अब प्रदेश में...एक देश-एक विधान: मोहन सरकार ने संघ-जनसंघ के स्वप्न को किया साकार
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रदेश के बाहर भी रहते हैं, तो लागू होगा यूसीसी, शादी का पंजीयन अनिवार्य
समान नागरिक संहिता लागू करने वाला प्रदेश चौथा भाजपा शासित राज्य बना, बस अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतज़ार
मुख्यमंत्री ने कहा- 10 लाख सुझावों में से 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं व 40 फ़ीसदी पुरुषों ने किया प्रस्ताव का समर्थन
मुख्यमंत्री की दो टूक- इस कानून से धार्मिक रीति- रिवाजों पर कोई हस्तक्षेप नहीं, न ही असर होगा, आदिवासी समुदाय दायरे से बाहर
कांग्रेस ने बिल के जरिये आरएसएस का एजेंडा लागू करने का लगाया आरोप, भाजपा बोली- कांग्रेस कर रही तुष्टिकरण की राजनीति
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट।
डॉ मोहन यादव की सरकार ने सूबे में संघ-जनसंघ-भाजपा के उस दशकों से देखे गए स्वप्न को साकार कर दिया, जो स्व डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसे पार्टी के पुरखों ने देश की आजादी के साथ ही देखा था।
राज्य के मुखिया के दृढ़ संकल्प ने समान नागरिक संहिता को कानूनी जामा पहना दिया। अब मध्य प्रदेश में ' एक देश-एक विधान' लागू होगा। एमपी ऐसा करने वाला देश का चौथा भाजपा शासित राज्य होगा। विधानसभा का पावस सत्र इस ऐतिहासिक बिल का साक्षी बना।
कांग्रेस ने पुरजोर विरोध किया और इस प्रकिया को आरएसएस के गुप्त एजेंडे से जोड़ा, लेकिन सदन में सरकार के सामने उसकी एक नहीं चली। अब यूसीसी बिल राज्यपाल के जरिये राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए रवाना कर दिया गया है। मंजूरी मिलते ही अब प्रदेश में बहु विवाह व तलाक प्रथा पर कानूनी रोक लग जाएगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि यूसीसी का किसी भी प्रकार के धार्मिक रीति-रिवाजों से कोई सम्बंध नही, न हस्तक्षेप होगा। आदिवासी समुदाय इस कानून से मुक्त रखा गया है।
विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी सहित 8 बिल पास हो गए। यूसीसी बिल पारित करने वाला मध्य प्रदेश चौथा भाजपा शासित राज्य बन गया है। अब बिल राज्यपाल के जरिये राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
बिल में बहु विवाह, ट्रिपल तलाक, हलाला और लिव इन रिलेशनशिप जैसे प्रावधानों की चर्चा है, लेकिन इसमें ऐसे कई प्रावधान है, जिनका सम्बंध आम लोगों की नौकरी व विवाह से है। अब मध्य प्रदेश में सितम्बर 2008 के बाद विवाह करने वालो के लिए यूसीसी के तहत रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
यूसीसी लागू होने के एक साल के भीतर पंजीयन कराना होगा। ये क़ानून मध्य प्रदेश के बाहर रहने वाले ऐसे लोगो पर लागू होगा, जो कानूनन इसी राज्य के निवासी हैं।
यूसीसी पर मंगलवार को सदन में सत्तापक्ष व विपक्ष आमने सामने रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टिकरण व वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार में कहा कि भाजपा यूसीसी के जरिये आरएसएस का एजेंडा लागू कर जनता से जुड़े मूल मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
सीएम ने पलटवार करते हुए कहा कि यूसीसी का मुस्लिम महिलाओं व पुरुषों ने भी समर्थन किया है। इससे धार्मिक रीति-रिवाजों पर कोई असर नहीं होगा, न कोई हस्तक्षेप होगा। सीएम ने दावा किया कि प्रदेश के विधायी इतिहास में पहली बार किसी विधेयक के प्रस्ताव पर 10 लाख सुझाव मिले, जिनमें 93 प्रतिशत लोगों में समर्थन किया। समर्थन करने वालों के 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुष भी शामिल हैं।
यूसीसी के प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं- बहुविवाह और तलाक पर रोक किसी भी धर्म के व्यक्ति को पहली पत्नी-पति के रहते हुए बिना कानूनी तलाक के दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी। ऐसा करने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। तीन तलाक और निकाह हलाला को भी दंडनीय बनाया गया है।
विवाह का अनिवार्य पंजीकरण
सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है।
संपत्ति में अधिकार
संपत्ति और उत्तराधिकार में बेटे और बेटी को समान अधिकार दिए गए हैं।
लिव-इन-रिलेशनशिप में सख्ती
यदि कोई वयस्क लिव-इन-रिलेशनशिप में रहना चाहता है, तो उसे 1 महीने के भीतर इसका रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर 3 महीने तक की सजा का प्रावधान है।
विवाह की आयु और रिश्ते
विवाह के लिए लड़कों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़कियों की 18 वर्ष तय की गई है। ब्लड रिलेशन (सगे संबंधियों) में शादी पर प्रतिबंध लगाया गया है।
आदिवासी समुदाय को छूट
राज्य की जनजातीय (आदिवासी) आबादी को उनकी विशिष्ट परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण हेतु इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
यूसीसी लागू कर एमपी चौथा भाजपा शासित राज्य बना
मोहन यादव सरकार ने भारी हंगामे के बीच समान नागरिक संहिता विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया है। उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्य प्रदेश यूसीसी बिल पारित करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है। कांग्रेस ने इस विधेयक का सदन में कड़ा विरोध किया।
कांग्रेस ने इसे संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ और एक राजनीतिक एजेंडा बताया। विपक्ष की मांग थी कि बिल को प्रवर समिति के पास भेजा जाए, जिसे सत्ता पक्ष ने खारिज कर दिया।
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव का तर्क है कि यह कानून महिला सशक्तिकरण और राज्य के सभी नागरिकों के लिए बिना किसी धर्म के, भेद के उत्थान के लिए एक ऐतिहासिक कदम है।इस विधेयक के कानून बन जाने से राज्य के सभी नागरिकों (आदिवासियों को छोड़कर) के लिए शादी, तलाक और संपत्ति जैसे मामलों में एक ही नियम लागू होगा।
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