नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता में बड़ा खेल: कागजों में 100 बेड के अस्पताल; मौके पर न मरीज मिले न डॉक्टर, 38 मामलों की जांच
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता से जुड़े अस्पतालों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। नियम के मुताबिक नर्सिंग कॉलेज संचालित करने के लिए 100 बेड का अस्पताल होना जरूरी है, लेकिन जांच के दायरे में आए कई कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में वास्तविक चिकित्सा गतिविधियां नहीं मिलने की बात सामने आई है। कहीं अस्पताल लंबे समय से बंद बताए जा रहे हैं तो कहीं भवन और बोर्ड तो मौजूद हैं, लेकिन मरीज, डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ नजर नहीं आए।
मध्यप्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने ऐसे 38 मामलों की जांच के लिए कलेक्टर को पत्र भेजा है। इसके बाद प्रशासन ने समिति गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।
अस्पताल का बोर्ड लगा, अंदर पसरा सन्नाटा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्यामला हिल्स स्थित NITM कॉलेज परिसर में NIMS हॉस्पिटल का बोर्ड लगा मिला। अस्पताल का भवन मौजूद है, लेकिन निरीक्षण के दौरान मरीज, डॉक्टर या अन्य स्टाफ की गतिविधि नजर नहीं आने की बात सामने आई है।
बताया जा रहा है कि जांच शुरू होने के बाद यहां साफ-सफाई का काम शुरू हुआ है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि अस्पताल नियमित रूप से संचालित हो रहा था या केवल कॉलेज की मान्यता से जुड़ी औपचारिकताओं के लिए इसे दर्शाया गया।
काया अस्पताल में भी नहीं दिखे मरीज
अयोध्या स्टेशन के पास स्थित एक अन्य अस्पताल को लेकर भी सवाल उठे हैं। यह अस्पताल पहले माया अस्पताल के नाम से जाना जाता था और अब इसका नाम काया अस्पताल बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यहां रिसेप्शन पर कोई मरीज नहीं मिला और परिसर में भी चिकित्सा गतिविधि नजर नहीं आई। जांच में अस्पताल के संचालन से जुड़े दस्तावेज और वास्तविक स्थिति भी देखी जा रही है।
एक अस्पताल में सामान मिला कबाड़ हालत में
जांच के दौरान शिवराज सिंह कॉलेज से जुड़े अस्पताल में उपकरण और अन्य सामान कबाड़ जैसी स्थिति में मिलने की बात भी सामने आई है। कुछ अस्पताल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज बताए गए हैं, लेकिन मौके पर उनकी नियमित गतिविधियां नहीं मिलीं।
इन तथ्यों के बाद सवाल उठ रहा है कि जब अस्पताल नियमित रूप से संचालित नहीं थे तो संबंधित नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता के लिए इनका लाभ कैसे मिला।
ऐसे होता है कथित फर्जीवाड़ा
नर्सिंग कॉलेजों के लिए निर्धारित सीटों और मान्यता की शर्तें पूरी करने में अस्पताल महत्वपूर्ण होता है। आरोप है कि इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ संचालक भवन में अस्पताल का बोर्ड, इमरजेंसी वार्ड और डॉक्टरों के नाम प्रदर्शित कर देते हैं।
निरीक्षण के दौरान डॉक्टर और अन्य स्टाफ की मौजूदगी दिखा दी जाती है, लेकिन बाकी दिनों में अस्पताल नियमित रूप से संचालित नहीं होता। जांच में अब ऐसे ही दावों की वास्तविकता परखी जा रही है।
38 मामलों की जांच, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
MPNRC ने अस्पतालों से जुड़े 38 मामलों को जांच के लिए कलेक्टर के पास भेजा है। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच समिति गठित की है और तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
जांच में यह देखा जाएगा कि कॉलेजों से संबद्ध अस्पताल वास्तव में संचालित हैं या नहीं, वहां निर्धारित संख्या में बेड, मरीज, डॉक्टर और अन्य स्टाफ उपलब्ध हैं या केवल दस्तावेजों में व्यवस्थाएं दिखाई गई हैं।
मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मामला
नर्सिंग शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ कॉलेजों की मान्यता तक सीमित नहीं है। नर्सिंग छात्रों को अस्पतालों में मरीजों के बीच व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलना जरूरी है। यदि अस्पताल ही संचालित नहीं होंगे तो छात्रों की क्लिनिकल ट्रेनिंग प्रभावित होगी।
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