414 की आजीवन सदस्यता रद्द करने पर महाराष्ट्र साहित्य सभा को दिया नोटिस: सभा की पंजीकृत नियमावली में नहीं है ट्रस्ट बोर्ड को कार्यकारिणी भंग करने व नई समिति गठित करने का अधिकार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दशकों पुरानी मराठी समाज की प्रमुख महाराष्ट्र साहित्य सभा के पदाधिकारियों को हाई कोर्ट ने 414 आजीवन सदस्यों की सदस्यता स्थगित करने के मामले में नोटिस दिया है। सभा के ट्रस्ट बोर्ड के सदस्य अशोक चितले व मुकुंद कुलकर्णी ने तत्कालीन कार्यकारिणी के सभी सदस्यों से इस्तीफे लेकर कार्यकारिणी भंग कर तदर्थ समिति गठित कर दी थी, जिसके विरुद्ध पीड़ित सदस्यों ने हाई कोर्ट की शरण ली।
न्यायमूर्ति संदीप भट्ट ने 22 जुलाई को महाराष्ट्र साहित्य सभा व रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी विरुद्ध चेतन पिता दीपक धड़वईवाले की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति ने सभा पदाधिकारियों के अलावा रजिस्ट्रार को भी नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी रवींद्र देशपांडे ने की।
यह है मामला
महाराष्ट्र साहित्य सभा में 10 वर्ष पूर्व पहले की कार्यकारिणी के ही सदस्यों को सहयोजित किया गया था। कुछ समय बाद तदर्थ समिति भंग कर अस्थायी कार्यसमिति नियुक्त कर दी गई। मोहन रेडगावकर को उक्त समिति का सचिव बनाया गया। समिति के निर्णयानुसार सचिव रेडगावकर ने संस्था के 414 आजीवन सदस्यों को सदस्यता से स्थगित करते हुए नोटिस थमा दिया।
इसमें कहा गया था कि चूंकि आपके मेंबरशिप फॉर्म को तत्कालीन सचिव द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया है, इसलिए सदस्यता स्थगित की जाती है। साथ ही आप साधारण और विशेष सभा में शामिल नहीं हो सकेंगे, साथ ही चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे। मतदान की पात्रता भी नहीं होगी। पेंडिंग मेंबरशिप पर आगामी निर्वाचित कार्यकारिणी निर्णय लेगी।
इस नोटिस के बाद 2022 और 2023 में कार्यकारिणी के चुनाव हो गए, लेकिन इन स्थगित सदस्यों पर कोई फैसला नहीं लिया गया। इस मनमाने निर्णय के विरुद्ध वर्ष 2011 में आजीवन सदस्य बने चेतन धड़वईवाले ने पदाधिकारियों से पत्राचार किया, लेकिन जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने प्रशासन से शिकायतें की। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का भी उल्लंघन
मामले का उल्लेखनीय पहलू ये भी है कि सदस्यों के प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का भी सरासर उल्लंघन किया गया। सभा की पंजीकृत नियमावली (बायोलॉज) में भी ट्रस्ट बोर्ड को कार्यकारिणी भंग करने का, नई समिति गठित करने का कोई प्रावधान नहीं है।
यह बात सभा के पदाधिकारियों ने शासन को दिए पत्र में स्वीकार भी की है। जांच-पड़ताल में भी पता चला है कि पूर्व सचिव अनिल कुमार धड़वईवाले ने बरसों से सभा के एक समूह विशेष द्वारा की जा रही मनमानीपूर्ण कार्रवाई की शिकायतें की हैं। इस पर अस्थायी कार्य समिति और ट्रस्ट बोर्ड ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी।
वर्ष 2017 में अनिल कुमार की याचिका पर इंदौर हाई कोर्ट ने संस्था की जांच का आदेश दिया था। इसमें यह बात सामने आई थी कि संस्था का ट्रस्ट बोर्ड ही अवैध है, क्योंकि संस्था के बायोलॉज के प्रावधानों के अनुसार सभा की कार्यकारिणी के हर साल चुनाव अनिवार्य हैं, जबकि सभा के चुनाव 1992, 1996, 2004 और फिर 2009 में हुए थे।
इसके बाद नहीं। सभी कार्यकारिणी अवैधानिक थीं और इसी दरमियान 2004 में मुकुंद कुलकर्णी और वर्ष 2007 में अशोक चितले को इन्हीं अवैध कार्यकारिणी ने ट्रस्टी नियुक्त किया। इस लिहाज से ट्रस्टी भी अवैध ही थे और संस्था पर कब्जा बनाए रखने के उद्देश्य से उन्होंने 414 सदस्यों की सदस्यता 10 साल से लंबित रखी।
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