राज परिवार की संपत्ति विवाद में नया पेंच: कोर्ट के बार-बार कहने पर भी पूरी संपत्ति का ब्योरा नहीं, बंटवारा फिर अटका
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
सिंधिया राजपरिवार की अरबों रुपये की संपत्ति के बंटवारे का मामला एक बार फिर अटक गया है। ग्वालियर जिला न्यायालय ने समझौता डिक्री की प्रक्रिया पूरी करने के लिए परिवार से विवादित संपत्तियों का पूरा विवरण (इंडेक्स) और नक्शा मांगा है, लेकिन लगातार दो सुनवाई के बाद भी यह जानकारी अदालत को उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके चलते मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी और सुनवाई टलती रही।
समझौता डिक्री के लिए जरूरी है पूरी संपत्ति का विवरण
यह मामला ग्वालियर जिला न्यायालय में लंबे समय से विचाराधीन है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ यशोधरा राजे, वसुंधरा राजे व उषा राजे राणा ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 23 नियम 3 के तहत आपसी समझौते का आवेदन प्रस्तुत किया है।
कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, इस नियम के तहत समझौता डिक्री पारित करने से पहले अदालत को बंटवारे में शामिल सभी संपत्तियों का पूरा विवरण, इंडेक्स और नक्शा प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। अदालत द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
नियम बदलते तो नहीं देना पड़ता पूरा ब्योरा
कानूनी जानकारों के अनुसार यदि परिवार सीपीसी के आदेश 23 नियम 1 के तहत आवेदन करता, तो संपत्ति का विस्तृत विवरण देना आवश्यक नहीं होता। उस स्थिति में वादी अपना दावा वापस लेकर अदालत के बाहर समझौता कर सकते थे।
लेकिन परिवार ने आदेश 23 नियम 3 के तहत समझौते का विकल्प चुना, जिससे अब पूरी संपत्ति का रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना कानूनी रूप से आवश्यक हो गया है।
क्या विवादों से बचने की कोशिश?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधिया परिवार की संपत्तियां केवल प्रत्यक्ष अचल संपत्तियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कुछ संपत्तियां अप्रत्यक्ष या कंपनियों के माध्यम से भी जुड़ी बताई जाती हैं।
ऐसे में यदि पूरी संपत्ति का खुलासा होता है तो स्वामित्व, कर (टैक्स) और अन्य कानूनी पहलुओं से जुड़े नए विवाद सामने आ सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में परिवार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कौन-कौन सी प्रमुख संपत्तियां हैं?
जय विलास पैलेस (ग्वालियर), जो लगभग 12.40 लाख वर्गफीट क्षेत्र में फैला है।
उषा किरण पैलेस होटल।
ऐतिहासिक रानी महल, छोटी विश्रांति और हिरण वन कोठी।
पद्मा विलास पैलेस (पुणे)।
मुंबई में समुद्र किनारे स्थित कोठी और कई फ्लैट।
नई दिल्ली के सफदरजंग रोड स्थित लेखा विहार और सिंधिया विला सहित अन्य संपत्तियां।
उज्जैन स्थित ऐतिहासिक कालियादेह पैलेस।
सिंधिया इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य व्यावसायिक परिसंपत्तियां।
23 दावेदार, इसलिए जटिल हुआ मामला
संपत्ति विवाद में अब तक 23 दावेदार सामने आ चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से ज्योतिरादित्य सिंधिया, यशोधरा राजे, वसुंधरा राजे, ऊषा राजे राणा, प्रतिमा देवी, कनिका देवी और चित्रांगदा राजे शामिल हैं। दावेदारों की बड़ी संख्या के कारण प्रत्येक के हिस्से का निर्धारण और संपत्ति का वर्गीकरण न्यायालय के लिए भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
वकील बोले- अब पूरा ब्योरा देना होगा
ग्वालियर जिला न्यायालय के अधिवक्ता चैन सिंह राजपूत के अनुसार, यदि आवेदन आदेश 23 नियम 1 के तहत होता तो संपत्ति का विस्तृत रिकॉर्ड आवश्यक नहीं था। लेकिन आदेश 23 नियम 3 के तहत समझौता डिक्री की मांग की गई है, इसलिए अदालत को पूरी संपत्ति का विवरण देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। उनका कहना है कि मौजूदा प्रक्रिया में संपत्ति का विवरण प्रस्तुत किए बिना समझौता डिक्री पारित होना संभव नहीं है।
अब अगली सुनवाई पर निगाहें
लगातार दो बार सुनवाई टलने के बाद अब सभी की नजर अगली तारीख पर टिकी है। अदालत यह देखेगी कि क्या सिंधिया परिवार आवश्यक दस्तावेज और संपत्तियों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करता है या फिर मामला एक बार फिर आगे बढ़ने से पहले अटक जाता है। इससे वर्षों पुराने इस संपत्ति विवाद के समाधान की दिशा भी तय होगी।
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