जहरीली शराब: मौत से बेसहारा घरों में अब रोटी का संकट
KHULASA FIRST
संवाददाता

गर्भवती-विधवाओं पर परिवार की जिम्मेदारी; जो बचे उनकी आंखें हो रहीं खराब
खुलासा फर्स्ट, सागर।
बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में जहरीली शराब से अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे को आठ दिन बीत चुके हैं, लेकिन कई घरों में मातम खत्म नहीं हुआ है। शनिवार को भी दो लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं। 100 से ज्यादा लोग इलाज के बाद अपने गांव लौट चुके हैं।
इधर, पुलिस आरोपियों की धरपकड़ में जुटी है। 33 को आरोपी बनाया गया है। 18 गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि 13 फरार बताए जा रहे हैं। दो मुख्य आरोपियों के शॉर्ट एनकाउंटर की बात भी सामने आई है। आरोपियों से जुड़े शराब दुकानों और होटलों को सील किया जा रहा है। नेता, अधिकारी और पुलिस की गाड़ियां लगातार प्रभावित गांवों में पहुंच रही हैं।
इन सबके बीच गांवों की तस्वीर कुछ और ही कहानी कह रही है। जिन घरों में कुछ दिन पहले तक परिवार साथ बैठता था, वहां अब सन्नाटा है। कहीं अंतिम संस्कार के बाद लौटे लोग चुप बैठे हैं तो कहीं रिश्तेदारों के आने-जाने का सिलसिला जारी है।
छोटे बच्चे पिता को तलाश रहे हैं और महिलाएं इस सवाल से जूझ रही हैं जिस व्यक्ति के सहारे घर चलता था, उसके चले जाने के बाद जिंदगी कैसे चलेगी? बमूरा, गुगरा और नौराज में कई परिवारों की जिंदगी जहरीली शराब ने बदलकर रख दी।
बमूरा: एक ही घर से पिता-पुत्र की अर्थियां उठीं... सागर-बंडा रोड पर बसे बमूरा गांव में जहरीली शराब ने पांच लोगों की जान ली। गांव में अब स्कूल और आंगनबाड़ी के बच्चे शिक्षक और कुछ अधिकारियों के साथ नशामुक्ति के नारे लगाते हुए फेरी निकाल रहे हैं। रामप्रसाद लोधी के घर में पिता और बेटे दोनों की जहरीली शराब से मौत हुई है।
परिवार का दूसरा बेटा भूरे लोधी दो दिन पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज होकर लौटा है। उसकी आंखों की रोशनी चली गई और सीने में जलन आज भी है। भूरे बताते हैं, “पापा की तबीयत खराब हुई थी। उन्हें अस्पताल ले गए। मैं भी वहीं एडमिट हो गया। उसके बाद कुछ याद नहीं।
अस्पताल से बाहर आया तो पता चला पापा गोविंद और भाई रामप्रसाद नहीं रहे।” रामप्रसाद को एयरलिफ्ट कर भोपाल एम्स ले जाया गया था। एक ही परिवार से पिता और बेटे का चले जाना सिर्फ दो मौतें नहीं हैं। पीछे रह गए परिवार के लिए यह जिंदगी भर का दर्द है।
रेखा के सामने 6 बच्चों का भविष्य... रामप्रसाद की मौत के बाद छह बच्चों की जिम्मेदारी उनकी पत्नी रेखा पर आ गई है। रेखा के अपने दो बेटियां और एक बेटा हैं। देवरानी की तीन साल पहले मौत हो चुकी है। उसके भी दो बेटियां और एक बेटा हैं। घर में मौजूद पार्वती पति और बेटे को खोने के सदमे से इतनी टूट चुकी हैं कि ठीक से बोल भी नहीं पा रही थीं।
रेखा बताती हैं कि बच्चे अभी 15 से 17 साल की उम्र के हैं। परिवार की आय का मुख्य जरिया खेती और दुकान थी, जिसे रामप्रसाद संभालते थे। उनके जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और भविष्य की चिंता सामने खड़ी है। चिंता सिर्फ आज की नहीं है।
मायके में कोई नहीं था, अब पति भी नहीं रहा... रामप्रसाद के घर के ठीक सामने सुमेर दांगी का घर है। सुमेर ने भी जन्माष्टमी की रात रामप्रसाद के साथ शराब पी थी। कुछ ही समय बाद मौत हो गई।
चचेरे भाई दिनेश उस रात का मंजर याद करते हुए बताते हैं गांव में एक साथ इतनी मौतें हुईं कि चौराहे पर अर्थियां रखी थीं, लेकिन उन्हें उठाने वाला भी कोई नहीं था। गांव के आधे से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती थे। सुमेर की पत्नी प्रीति की कहानी भी कम दर्दनाक नहीं है। उनके दो बच्चे हैं- बेटा 9 साल का और बेटी 12 साल की।
प्रीति बताती हैं उस रात पति शराब पीकर घर आए और सो गए। सुबह उठे तो पेट दर्द की शिकायत की। अस्पताल में मौत हो गई। प्रीति के लिए यह सिर्फ पति को खोने का दुख नहीं है। कहती हैं मायके में पहले ही मां-पिता और भाई-बहन कोई नहीं थे। अब ससुराल में भी पति का सहारा नहीं रहा।
घर में वह, उनकी सास और दो छोटे बच्चे हैं। खेती भी इतनी नहीं कि परिवार का खर्च आसानी से चल सके। “बच्चों के भविष्य का कुछ समझ नहीं आ रहा। सरकार उनकी पढ़ाई की व्यवस्था कर दे तो अच्छा रहेगा।”
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने परिजन से की मुलाकात
बंडा से करीब पांच किलोमीटर पश्चिम में स्थित इस गांव में जहरीली शराब से सात लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। लोधी, रजक और कुर्मी परिवार रहते हैं। उस दिन पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। सड़क पर नेताओं और कार्यकर्ताओं की आवाजाही थी। लेकिन घरों में अब भी मातम था।
मुख्य सड़क पर बने आयुष्मान आरोग्य केंद्र में लगातार आठ दिनों से स्वास्थ्य शिविर चल रहा था। अस्पताल से लौटे मरीजों की स्क्रीनिंग और फॉलोअप किया जा रहा था। इसी बीच शनिवार को एक और युवक विनोद रजक की मौत हो गई। उसके घर में सुबह से ही रिश्तेदार और परिजन जुटे थे।
सभी अंतिम संस्कार के लिए विनोद के पार्थिव शरीर के पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। बेंगलुरु से पिता की मौत पर आया बेटा, चाचा को भी नहीं बचा पाया। दो सगे भाइयों की भी जहरीली शराब से मौत हुई है।
रोजी-रोटी के लिए बेंगलुरु में मजदूरी करने वाले गोविंद लोधी बताते हैं कि जहरीली शराब ने उनके पिता उजियार सिंह लोधी और चाचा दोनों की जान ले ली। गोविंद का बाकी परिवार इंदौर में रहता था। रक्षाबंधन पर पिता, मां और परिवार के दूसरे सदस्य गांव आए थे।
पिता की मौत की खबर मिलने पर गोविंद बेंगलुरु से पहुंचे। तब तक पिता का अंतिम संस्कार हो चुका था। पिता की मौत के बाद चाचा ने शराब पी ली। उनकी भी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। गोविंद के लिए एक के बाद एक दो सदमे थे।
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