गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री, मप्र खुलासा फर्स्ट।
भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में नदियों को मात्र जल स्रोत नहीं, बल्कि देवी के रूप में पूजा जाता है। इनमें गंगा का स्थान सर्वोपरि है। गंगा दशहरा या गंगावतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है।
इस दिन को गंगा दशहरा, गंगा दशमी या दशहरा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। दरअसल, गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व है।
गंगा यानी पवित्र-साफ जल के इसी महत्व को समझते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैरामीटर बनाते हुए हर घर जल और जल है तो कल है के संकल्प को साकार किया।
उनके नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामी गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहल हुईं, जिन्होंने देश की जल सुरक्षा को नई दिशा दी है।
अमृत सरोवर योजना ने जल संरक्षण को नया आयाम दिया। प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण या पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया। अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार हो चुके हैं। इनसे वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधा बढ़ी है।
यह मिशन आजादी के अमृत महोत्सव का हिस्सा है और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। नमामि गंगे परियोजना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नदी फ्रंट विकास और जैव विविधता संरक्षण के कार्य भी हो रहे हैं।
इसी प्रकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रति बूंद अधिक फसल का मंत्र दिया गया, जिसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा मिला। कैच द रेन अभियान ने वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाया।
प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा कि पानी बचाना स्वच्छ भारत मिशन की तरह सामूहिक दायित्व है। उनके मार्गदर्शन में लाखों जल संरचनाएं बनीं, चेकडैम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार हुआ।
इन प्रयासों का परिणाम साफ दिखता है। भूजल रिचार्ज बढ़ा है, ओवर-एक्सप्लॉइटेड इकाइयों की संख्या घटी है और कई जिलों में जल संकट कम हुआ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी का विजन केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि जल संरक्षण को संस्कृति और आदत बनाने का है।
वे बच्चों को वाटर वॉरियर्स बनाने और समाज को जिम्मेदार बनाने पर जोर देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण भारत की विकास यात्रा का अभिन्न अंग बन गया है।
ये प्रयास न केवल वर्तमान की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-समृद्ध भारत का आधार तैयार कर रहे हैं। जल संरक्षण अब मात्र नीति नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बन चुका है।
मध्य प्रदेश भी, जिसे प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल कर रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान एक राज्य स्तरीय जन आंदोलन है।
वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया गया। चालू वर्ष-2026 में भी यह अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन करना है, ताकि प्रदेश जल संकट से मुक्त हो सके।
अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, गहरीकरण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। नए जल स्रोतों का निर्माण, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पुरानी जल संरचनाओं का पुनरुद्धार अभियान के प्रमुख स्तंभ हैं।
प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडेम और स्टॉपडैम के संधारण, हजारों तालाबों के गहरीकरण, नई जल संरचनाओं का निर्माण और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
मध्य प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि जल पर निर्भर है। बढ़ती जनसंख्या, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल प्रदूषण ने जल संकट को गहरा दिया है। इस अभियान का महत्व इन्हीं चुनौतियों के समाधान में निहित है।
अभियान से वर्षा जल का अधिकतम संचयन होता है, जिससे सिंचाई सुविधा बढ़ती है। भूजल स्तर में वृद्धि से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी फसल उत्पादन संभव होता है। खेत तालाबों, रिज-टू-वैली मॉडल और जल संरक्षण संरचनाओं से किसानों की आय बढ़ रही है।
मध्य प्रदेश में प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका जीर्णोद्धार सांस्कृतिक गौरव बढ़ाता है और पर्यटन को बढ़ावा देता है।अभियान जनभागीदारी पर आधारित है।
पानी चौपाल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलें, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हो रही है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से सामुदायिक जिम्मेदारी बढ़ रही है।
इस अभियान से मध्य प्रदेश जल संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में भारी वृद्धि, नदियों का पुनःप्रवाह और लाखों जल संरचनाओं का निर्माण राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
यह अभियान केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है। यशस्वी प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में यह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में सफल हो रहा है।यह मध्य प्रदेश के भविष्य की नींव है। यह हमें सिखाता है कि जल ही जीवन है और उसकी रक्षा हमारा दायित्व है।
यदि हम आज जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां समृद्ध जल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगी। प्रदेशवासियों को इस अभियान से जुड़कर जल संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। स्वच्छ, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्य प्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक इसमें अपना योगदान देगा।
यह मिशन आजादी के अमृत महोत्सव का हिस्सा है और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। नमामि गंगे परियोजना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नदी फ्रंट विकास और जैव विविधता संरक्षण के कार्य भी हो रहे हैं।
इसी प्रकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रति बूंद अधिक फसल का मंत्र दिया गया, जिसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा मिला। कैच द रेन अभियान ने वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाया।
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