चाबी मत छीनिए साहब: व्यवस्था की चाबी ढूंढिए
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंदौर की सड़कों पर कानून का डर नहीं, नियमों के सम्मान की संस्कृति चाहिए
राजकुमार जैन स्वतंत्र लेखक, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर की सड़कों पर रोज हजारों लोग ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं। कोई लालबत्ती पार करता है, कोई गलत दिशा में वाहन दौड़ाता है, कोई हेलमेट नहीं पहनता तो कोई सड़क को ही पार्किंग बना देता है। इन सब पर कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन सवाल यह है कि कानून लागू करने का तरीका क्या हो। यातायात व्यवस्था का अर्थ केवल चालान काटना और वाहन रोकना नहीं है। व्यवस्था तब बनती है, जब पुलिस का अधिकार, नागरिक का कर्तव्य और प्रशासन की जवाबदेही, तीनों एक साथ दिखाई दें।
माननीय उच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणी इसी बुनियादी सवाल की ओर संकेत करती है। सड़क पर किसी वाहन चालक की चाबी छीन लेना, उसके साथ अभद्र व्यवहार करना या उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित करना कानून के शासन की छवि मजबूत नहीं करता। उलटे, इससे आम नागरिक के आत्मसम्मान को चोट लगती है और पुलिस के प्रति उसके मन में भय के बजाय आक्रोश और अविश्वास पैदा हो सकता है।
यह बात भी उतनी ही स्पष्ट होनी चाहिए कि पुलिस के अधिकारों की बात करते समय नागरिकों के कर्तव्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। गलत दिशा में वाहन चलाना, सिग्नल तोड़ना, फुटपाथ या सड़क पर पार्किंग करना, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट वाहन चलाना, ये केवल छोटी या नजरअंदाज किए जाने लायक मामूली गलतियां नहीं हैं। इनके कारण किसी दूसरे की जान जोखिम में पड़ सकती है।
इसलिए इंदौर को पुलिस बनाम जनता की लड़ाई नहीं, बल्कि पुलिस और जनता की साझेदारी चाहिए। लेकिन इसके लिए पुलिसकर्मियों की कार्यस्थितियों पर भी ईमानदारी से बात करनी होगी। घंटों धूप, धूल, धुएं, शोर और प्रदूषण के बीच खड़े रहना, लगातार जाम और दुर्घटनाओं से जूझना तथा हर दिन नियम तोड़ने वाले लोगों से सामना करना आसान काम नहीं है।
ऐसे में यातायात पुलिस के लिए नियमित तनाव प्रबंधन, व्यवहार-कौशल और सॉफ्ट स्किल प्रशिक्षण की जरूरत है। और एक सवाल प्रशासन से भी, क्या सड़क पर अच्छा व्यवहार करने वाले नागरिक को कभी कोई ‘धन्यवाद’ मिलेगा।
हमारी पूरी व्यवस्था उल्लंघन खोजने और चालान काटने में इतनी व्यस्त है कि नियम मानने वाले लाखों नागरिक अदृश्य हो गए हैं। क्यों न सुरक्षित ड्राइविंग, हेलमेट, सीट बेल्ट, सिग्नल और लेन अनुशासन का पालन करने वालों को सार्वजनिक रूप से प्रोत्साहित किया जाए।
चालान से खजाना भरता है, लेकिन सम्मान से व्यवहार सुधरता है। अतः इंदौर को ऐसी यातायात व्यवस्था चाहिए जिसमें पुलिसकर्मी नागरिक को अपराधी समझकर नहीं, जिम्मेदार नागरिक समझकर पेश आए और नागरिक पुलिस को बाधा नहीं, सुरक्षा व्यवस्था का साथी समझे।
चाबी छीनकर सड़क पर अनुशासन नहीं आएगा। व्यवस्था की असली चाबी है, सम्मान, संयम, तकनीक, निष्पक्ष कार्रवाई और नागरिक जिम्मेदारी। इंदौर की सड़कें तभी सचमुच स्मार्ट कहलाएंगी, जब यहां नियम तोड़ने वाले से सख्ती और नियम मानने वाले से सम्मान, दोनों साथ दिखाई देंगे।
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