रहवासी इलाके का गार्डन बन गया श्मशान: दो बेटों के पिता से संत बने सुलब्धिसागर की अंतिम क्रिया पर बवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

समाधिमरण के बाद हुई अंतिम क्रिया
रहवासियों की शिकायत पर निगम पहुंचा
समाज बोला- पहले भी हुई ऐसी क्रिया, प्रशासन से स्थायी भूमि की मांग
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
केसरबाग रोड स्थित नेमी नगर जैन कॉलोनी का निगम का गार्डन कल सुबह अचानक विवाद का केंद्र बन गया। जिस जगह रहवासी सुबह की सैर और बच्चे खेलते हैं, वहीं जैन क्षुल्लक सुलब्धिसागर की समाधिमरण के बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतिम क्रिया की जा रही थी।
सुबह करीब 6 बजे रहवासियों ने निगम को सूचना दी तो उद्यान विभाग का अमला मौके पर पहुंचा, पंचनामा बनाया और मामले की जांच शुरू कर दी। अब नगर निगम पुलिस को जांच प्रतिवेदन सौंपने की तैयारी में है। आगे की कार्रवाई अन्नपूर्णा पुलिस तय करेगी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू कहीं ज्यादा मानवीय है।
सुलब्धिसागर कभी नरेंद्र कुमार जैन थे, दो बेटों के पिता थे। दमोह जिले के पथरिया से उनका परिवार जुड़ा है और इंदौर के स्कीम नंबर 78 में रह रहा था। जिंदगी के अंतिम दौर में उन्होंने सांसारिक जीवन से अलग होकर धर्म का रास्ता चुना और अंतिम समय में आचार्य सुनील सागर के सान्निध्य में क्षुल्लक व्रत ग्रहण किया।
अंतिम समय में गुरु दीक्षा, फिर समाधिमरण... परिवार और समाज से मिली जानकारी के मुताबिक नरेंद्र कुमार जैन पिछले कुछ समय से इंदौर में रह रहे थे। उनकी बहू प्रीति जैन ने बताया कि वे पिछले कुछ दिनों से बीकेयर हॉस्पिटल में भर्ती होकर इलाज करा रहे थे।
डॉक्टरों की सलाह के बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर लाया गया था। इसी दौरान उन्होंने धार्मिक जीवन की ओर अंतिम कदम बढ़ाया। समाज के अनुसार 11 अगस्त को उन्होंने संल्लेखना एवं समाधिमरण की भावना व्यक्त की।
उनकी स्थिति को देखते हुए आचार्य सुनील सागर महाराज ने उन्हें क्षुल्लक व्रत और 11 प्रतिमाओं के संस्कार कराए। समाज का कहना है कि अंतिम समय में ही उन्हें गुरु दीक्षा दी गई और उनका नाम सुलब्धिसागर रखा गया। मंगलवार शाम करीब 7 बजे उनके समाधिमरण की जानकारी दी गई।
दो बेटे सामने आए, लेकिन बोले- कमेटी ही बताएगी... इस पूरी घटना में परिवार का पक्ष जानने के लिए जब खुलासा फर्स्ट ने उनके दोनों बेटों से चर्चा की तो उन्होंने अपनी पहचान सार्वजनिक करने से परहेज किया। दोनों का कहना था कि कमेटी के लोग ही इस बारे में जानकारी दे पाएंगे, वे स्वयं कुछ नहीं कहना चाहते।
वहीं उनकी बहू प्रीति जैन ने परिवार और उनके उपचार से जुड़ी जानकारी साझा की। इससे सुलब्धिसागर के जीवन का वह पक्ष सामने आता है, जो धार्मिक पहचान के पीछे छिप गया था एक पिता, परिवार और फिर सांसारिक जीवन से विरक्ति की ओर बढ़ता व्यक्ति।
समाज बोला- पहले भी दो बार हुई ऐसी अंतिम क्रिया... जैन समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सामान्य अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि समाधिमरण के बाद जैन धार्मिक परंपरा के अनुसार की जाने वाली अंतिम क्रिया थी। समाज का दावा है कि इसी गार्डन में पहले भी दो बार ऐसी क्रिया हो चुकी है।
यदि समाज का यह दावा सही पाया जाता है तो जांच का दायरा सिर्फ बुधवार की घटना तक सीमित नहीं रहेगा। सवाल उठेगा कि पहले दो मौकों पर किसकी अनुमति ली गई थी, निगम को किस स्तर पर सूचना दी गई थी और सार्वजनिक उद्यान में ऐसी गतिविधि को लेकर क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।
निगम और पुलिस के बीच अब जांच की गेंद... नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल और उद्यान प्रभारी अपर आयुक्त शृंगार श्रीवास्तव की ओर से मामले में पुलिस को जांच प्रतिवेदन सौंपने की बात कही गई है। इसके बाद अन्नपूर्णा पुलिस मामले के तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी यानी फिलहाल विवाद का अगला पड़ाव पुलिस जांच है।
निगम यह देख रहा है कि उद्यान के उपयोग को लेकर नियमों का पालन हुआ या नहीं, जबकि पुलिस यह देखेगी कि शिकायत और मौके की परिस्थितियों के आधार पर कोई कार्रवाई बनती है या नहीं।
गार्डन में अंतिम क्रिया से रहवासी परेशान, निगम ने बनाया पंचनामा
बुधवार सुबह करीब 6 बजे रहवासियों ने निगम को सूचना दी। इसके बाद सहायक उद्यान अधिकारी राहुल वर्मा सहित उद्यान विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने मौके की स्थिति का पंचनामा तैयार किया। निगम का कहना है कि आचार्य विद्यासागर उद्यान में अंतिम क्रिया की पूर्व सूचना निगम को नहीं दी गई थी।
वहीं जैन समाज का दावा है कि रात में ही अन्नपूर्णा थाने और क्षेत्रीय पार्षद योगेश गेंदर को सूचना दे दी गई थी। अब यही बिंदु जांच का अहम हिस्सा है क्या अंतिम क्रिया की जानकारी प्रशासन को पहले से थी और यदि थी तो निगम को इसकी सूचना क्यों नहीं मिली?
गार्डन में अंतिम क्रिया पर नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
महापौर को पत्र देकर कार्रवाई की मांग, कहा- सार्वजनिक उद्यान में अंतिम संस्कार जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर...नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष एवं वार्ड 45 की पार्षद सोनिला मिमरोट भाटिया ने नेमीनगर स्थित आचार्य विद्यासागर उद्यान में अंतिम क्रिया किए जाने की घटना पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने महापौर को पत्र भेजकर मामले में जिम्मेदारी तय करने और अंतिम क्रिया कराने वाले लोगों के खिलाफ पुलिस में प्रकरण दर्ज कराने की मांग की है। पत्र में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उद्यान पर्यावरण की शुद्धता और नागरिकों के उपयोग के लिए बनाए जाते हैं।
ऐसे स्थान पर अंतिम संस्कार किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने इसे जनस्वास्थ्य की दृष्टि से भी चिंताजनक बताते हुए मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में वार्ड 72 के पार्षद की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई है। उन्होंने महापौर से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
असली सवाल—संतों की अंतिम क्रिया के लिए इंदौर में जगह कहां है?
इस पूरे विवाद ने एक ऐसा सवाल भी सामने ला दिया है, जिसका जवाब सिर्फ कार्रवाई से नहीं मिलेगा। चातुर्मास सेवा समिति के संयोजक इंद्र कुमार सेठी ने शासन-प्रशासन से जैन साधु-संतों की अंतिम क्रिया के लिए शहर में स्थायी भूमि उपलब्ध कराने की मांग की है।
समाज का कहना है कि संत के देहावसान के बाद हर बार अंतिम क्रिया के लिए स्थान तलाशना मुश्किल होता है। धार्मिक परंपरा सामान्य श्मशान से अलग है, ऐसे में स्थायी व्यवस्था नहीं होने पर ऐसी स्थिति दोबारा बन सकती है।
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