ग्राम पंचायत क्षेत्र की रजिस्ट्री में नगर निगम की ड्यूटी: संपदा सिस्टम के अजब कारनामे से सवालों के घेरे में पंजीयन विभाग
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
संपदा सिस्टम की कार्यप्रणाली फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित भूखंड की रजिस्ट्री के दौरान नगर निगम की ड्यूटी वसूलने के मामले का खुलासा हुआ है। हैरानी यह है कि इसी कॉलोनी के दूसरे भूखंड की रजिस्ट्री में नगर निगम की ड्यूटी नहीं लगाई गई।
मामले को लेकर जनता सेवाप्रदाता ने शिकायत की है, जबकि अभिभाषक जितेंद्र जैन ने पंजीयन कार्यालय अभिभाषक समिति को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच और अतिरिक्त वसूली की राशि वापस कराने की मांग उठाई है।
गोयल हिल्स में दो रजिस्ट्री, नियम अलग-अलग... मामला बड़िया कीमा ग्राम पंचायत क्षेत्र में विकसित हो रही गोयल हिल्स कॉलोनी का बताया जा रहा है। यहां भूखंड क्रमांक 53 और 54 की रजिस्ट्री में संपदा सिस्टम द्वारा अलग-अलग तरीके से ड्यूटी लगाए जाने का आरोप है।
शिकायत के अनुसार, ईशा साधवानी ने भूखंड क्रमांक 53 की रजिस्ट्री कराई तो उनसे नगर निगम की ड्यूटी के नाम पर 41,850 रुपए वसूले गए। वहीं, इसी कॉलोनी के भूखंड क्रमांक 54 की रजिस्ट्री प्रियंका ऐरन के नाम से हुई तो उस पर नगर निगम की ड्यूटी नहीं लगाई गई।
एक ही कॉलोनी, एक ही ग्राम पंचायत क्षेत्र और लगभग समान प्रकृति के भूखंडों की रजिस्ट्री में ड्यूटी के इस अंतर ने संपदा सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभिभाषक समिति में शिकायत, राशि वापसी की लड़ाई... मामले को लेकर अभिभाषक जितेंद्र जैन ने पंजीयन कार्यालय अभिभाषक समिति को लिखित शिकायत दी है। उनका कहना है कि यदि किसी पक्षकार से गलत तरीके से अथवा निर्धारित राशि से अधिक स्टाम्प ड्यूटी या अन्य शुल्क जमा कराया गया है तो उसकी वापसी के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी।
अब सवाल पंजीयन विभाग और संपदा सिस्टम से है कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में नगर निगम की ड्यूटी किस आधार पर लग रही है और एक ही कॉलोनी के दो भूखंडों पर अलग-अलग ड्यूटी निर्धारण क्यों हुआ? विभाग यदि इसे तकनीकी त्रुटि मानता है तो ऐसी त्रुटियां कितनी रजिस्ट्रियों में हुई हैं, इसकी भी जांच जरूरी है।
रोज दो-तीन रजिस्ट्रियों में गड़बड़ी का दावा
जनता सेवाप्रदाता की शिकायत में दावा किया गया है कि बड़िया कीमा सहित अन्य पंचायत क्षेत्रों में रोजाना दो-तीन रजिस्ट्रियों में इसी तरह की स्थिति सामने आ रही है। यदि यह दावा सही है तो यह केवल एक रजिस्ट्री का मामला नहीं, बल्कि संपदा सिस्टम में दर्ज स्थानीय निकाय संबंधी जानकारी और ड्यूटी निर्धारण की प्रक्रिया की व्यापक जांच का विषय बन जाता है।
पंचायत क्षेत्र में नगर निगम की ड्यूटी कैसे?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संबंधित क्षेत्र ग्राम पंचायत के अधीन है तो वहां होने वाली रजिस्ट्री में नगर निगम की ड्यूटी किस आधार पर जोड़ी जा रही है? यदि किसी विशेष परिस्थिति में नगर निगम की ड्यूटी लागू होती है तो फिर उसी कॉलोनी के दूसरे भूखंड पर वह ड्यूटी क्यों नहीं लगाई गई?
मामला केवल 41,850 रुपए की वसूली तक सीमित नहीं माना जा रहा है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि बड़िया कीमा सहित आसपास के ग्राम पंचायत क्षेत्रों में बड़ी संख्या में नई कॉलोनियां विकसित हो रही हैं और यहां रोजाना कई रजिस्ट्रियां हो रही हैं।
ऐसे में यदि संपदा सिस्टम में तकनीकी अथवा रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ी के कारण गलत ड्यूटी जुड़ रही है तो इसका असर बड़ी संख्या में रजिस्ट्री कराने वाले पक्षकारों पर पड़ सकता है।
अब जांच की जरूरत
संपदा सिस्टम को रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए लागू किया गया है, लेकिन यदि सिस्टम ही एक जैसे मामलों में अलग-अलग ड्यूटी निर्धारित कर रहा है तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। विभाग को बड़िया कीमा और अन्य ग्राम पंचायत क्षेत्रों में हाल ही में हुई रजिस्ट्रियों का रिकॉर्ड खंगालकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितने पक्षकारों से नगर निगम की ड्यूटी वसूली गई और कितने मामलों में नहीं।
एक ही कॉलोनी में दो भूखंडों पर अलग-अलग ड्यूटी ने संपदा सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले की जांच कर अतिरिक्त वसूली की राशि वापस करता है या इसे भी सिस्टम की तकनीकी गलती बताकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
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