खबर
Top News

जहर है, कब तक पीना पड़ेगा: जानलेवा ‘पैराक्वेट’ पर शीघ्र लगे प्रतिबंध

Khulasa First

KHULASA FIRST

संवाददाता

13 अगस्त 2026, 4:44 pm
शेयर करें:
जहर है, कब तक पीना पड़ेगा

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दे श में मानव जीवन की कीमत सरकारों के लिए ज्यादा मायने नहीं रखती। इसका उदाहरण वे सारे जहरीले जानलेवा कीटनाशक और खरपतवारनाशक एवं अन्य ऐसे ही जहरीले रसायन हैं, जिनका उपयोग देश में धड़ल्ले से किया जा रहा है, जबकि इनमें से कई खतरनाक रसायन विश्व स्वास्थ्य संगठन और विदेश में प्रतिबंधित किए जा चुके हैं।

इसके बावजूद हमारे देश में इनके प्रयोग की पूरी छूट है। यह जानते हुए भी कि इन रसायनों के कारण देश में हर वर्ष हजारों लोगों की जान जा रही है। पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक ऐसा ही जहरीला रसायन है, जो ब्रिटेन में लगभग 20 वर्ष पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है, लेकिन भारत में इस पर प्रतिबंध की कार्रवाई अब शुरू हुई है। केंद्र सरकार तमाम तरह की औपचारिकताएं निभाने में लगी है, जबकि इस पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाना था।

इस बारे में केंद्र सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन ड्रॉफ्ट जारी किया है और इसकी खानापूर्ति होते-होते सैकड़ों लोग इस रसायन के शिकार हो चुके होंगे। फिर भी सरकार पूर्ण प्रतिबंध शीघ्र लगाने के प्रति गंभीर नहीं दिखती।

नागरिक संगठनों के मंच ‘आशा-किसान स्वराज’ ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित पैराक्वेट डाइक्लोराइड प्रतिबंध आदेश, 2026 का पुरजोर स्वागत किया है। साथ ही सरकार से मांग की है कि इस बेहद जहरीले और जानलेवा हर्बिसाइड (खरपतवारनाशक) पर बिना एक भी दिन की देरी किए तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।

इस संबंध में संगठन ने सरकार को पत्र लिखा है तथा देशभर के वैज्ञानिकों, किसानों और नागरिकों से भी जहरीले रसायनों पर प्रतिबंध के लिए केंद्र सरकार से अपील करने का अभियान चलाने की अपेक्षा की है।

गौरतलब है मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 को इस संबंध में एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर जनता से सुझाव मांगे थे। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संगठनों ने स्पष्ट किया है कि भारत इस प्रतिबंध को लागू करने में पहले ही बहुत देर कर चुका है, जिसके कारण अनगिनत लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

पैराक्वेट पर प्रतिबंध का ड्रॉफ्ट आना इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने इसकी बेहद जहरीली प्रकृति, कोई एंटीडोट न होने और इसके कारण हो रही मौतों (विशेषकर आत्महत्या और स्वास्थ्य संबंधी खतरों) को स्वीकार कर लिया है। चूंकि प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है, इसलिए नागरिक संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मांग है कि इसमें और अधिक देरी न करते हुए तुरंत अंतिम प्रतिबंध आदेश जारी किया जाए।

राज्यों को अधिकार... राज्य सरकारों को अपनी कृषि नीतियों के अनुसार कीटनाशकों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिले। प्रदूषक भुगतान सिद्धांत को भी लागू करने की मांग की जा रही है। इसके अंतर्गत कीटनाशक जहर से पीड़ित और उनके परिवारों को मुआवजा देने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं।

दुनियाभर में प्रतिबंध, तो भारत में देरी क्यों?... पत्र में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि जिस खतरनाक रसायन को दुनियाभर के 70 से अधिक देशों में प्रतिबंधित या प्रतिबंधित श्रेणी में रखा जा चुका है, उसके इस्तेमाल की अनुमति भारत में अब तक क्यों दी जा रही है।

एक वर्ष में 34 हजार से अधिक मौतें... राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि केवल वर्ष 2024 में देश में कीटनाशकों के सेवन से 34,000 से अधिक मौतें दर्ज की गईं (जिनमें 26,921 आत्महत्या और 7,821 दुर्घटनाएं शामिल हैं)। ये आंकड़े उन अनगिनत लोगों के अलावा हैं, जो इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से अपनी जान गंवा रहे हैं।

उद्योगों और कंपनियों का खेल... देश में कीटनाशकों, जहरीले रसायनों का हर साल का करोड़ों-अरबों रुपए का व्यापार-व्यवसाय हो रहा है। इस मौत के धंधे में देश ही नहीं, अमेरिका और यूरोप के साथ कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट कंपनियां लगी हुई हैं, जो भारत जैसे देश में जहरीले और उनके देश में प्रतिबंधित रसायनों को बेच रही हैं। इन कंपनियों का भारत सरकार पर हमेशा दबाव और प्रभाव बना रहता है। ये कंपनियां सरकार की नीतियों को भी प्रभावित करने की ताकत रखती हैं, जो एक बड़ा कारण बताया जाता है। इसीलिए मुनाफाखोर कंपनियां बेखौफ अपना धंधा चलाती हैं।

जानकार बताते हैं कि इस प्रकार के जहरीले रसायनों के उत्पादन और व्यापार से जुड़ी बड़ी कंपनियों और उद्योगों द्वारा अक्सर कानूनी या नीतिगत स्तर पर दबाव बनाया जाता है। सरकार को सभी पक्षों की समीक्षा करनी होती है, ताकि भविष्य में कानूनी अड़चनें न आएं।

वैज्ञानिक समितियों की रिपोर्ट... सरकार ने जनवरी 2026 में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, जिसने जून 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद रजिस्ट्रेशन कमेटी की सलाह पर ड्रॉफ्ट तैयार हुआ।

अंतिम गजट नोटिफिकेशन... पैराक्वेट डाइक्लोराइड के खतरनाक और जहरीले प्रभाव को प्रबंधित करने की मांग पर सरकार ने जो गजट नोटिफिकेशन ड्रॉफ्ट जारी किया है उसी दिन से 30 दिन की समय-सीमा पूरी होने के बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा करके केंद्र सरकार से अंतिम आदेश जारी होगा। जहरीले रसायनों को प्रतिबंधित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे आधिकारिक गजट में प्रकाशित किया जाता है। उसके बाद ही यह देशभर में कानूनी रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित माना जाता है।

कानूनी प्रक्रियाधीन है मामला
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 को पैराक्वेट डाइक्लोराइड प्रतिबंध आदेश का ड्रॉफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसका मतलब है कि सरकार ने इस खतरनाक रसायन को देश में पूरी तरह प्रतिबंधित करने का इरादा आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया है और इस पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नागरिकों और किसान संगठनों ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय से अपील की है कि वह कीटनाशक उद्योग के किसी भी दबाव में न आकर निम्नलिखित सुधारों के साथ कड़े कदम उठाए...विशेषज्ञों ने मांग की है कि पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर तुरंत रोक लगाई जाए। अन्य देशों में इसके अलावा अन्य जो कीटनाशक प्रतिबंधित हैं, वे भारत में भी प्रतिबंधित किए जाएं। नियमित समीक्षा करने के साथ पंजीकृत कीटनाशकों की समय-समय पर वैज्ञानिक समीक्षा की अनिवार्यता हो।

पैराक्वेट डाइक्लोराइड के खतरनाक और जहरीले प्रभाव
आशा-किसान स्वराज द्वारा सरकार को भेजे जाने वाले पत्र में इस रसायन के भयानक दुष्प्रभावों का विशेष उल्लेख किया गया है-

कोई एंटीडोट नहीं (इलाज असंभव): पैराक्वेट दुनिया के सबसे खतरनाक हर्बिसाइड्स में से एक है। इसकी बहुत कम मात्रा भी यदि शरीर के भीतर चली जाए, तो वह जानलेवा साबित होती है, क्योंकि इसका कोई भी ज्ञात एंटीडोट (विषनाशक दवा) मौजूद नहीं है।

फेफड़ों और किडनी पर सीधा हमला: इसके जहर से होने वाली मौतों की दर (केस फैटलिटी रेट) 70 प्रतिशत तक है। यह फेफड़ों और किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे फेफड़ों में फाइब्रोसिस जैसी लाइलाज स्थिति पैदा हो जाती है।

पार्किंसंस और गंभीर बीमारियां: वैज्ञानिक शोधों से पुष्टि हुई है कि पैराक्वेट के संपर्क में आने से तंत्रिका तंत्र पर बुरा असर पड़ता है और पार्किंसंस रोग जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियां होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा यह जन्मजात विकृतियों और बच्चों में विकास संबंधी विकारों का भी कारण बनता है।

खुदकुशी और हादसों का जरिया: बाजार में आसानी से और कम कीमत में उपलब्ध होने के कारण यह युवाओं में आत्महत्या और दुर्घटनावश जहर सेवन का एक बड़ा माध्यम बन गया है।

संबंधित समाचार

एअर इंडिया के सभी पायलटों का होगा ड्रग टेस्ट
Top News

एअर इंडिया के सभी पायलटों का होगा ड्रग टेस्ट:एयर इंडिया एक्सप्रेस भी करेगी जांच; फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में पायलट के गांजा टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद फैसला

5 minutes ago
फ्रूट व्यापारी पर फिर हमला
Top News

फ्रूट व्यापारी पर फिर हमला:बाइक छोड़कर भागे बदमाश; एक दिन पहले दर्ज हुई थी एनसीआर

18 minutes ago
बिरयानी से खुलासा120 कैमरों ने पहुंचाया लुटेरों तक
Top News

बिरयानी से खुलासा120 कैमरों ने पहुंचाया लुटेरों तक:जोमैटो के डिलीवरीबॉय से लूट में दो आरोपी धराए

27 minutes ago
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Top News

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:कर्मचारियों को मिलेगा न्यूनतम वेतन का बकाया; सरकार की याचिकाएं खारिज

28 minutes ago
तिरंगा यात्रा के दौरान इतने विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ी
Top News

तिरंगा यात्रा के दौरान इतने विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ी:अस्पताल में कराया भर्ती; 6 किमी पैदल चलने के बाद एक घंटे धूप-उमस में खड़ा रखने का आरोप

29 minutes ago
विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं और कर्मचारियों के बीच विवाद
Top News

विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं और कर्मचारियों के बीच विवाद:जमकर हुई मारपीट; कुलगुरु के सामने छात्रों को पीटा

36 minutes ago
‘संकल्पित युवा-विकसित भारत’ के जयघोष के साथ निकली राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा
Top News

‘संकल्पित युवा-विकसित भारत’ के जयघोष के साथ निकली राष्ट्रपथ तिरंगा यात्रा:हाथों में तिरंगा लेकर उमड़ा जनसैलाब

39 minutes ago
एयरपोर्ट पर ‘आतंकी हमला’
Top News

एयरपोर्ट पर ‘आतंकी हमला’:मचा हड़कंप; सीआईएसएफ- बीएसएफ और पुलिस ने संभाला मोर्चा, मॉक ड्रिल में परखी सुरक्षा तैयारियां

44 minutes ago
1000 सफाई कर्मचारी बाहर से बुलाए
Top News

1000 सफाई कर्मचारी बाहर से बुलाए:कावड़ यात्रा में 4.80 करोड़ कावड़ियों ने छोड़ा 7000 मीट्रिक टन कचरा

about 1 hour ago
‘रामलला ‘का सीईओ कौन
Top News

‘रामलला ‘का सीईओ कौन:पूर्व आईएएस; आईपीएस और सैन्य अधिकारी रेस में शामिल

about 1 hour ago
कल की दिल्ली बैठक में होगा फैसला
Top News

कल की दिल्ली बैठक में होगा फैसला:केदारनाथ हेली सेवा 15 सितंबर से फिर शुरू करने की तैयारी

about 1 hour ago
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Top News

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला:जेल में बंद कैदियों के बैंक खाते होंगे चालू; KYC के लिए जेलों में लगेंगे विशेष कैंप

about 1 hour ago
भाजपा नेता के घर फायरिंग
Top News

भाजपा नेता के घर फायरिंग:सीसीटीवी में कैद हुए बदमाश; पिता ने भी दी जान से मारने की धमकी

about 1 hour ago
रामकाज को नया नेतृत्व
Top News

रामकाज को नया नेतृत्व:CEO पद की परीक्षा संपन्न

about 1 hour ago
न्यायालय कर्मचारी से 31 लाख की ठगी
Top News

न्यायालय कर्मचारी से 31 लाख की ठगी:ऑनलाइन कमीशन का झांसा देकर जाल में फंसाया

about 1 hour ago
छात्र आंदोलन का 20वां दिन
Top News

छात्र आंदोलन का 20वां दिन:500 प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर; 6 छात्र अब भी अनशन पर

about 1 hour ago
रहवासी इलाके का गार्डन बन गया श्मशान
Top News

रहवासी इलाके का गार्डन बन गया श्मशान:दो बेटों के पिता से संत बने सुलब्धिसागर की अंतिम क्रिया पर बवाल

about 1 hour ago
भारत का व्यापार घाटा बढ़ा
Top News

भारत का व्यापार घाटा बढ़ा:इतने अरब डॉलर तक पहुंचा; आयात में तेज बढ़ोतरी से बढ़ी चुनौती

about 2 hours ago
इंदौर से उज्जैन और पीथमपुर तक दौड़ेगी मेट्रो
Top News

इंदौर से उज्जैन और पीथमपुर तक दौड़ेगी मेट्रो:84 किमी कॉरिडोर की डीपीआर तैयार; सुपर कॉरिडोर से रेडिसन चौराहे तक 17 किमी हिस्से में जल्द संचालन की तैयारी

about 2 hours ago
भाजयुमो नेता मयूरेश पिंगले पर प्लॉट की धोखाधड़ी का आरोप फर्जी
Top News

भाजयुमो नेता मयूरेश पिंगले पर प्लॉट की धोखाधड़ी का आरोप फर्जी:सौदा दो प्लॉट का एक की रजिस्ट्री बाकी पैसा वापस ले चुका अब ब्लैकमेल करने की कोशिश

about 2 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!