- समय तो आज भी चौबीस घंटे ही है, उसने तुम्हारा समय नहीं, तुम्हारा ध्यान छीना है।
चित्तेश्वर, विक्षेपासुर से कोई रक्तरंजित युद्ध नहीं करते। वे बस अपने विशाल मस्तक को स्थिर करते हैं, सूप जैसे कानों से जगत के सारभूत सत्य को सुनते हैं और अपनी सूक्ष्म दृष्टियों को एक बिंदु पर केंद्रित कर देते हैं।
विक्षेपासुर उनके इर्द-गिर्द असीम ध्वनियों और भ्रामक दृश्यों का कोलाहल रचता है, किंतु चित्तेश्वर निर्विकार रहते हैं। थककर असुर पूछता है इस प्रचंड शोर के बीच भी आप इतने शांत कैसे हैं?
चित्तेश्वर ने अमर सूत्र दिया- हर आवाज़ सुनने योग्य नहीं होती, हर दृश्य देखने योग्य नहीं होता और हर सूचना जानना अनिवार्य नहीं होता।
यह काल्पनिक अवतार तकनीक के त्याग की बात नहीं करता, क्योंकि गणेशजी तो स्वयं विवेक और प्रज्ञा के प्रतीक हैं। प्रश्न तकनीक का नहीं, स्वामित्व का है, उपकरण हमारे हाथ में है या हमारा नियंत्रण उपकरण के हाथ में?
असल चुनौती उस आंतरिक बेचैनी की है, जिसने हमें खाली क्षणों और मौन से डरना सिखा दिया है, जबकि सत्य यह है कि हर गहरी रचनात्मकता इसी मौन के गर्भ से जन्म लेती है।
विसर्जन की पूर्व संध्या में बप्पा के सम्मुख केवल दस मिनट का मौन प्रयोग कीजिए, बिना कैमरे, बिना स्क्रीन, बिना किसी फिल्टर के और अंतर्मन से पूछिए- आज कितने क्षण ऐसे थे जब मेरा शरीर जहां था, मेरा मन भी वहीं उपस्थित था?
चित्तेश्वर का सबसे बड़ा वरदान कोई चमत्कार नहीं, बल्कि इस कोलाहलभरी दुनिया में हमारे अपने ‘ध्यान’ का पुनः हमारा हो जाना है।
गणेश उत्सव में उमड़ा जनसैलाब, महाआरती के बाद सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की धूम
न्यू हीरा नगर में न्यू स्टार ग्रुप के तत्वाधान और दीपू यादव मित्र मंडल के संयोजन में 22वें वर्ष गणेश उत्सव का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। उत्सव के दौरान प्रतिदिन संध्या समय महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर महाप्रसादी ग्रहण की।
महाआरती के पश्चात प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम स्थल पर आयोजित सांस्कृतिक स्पर्धाओं के अंतर्गत महिलाओं एवं बच्चों के लिए तंबोला सहित अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
आयोजन के दौरान क्षेत्रीय विधायक रमेश मेंदोला, एमआईसी सदस्य व प्रभारी महापौर राजेंद्र राठौर, पूर्व पार्षद चंदू शिंदे तथा खुलासा फर्स्ट परिवार के मधुर जायसवाल ने शिरकत की। न्यू स्टार ग्रुप की ओर से अतिथियों का केसरिया दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत एवं सम्मान किया गया।
उत्सव के दौरान पंडित देवेंद्र मिश्रा ने गणेश प्रतिमा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कराया। कार्यक्रम के दौरान व्यवस्था संचालन में गणेश उत्सव समिति के प्रमुख दीपू यादव, सुमित गुर्जर, ऋषभ सेन, अंकित मालवीय और लक्की गुर्जर सहित बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई।
बियाबानी श्री राम ग्रुप का अटूट संकल्प हर साल भव्य आयोजन और भंडारा
शहर के बियाबानी क्षेत्र में आस्था का एक ऐसा संगम देखने को मिलता है जो पिछले 36 वर्षों से लगातार और अटूट रूप से चला आ रहा है। श्री राम ग्रुप पिछले 36 वर्षों से हर साल बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ गणेश उत्सव का भव्य आयोजन करता आ रहा है।
इस साल भी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ग्रुप द्वारा बेहद भव्य आयोजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तजनों ने पंडाल में पहुंचकर भगवान श्री गणेश जी और साथ ही विराजमान भैरव महाराज जी के दिव्य दर्शन किए और उनका आशीर्वाद लिया।
दर्शन के बाद आयोजित विशाल भंडारे में हजारों भक्तों ने एक साथ बैठकर प्रसादी ग्रहण की। पूरा वातावरण “गणपति बप्पा मोरया” और “भैरव महाराज की जय” के जयकारों से गूंज उठा। 36 वर्षों से लगातार चल रहा यह आयोजन सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बियाबानी क्षेत्र के लोगों की अटूट आस्था, एकता और समर्पण का प्रतीक बन चुका है।
श्री राम ग्रुप के सभी सदस्यों ने बताया कि यह आयोजन बप्पा की कृपा और क्षेत्रवासियों के सहयोग से ही इतने वर्षों से सफलतापूर्वक हो रहा है और आगे भी इसी श्रद्धा के साथ होता रहेगा।
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