संजय उर्फ रॉनी कौशल की कस्टडी से खुली कड़ियां: ड्रग्स केस के पीछे छिपा सट्टे का कनेक्शन; अब जांच का फोकस-कौन खेलता था, कौन खिलाता था और पैसा किसके पास पहुंचता था
KHULASA FIRST
संवाददाता

धर्मेंद्र खिंची, मनीष उर्फ मन्नी और निखिल चौहान तक पहुंची जांच
70-80 लाख के कथित सट्टे के खेल में नाना पटवारी के संपर्कों की पड़ताल...
खुलासा फर्स्ट , इंदौर ।
ड्रग्स मामले में हुई पुलिस कार्रवाई के बाद अब जांच की दिशा कथित ऑनलाइन सट्टे के नेटवर्क की तरफ मुड़ती दिखाई दे रही है। इस पूरे मामले में पुलिस की पूछताछ और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल के दौरान ऐसे नाम सामने आने की चर्चा है, जिनके बीच लंबे समय से संपर्क होने की बात कही जा रही है। इनमें पुलिस कस्टडी में मौजूद रॉनी कौशल के साथ धर्मेंद्र खिंची, मनीष उर्फ मन्नी और निखिल चौहान के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। इसी कथित नेटवर्क से जुड़े संपर्कों में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आई है।
सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित तौर पर 70 से 80 लाख रुपए तक के सट्टे के कारोबार का है। सूत्रों के मुताबिक, इस ग्रुप से जुड़े लोगों द्वारा लाखों रुपए का सट्टा खेला और खिलाया जाता था। हालांकि, रकम का यह आंकड़ा अभी पुलिस जांच में आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि इतना बड़ा सट्टा कारोबार संचालित हो रहा था तो उसका पूरा हिसाब-किताब कौन रखता था, रकम का लेनदेन किन माध्यमों से होता था और इस खेल में कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
धर्मेंद्र खिंची, मनीष उर्फ मन्नी और निखिल चौहान की कथित भूमिका क्या थी? लाखों के कथित सट्टे का संचालन कौन कर रहा था?
सट्टा खेलने और खिलाने वालों के बीच पैसों का हिसाब कौन रखता था? क्या ड्रग्स और सट्टे के कथित नेटवर्क में कोई साझा संपर्क था? नाना पटवारी के मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड में इस कथित नेटवर्क से जुड़ी कोई कड़ी मिलती है या नहीं? फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ड्रग्स की जांच के दौरान पुलिस को सट्टे के उस नेटवर्क की कड़ी मिल गई है, जिसमें लाखों रुपए का कथित खेल चल रहा था? और क्या इस नेटवर्क के संपर्कों की जांच आगे बढ़ते-बढ़ते नाना पटवारी तक पहुंची है? इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच, साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल के बाद ही साफ होगा। फिलहाल पुलिस की जांच में सामने आने वाली अगली कड़ी पर सभी की नजरें टिकी हैं।
नाना पटवारी का नाम आने से जांच ने पकड़ा नया मोड़... ड्रग्स मामले में नाना पटवारी से पुलिस की पूछताछ और उनके मोबाइल फोन जब्त किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद उनके संपर्कों की जांच की चर्चा है। पुलिस कथित तौर पर यह पता लगाने में जुटी है कि उनके मोबाइल में किन लोगों से लगातार संपर्क था और क्या इनमें से किसी का संबंध सट्टे से जुड़े बताए जा रहे लोगों से था।
यही वह बिंदु है, जहां से ड्रग्स और सट्टे के कथित नेटवर्क के बीच संभावित कनेक्शन की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि दोनों मामलों में कहीं कोई साझा व्यक्ति, आर्थिक लेनदेन या संपर्क तो नहीं था। हालांकि, नाना पटवारी की ओर से ड्रग्स से जुड़े आरोपों से इनकार किया गया है और उन्होंने कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। ऐसे में उनके खिलाफ किसी भी आरोप की पुष्टि जांच में सामने आने वाले ठोस साक्ष्यों से ही होगी।
पूछताछ से निकलेगी कनेक्शन की चेन
पूरे मामले में रॉनी कौशल की भूमिका को लेकर पुलिस की पूछताछ महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस कस्टडी में मौजूद रॉनी से उसके संपर्कों और गतिविधियों को लेकर जानकारी जुटाए जाने की बात सामने आ रही है। इसी दौरान धर्मेंद्र खिंची, मनीष उर्फ मन्नी और निखिल चौहान के नाम सामने आने की चर्चा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन लोगों के बीच केवल व्यक्तिगत संपर्क था या इनके बीच आर्थिक और कारोबारी लेनदेन भी होता था। यदि मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और बैंक ट्रांजेक्शन में कोई सीधा लिंक सामने आता है तो जांच की दिशा पूरी तरह बदल सकती है।
पैसा कहां से आया, कहां गया
सूत्रों के दावे के मुताबिक, कथित नेटवर्क में 70 से 80 लाख रुपए तक का सट्टा खेला और खिलाया जाता था। अब पुलिस की जांच का अहम हिस्सा यह भी हो सकता है कि इस रकम का स्रोत क्या था और इसका हिसाब-किताब किस तरह रखा जाता था। पुलिस यदि बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजेक्शन, डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म से जुड़े रिकॉर्ड तक पहुंचती है तो कथित नेटवर्क के आर्थिक लेनदेन की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
मोबाइल से होगा खुलासा
इस पूरे मामले में अब पुलिस के लिए मोबाइल और डिजिटल डेटा सबसे अहम कड़ी बन सकता है। कॉल डिटेल, वॉट्सएप चैट, यूपीआई ट्रांजेक्शन, बैंक खातों और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े संभावित रिकॉर्ड की जांच से यह पता चल सकता है कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा था। पुलिस के सामने कई सवाल हैं कि रॉनी कौशल और उसके संपर्क में बताए जा रहे लोगों के बीच क्या कनेक्शन था?
नाना की तर्ज पर भरत पटवारी, करता रहा इनकार
कल डीसीपी जोन-1 नरेंद्र सिंह रावत ने नाना पटवारी के भाई भरत पटवारी को पूछताछ के लिए बुलाया था। उसने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2005 में उन्होंने पटवारी रियल एस्टेट एजेंसी बनाई थी। वर्ष 2010 से पहले इसी फर्म के माध्यम से कॉलोनी विकसित कर टीएनसीपी की स्वीकृति ली गई थी, जिसके बाद जमीन सुमित मंत्री को बेच दी गई। बाद में यही फर्म कृष्णायन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित हुई। पूछताछ में भरत ने स्वयं को कंपनी का डायरेक्टर बताया, जबकि नाना पटवारी पहले कंपनी में डायरेक्टर होने से इनकार कर चुका है।
पुलिस का कहना है कि दोनों के बयानों में इसी बिंदु पर गंभीर विरोधाभास मिला है। अब दोनों से जुड़ी कंपनियों और बैंक खातों का वित्तीय रिकॉर्ड भी तलब किया गया है। पूछताछ के दौरान भरत पटवारी ने शुभम वैली कॉलोनी में युवती को बेचे गए प्लॉट नंबर 292 और 293 की जानकारी होने से इनकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि इन प्लॉटों के सौदे को लेकर पहले से जुटाए गए दस्तावेज और आरोपियों के बयानों का मिलान किया जा रहा है। इसी जांच में कई विसंगतियां सामने आई हैं।
भरत पटवारी ने बिजलपुर-निहालपुर मुंडी क्षेत्र के प्रॉपर्टी कारोबारी सुमित पटेल का नाम भी लिया। उनका कहना था कि शुभम वैली के कई प्लॉटों की खरीद-बिक्री सुमित पटेल ने भी की है। इसके बाद पुलिस ने सुमित पटेल को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर दिया है। सूत्रों के अनुसार जमीन संबंधी दस्तावेजों में सामने आ रही गड़बड़ियों के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मामले की जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने राजेंद्र नगर थाना पुलिस से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। वहीं, ऑनलाइन सट्टा मामले में फरार आरोपी यश उर्फ दिनेश लल्ला और मनीष पमनानी पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है।
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