रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी नदी में डाला जा रहा कचरा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, देहरादून।
केदारनाथ में सीवेज और कचरा प्रबंधन के दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार के मुताबिक केदारनाथ (गुप्तकाशी) का 600 केएलडी और गौरीकुंड का 200 केएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चालू है।
दूसरी ओर याचिकाकर्ता ने दोनों की क्षमता को अपर्याप्त बताते हुए दावा किया है कि मंदाकिनी नदी में अब भी कचरा डाला जा रहा है। मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पहुंचा तो अधिकरण ने दावे को प्रमाणित करने के लिए चार सप्ताह में साक्ष्य पेश करने का समय दे दिया।
18 अगस्त को एनजीटी की प्रधान पीठ में हुई सुनवाई में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी की 14 अगस्त की रिपोर्ट भी सामने आई। इसमें कहा गया है कि केदारनाथ एसटीपी का निर्माण पूरा हो चुका है, ड्राई रन सफल रहा है और सीवरेज नेटवर्क को क्रियान्वित करने की योजना पर काम चल रहा है।
राज्य सरकार की ओर से दोनों एसटीपी को कार्यशील बताया गया। एनजीटी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर एसटीपी संचालित हैं तो मंदाकिनी तक कचरा पहुंचने का आरोप क्यों सामने आ रहा है।
याचिकाकर्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि एसटीपी की क्षमता पर्याप्त नहीं है और नदी में अभी भी कचरा डाला जा रहा है। इसके समर्थन में संबंधित सामग्री प्रस्तुत करने को चार सप्ताह का समय मांगा गया, जिसे अधिकरण ने स्वीकार कर लिया। यानी मामला सिर्फ एसटीपी बनने तक सीमित नहीं रहा। पूरा सीवरेज नेटवर्क उससे जुड़ा है या नहीं, अब यह भी देखा जाएगा।
2024 से चल रही लड़ाई...यह मामला नया नहीं है। वर्ष 2024 में दाखिल मूल आवेदन में केदारनाथ क्षेत्र की सीवेज व कचरा व्यवस्था को लेकर एनजीटी में याचिका दाखिल की गई थी। अब दो वर्ष बाद भी बहस इस बात पर आकर अटक गई है कि नदी को प्रदूषण से बचाने की व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी है।
18 अगस्त की सुनवाई में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेष सदस्य डा. अफरोज अहमद की पीठ ने तुरंत किसी आरोप पर निष्कर्ष देने के बजाय याचिकाकर्ता को साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया है। अगली सुनवाई दो नवंबर को होगी।
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