हाईकोर्ट के आदेश से भी बड़ा हो गया नगर निगम: अवैध होर्डिंग्स हटाने के निर्देश के बावजूद शहर में धड़ल्ले से खेल हादसा हुआ
KHULASA FIRST
संवाददाता

9 दिन अनशन चला निगम ने लिखित आश्वासन दिया फिर भी सवाल जस का तस
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में अवैध होर्डिंग का मामला अब सिर्फ नगर निगम की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। सवाल सीधे हाईकोर्ट के आदेश के पालन पर आ खड़ा हुआ है। न्यायालय अवैध होर्डिंग्स को लेकर जिम्मेदारों को कार्रवाई के निर्देश दे चुका है।
शिकायतों पर कार्रवाई का नियम भी है। इसके बावजूद शहर में जगह-जगह नियमों को ताक पर रखकर होर्डिंग्स लगाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। हाल की घटनाओं ने निगम की पूरी निगरानी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे पहले पाटनीपुरा का हादसा देखिए।
23 सितंबर को गणेशोत्सव से जुड़ा होर्डिंग सड़क पर गिर गया और उसकी चपेट में आकर एक युवक घायल हो गया। हादसे के बाद स्वाभाविक सवाल उठा कि जिस शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा रहे हैं, वहां उनकी मजबूती, अनुमति और सुरक्षा की जांच कौन करता है?
अगर जांच होती है तो फिर सड़क पर होर्डिंग गिरने की नौबत क्यों आई? इसके पहले अवैध होर्डिंग्स और बैनर-पोस्टर के खिलाफ प्रहलाद पांडे नौ दिन तक रीगल तिराहे पर अनशन पर बैठे।
मामला इतना आगे बढ़ा कि नगर निगम और जिला प्रशासन को लिखित आश्वासन देकर अनशन खत्म करवाना पड़ा। निगम ने कुछ प्रमुख स्थानों से अवैध होर्डिंग्स हटाने का भरोसा दिया, लेकिन यहां भी सवाल वही है-क्या कार्रवाई केवल शिकायत, आंदोलन और हादसे के बाद ही होगी?
कोर्ट का आदेश... फिर भी जिम्मेदारी किसकी?... हाईकोर्ट ने अवैध होर्डिंग्स को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में नगर निगम के सामने दोहरी जिम्मेदारी है, अवैध होर्डिंग्स हटाना और यह सुनिश्चित करना कि हटाए गए होर्डिंग्स फिर उसी जगह या दूसरी जगह दोबारा न लगें।
लेकिन शहर की तस्वीर देखकर सवाल उठता है कि क्या यह व्यवस्था जमीन पर उतनी ही मजबूत है, जितनी कागजों पर दिखाई देती है? अगर किसी चौराहे पर बिना अनुमति होर्डिंग लग जाता है तो उसे लगाने वाले से पहले सवाल उस अधिकारी से होना चाहिए, जिसके क्षेत्र में वह होर्डिंग खड़ा हुआ। अगर वह कई दिन तक लगा रहता है तो निगरानी तंत्र पर सवाल होना चाहिए। और अगर उसे हटाने के बाद फिर वही खेल शुरू हो जाता है तो कार्रवाई के नाम पर अब तक हुआ पूरा कवायद ही सवालों के घेरे में आ जाती है।
हादसा, अनशन और आदेश... फिर भी तस्वीर नहीं बदली तो क्यों?... हाई कोर्ट का आदेश आया, अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ आवाज उठी, नौ दिन अनशन हुआ, निगम ने लिखित आश्वासन दिया और फिर होर्डिंग गिरने से युवक घायल हो गया।
अब सवाल किसी एक होर्डिंग का नहीं है। सवाल यह है कि नगर निगम की निगरानी आखिर काम कैसे कर रही है? क्या निगम को हर अवैध होर्डिंग की जानकारी शिकायत आने के बाद ही मिलती है?
क्या जिम्मेदार अधिकारी अपने क्षेत्र में लगे होर्डिंग्स की नियमित जांच करते हैं? अगर करते हैं तो बिना अनुमति वाले होर्डिंग्स इतने समय तक कैसे खड़े रहते हैं? और सबसे अहम हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी यदि यही स्थिति बनी हुई है तो आदेश के पालन की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अब जवाब निगम को देना है... नगर निगम के पास अधिकारी हैं, अमला है, नियम हैं और कार्रवाई का अधिकार भी है। ऊपर से न्यायालय के निर्देश भी मौजूद हैं। फिर भी यदि शहर में अवैध होर्डिंग्स का मुद्दा बार-बार सामने आ रहा है तो इसे महज एक-दो होर्डिंग्स की समस्या कहकर टाला नहीं जा सकता।
हाई कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है। ऐसे में शहर अब यह देखना चाहता है कि निगम की कार्रवाई जमीन पर दिखाई देती है या फिर अवैध होर्डिंग्स का कारोबार अपनी जगह चलता रहता है।
बार पदाधिकारियों ने भी उठाई जवाबदेही की बात
आदेश का असर मौके पर दिखाई देना चाहिए
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष यादव का कहना है कि न्यायालय के आदेश का पालन संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि आदेश के बावजूद अवैध होर्डिंग्स लगे हैं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। न्यायालय के आदेश का असर केवल फाइलों में नहीं, बल्कि मौके पर दिखाई देना चाहिए।
प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए
जिला कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाल के मुताबिक हाईकोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम को समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। केवल होर्डिंग हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना होगा कि वे दोबारा न लगें। यदि लगातार नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
लोगों की सुरक्षा का मुद्दा
जिला कोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव धर्मेंद्र गुर्जर ने कहा कि अवैध होर्डिंग अब केवल शहर की सुंदरता का मुद्दा नहीं रह गया है। पाटनीपुरा जैसी घटना के बाद यह सीधे लोगों की सुरक्षा से जुड़ गया है। यदि नियम विरुद्ध होर्डिंग्स लगे हैं तो संबंधित जिम्मेदारों से जवाब लिया जाना चाहिए।
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