पुलिस के हाथ लगा MP-गुजरात शराब तस्करी का नेटवर्क: 30 से ज्यादा ट्रकों से शराब भेजने का खुलासा; मंत्री के रिश्तेदारों से जुड़े तार की भी जांच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अवैध शराब तस्करी के मामले की जांच में इंदौर पुलिस को मध्य प्रदेश से गुजरात तक फैले एक बड़े नेटवर्क के बारे में अहम जानकारी मिली है।
कनाड़िया पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने आलीराजपुर से शराब तस्करी का नेटवर्क संचालित होने की बात बताई है।
आरोपितों के मुताबिक शराब ठेकेदारों से कम कीमत पर शराब खरीदकर ट्रकों के जरिए इंदौर लाई जाती थी। यहां शराब को छोटे वाहनों में शिफ्ट कर गुजरात भेजा जाता था।
पूछताछ में 30 से ज्यादा ट्रकों में शराब गुजरात भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन, फंडिंग और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
शनिवार को कनाड़िया पुलिस ने मामले में दो फरार आरोपितों हनी उर्फ हरभजनसिंह टूटेजा और मोनू उर्फ कृष्णा को गिरफ्तार किया। दोनों को कोर्ट में पेश कर पुलिस ने रिमांड मांगा है।
बायपास पर पकड़ा था शराब से भरा ट्रक
कनाड़िया पुलिस ने 24 जुलाई को कनाड़िया बायपास से ट्रक क्रमांक UP 63 BT 1468 पकड़ा था। ट्रक में लाखों रुपए कीमत की अवैध शराब भरी हुई थी।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आकाशसिंह अहिरवार, राहुल नामदेव, विजय वैष्णव, दीपांशु सोनाने और नितेश प्रजापति को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में इन आरोपितों ने हनी उर्फ हरभजनसिंह टूटेजा और मोनू उर्फ कृष्णा के नाम बताए थे। इसके बाद पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की। एडिशनल डीसीपी जोन-2 अमरेंद्र सिंह की टीम ने शनिवार को दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में चंदर और प्रदीप के नाम सामने आए
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने चंदर चौहान और प्रदीपसिंह चौहान को इस नेटवर्क का कथित सरगना बताया है। आरोपितों के अनुसार दोनों आलीराजपुर क्षेत्र से अवैध शराब के कारोबार को संचालित करते हैं।
जांच के दौरान आरोपितों ने दोनों के संबंध एक मंत्री के रिश्तेदारों से होने का भी दावा किया है। हालांकि यह आरोपितों के बयान पर आधारित जानकारी है और पुलिस इसकी स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है। अभी किसी तरह की मिलीभगत या राजनीतिक संबंध की पुलिस स्तर पर पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रक से छोटी गाड़ियों में शिफ्ट होती थी शराब
पूछताछ में तस्करी का तरीका भी सामने आया है। आरोपितों के मुताबिक शराब ठेकेदारों से कम कीमत पर शराब खरीदी जाती थी। इसके बाद ट्रकों के जरिए शराब को इंदौर या आसपास के निर्धारित स्थानों तक लाया जाता था।
यहां ट्रक से शराब छोटी गाड़ियों में शिफ्ट की जाती थी। इसके बाद इन्हीं वाहनों से शराब को गुजरात पहुंचाया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब की खरीद से लेकर गुजरात में डिलीवरी तक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
शिवपुरी के शराब ठेकेदार से खरीद का दावा
आरोपितों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि गिरोह ने शिवपुरी के एक शराब ठेकेदार से भी शराब खरीदी थी। पुलिस अब इस दावे की जांच कर रही है।
शराब की खरीद किस तरीके से हुई, भुगतान किस माध्यम से किया गया और माल को ट्रक में किस स्थान से लोड किया गया, इन सभी बिंदुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, आरोपित हनी द्वारा वर्चुअल नंबरों की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। ट्रक चालक इन नंबरों का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा कुछ लोग रास्ते में ट्रकों को आगे निकालने और पेट्रोलिंग करने का काम करते थे।
30 से ज्यादा ट्रकों की जानकारी जुटा रही पुलिस
पूछताछ में 30 से ज्यादा ट्रकों से शराब गुजरात भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने अब पुराने ट्रांसपोर्ट और सप्लाई रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
पुलिस यह पता लगा रही है कि इन ट्रकों में कितनी शराब भेजी गई, शराब कहां से लोड हुई, रास्ते में किन स्थानों पर वाहन रुके और गुजरात में किन लोगों तक शराब पहुंचाई गई। जांच में ट्रांसपोर्टर, शराब ठेकेदार, ड्राइवर और गुजरात में शराब लेने वाले तस्करों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
चंदर और प्रदीप की तलाश जारी
पूछताछ में कथित सरगना के रूप में सामने आए चंदर चौहान और प्रदीपसिंह चौहान फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस दोनों की तलाश कर रही है।
अधिकारियों को उम्मीद है कि दोनों की गिरफ्तारी के बाद शराब तस्करी के नेटवर्क की पूरी सप्लाई चेन, फंडिंग, गुजरात में जुड़े लोगों और अब तक भेजी गई शराब की मात्रा को लेकर और अहम जानकारी मिल सकती है। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ कर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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