दो बार टिकट कटा, फिर भी नहीं छोड़ा कांग्रेस का साथ: दतिया की जीत के बाद इस नेता को मिला इनाम; दी गई ये बड़ी जिम्मेदारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, दतिया।
विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा संदेश दिया है। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक को मध्य प्रदेश कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा
उनकी नियुक्ति को उपचुनाव में सक्रिय भूमिका और दो बार टिकट नहीं मिलने के बावजूद पार्टी के लिए लगातार काम करने के इनाम के रूप में देखा जा रहा है। अवधेश नायक का पिछले तीन वर्षों का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है।
भाजपा छोड़कर कांग्रेस का थामा था दामन
वर्ष 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने के बाद उनका नाम दतिया विधानसभा सीट से प्रत्याशी के तौर पर सामने आया था। कांग्रेस ने शुरुआत में उन्हें टिकट भी दिया, लेकिन बाद में फैसला बदलते हुए राजेंद्र भारती को चुनाव मैदान में उतार दिया।
टिकट बदला, लेकिन पार्टी से नहीं बनाई दूरी
2023 में अंतिम समय पर टिकट बदले जाने के बावजूद नायक ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर नहीं की और कांग्रेस के साथ बने रहे। इसके बाद दतिया विधानसभा उपचुनाव आया तो एक बार फिर उनका नाम टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल रहा।
हालांकि इस बार भी कांग्रेस नेतृत्व ने नायक के बजाय घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया। लगातार दूसरी बार चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलने के बावजूद नायक ने खुद को प्रचार अभियान से अलग नहीं किया।
ब्राह्मण समाज को साधने में निभाई अहम भूमिका
उपचुनाव के दौरान अवधेश नायक ने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया। खास तौर पर ब्राह्मण समाज के बीच पार्टी के पक्ष में माहौल तैयार करने की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली।
क्षेत्र में बैठकों, सभाओं और जनसंपर्क के जरिए उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के लिए समर्थन जुटाया। कांग्रेस की चुनावी रणनीति में उनकी इस सक्रियता को महत्वपूर्ण माना गया।
दतिया उपचुनाव में पार्टी की जीत के बाद अब संगठन ने उन्हें प्रदेश स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी देकर इसका राजनीतिक इनाम दिया है।
महासचिव बनाकर कांग्रेस ने दिया संगठन को संदेश
अवधेश नायक को प्रदेश कांग्रेस महासचिव बनाए जाने को केवल एक नियुक्ति के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इसके जरिए पार्टी नेतृत्व ने उन नेताओं को भी संदेश देने की कोशिश की है, जो टिकट या पद की दावेदारी के बीच संगठन में सक्रिय हैं।
नायक को लगातार दो चुनावों में टिकट नहीं मिला, इसके बावजूद उन्होंने बगावत या खुली नाराजगी के बजाय पार्टी प्रत्याशी के लिए काम किया।
अब प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने संकेत दिया है कि व्यक्तिगत दावेदारी से ऊपर उठकर संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं को प्रदेश स्तर पर अवसर दिया जाएगा।
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