भारी वाहनों पर रोक से कारोबार ठप: फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित; व्यापारियों ने मांगी रात में 6 घंटे की छूट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, बड़वाह।
सावन में कावड़ यात्रियों की सुरक्षा के लिए इंदौर-खंडवा मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर लगाई गई रोक का असर अब बड़वाह, सनावद और बेड़िया के कारोबार पर दिखाई देने लगा है। व्यापारियों का कहना है कि 24 घंटे भारी वाहनों का आवागमन बंद होने से बाजार में माल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जबकि कई फैक्ट्रियों में तैयार माल बाहर नहीं भेजे जाने से उत्पादन तक रोकना पड़ रहा है।
कारोबारियों ने कावड़ यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए प्रतिबंध का समर्थन किया है, लेकिन प्रशासन से रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक भारी वाहनों को आवाजाही की अनुमति देने की मांग की है।
किराना, सरिया-सीमेंट की सप्लाई प्रभावित
स्थानीय ट्रांसपोर्ट कारोबारी मोंटी संधू के मुताबिक, इंदौर की ओर से ट्रकों की आवाजाही बंद होने का सीधा असर बड़वाह, सनावद और बेड़िया के बाजारों पर पड़ा है। किराना, सरिया, सीमेंट सहित कई जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
व्यापारियों का दावा है कि कई दुकानों में स्टॉक कम होने लगा है। यदि प्रतिबंध लंबे समय तक इसी तरह जारी रहा तो जरूरी सामान की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
लंबे रूट से माल मंगाना महंगा
प्रतिबंध के कारण व्यापारियों को वैकल्पिक और लंबे रास्तों से माल मंगाना पड़ रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि बढ़ा हुआ भाड़ा आखिरकार वस्तुओं की कीमतों पर असर डाल सकता है, जिसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
ऑयल मिल और कैटल फीड फैक्ट्रियों पर भी असर
भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने से क्षेत्र की ऑयल मिल, कैटल फीड और दूसरी औद्योगिक इकाइयां भी प्रभावित बताई जा रही हैं। कई फैक्ट्रियों में तैयार माल पड़ा है, लेकिन ट्रक नहीं चलने के कारण उसे बाहर नहीं भेजा जा पा रहा।
व्यापारियों की मांग- रात 11 से सुबह 5 बजे तक खोलें रास्ता
व्यापारियों का कहना है कि कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है, लेकिन इसके लिए पूरे 24 घंटे भारी वाहनों को रोकने के बजाय रात में सीमित समय के लिए रास्ता खोला जा सकता है।
उन्होंने प्रशासन से रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक छह घंटे की छूट देने की मांग की है। कारोबारियों का तर्क है कि इस समय कावड़ यात्रियों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम रहती है। नियंत्रित तरीके से भारी वाहनों को निकालने की अनुमति मिलने पर व्यापार और उद्योग को राहत मिल सकती है।
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