दिमागी नक्सलवाद पर प्रहार: लाल किले से अब देश का युवा केंद्र में आया
KHULASA FIRST
संवाददाता

देश अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ‘युवा’ हुआ, जेन-जी पीढ़ी पर फोकस
स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सलवाद' के खात्मे की देश में छेड़ी एक नई लड़ाई
स्वतंत्रता दिवस पर नक्सलवाद पर जोरदार प्रहार के साथ मोदी सरकार ने साफ कर दिया अपना ‘2029’ का एजेंडा
एआई सेक्टर में एक करोड़ युवाओं को ट्रेंड करने का भी लाल किले से हुआ वादा, जेन-जी-जेन अल्फा पीढ़ी की चिंता हुई जाहिर
संसद के दोनों सदनों में महिला आरक्षण के लिए प्रधानमंत्री ने लाल किले से मांगा विपक्ष का साथ
प्राचीन भारत के सप्त सिंधु विचार के आधार पर पीएम ने 2047 विकसित भारत के लिए सप्तधारा अवधारणा देश के सामने रखी
प्रधानमंत्री के सवा घंटे के भाषण में युवा व छात्र रहे केंद्र बिंदु, जंतर-मंतर के आंदोलन के बाद मुस्तैद हुई सरकार
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सरकार की तरफ से मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा, कोचिंग माफिया पर वार
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर भारत ‘युवा’ होते हुए नजर आया। प्रधानमंत्री ने लाल किले पर दी 76 मिनट की स्पीच में युवाओं पर फोकस करते हए महिलाओं, विकास समेत अनेक मुद्दे उठाए। इस दौरान ही उन्होंने सबसे बड़ा हमला ‘दिमागी नक्सलियों’ पर किया और अपना ‘2029’ का एजेंडा अभी से सेट कर दिया। उन्होंने ‘दिमागी नक्सलवाद’ को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की बात भी कही। पीएम मोदी ने कहा सालों तक माओवादी सोच वाले लोग देश की सत्ता के गलियारों में जमे रहे। इस विचारधारा ने सरकारी कमेटियों में सलाहकारों की भूमिका के जरिए नीतियों को भी प्रभावित किया। जंगलों में हथियारबंद नक्सलियों को खत्म करने के बाद ‘दिमागी नक्सलवाद’ शब्द के जरिये पीएम ने देश में व्याप्त उस विचार को अब निशाने पर लिया है, जो ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ कि जब तब नारे लगाता है। पीएम ने युवाओं से ऐसे विचार से दूर रहने का आह्वान कर युवाओ के देशभर में शुरू हुए आंदोलन को एक नई दिशा भी दी।
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश से हथियारबंद नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है, लेकिन अब ‘दिमागी नक्सली’ (वैचारिक नक्सलवाद) समाज को भटकाने और अराजकता फैलाने की फिराक में है।
जनता से इन वैचारिक ताकतों को पहचानकर अलग-थलग करने की अपील की गई। प्रधानमंत्री ने कहा हथियारबंद नक्सलवाद का अंत: हो चुका है। जंगलों में गोलियों की आवाज और हिंसा का दौर थम चुका है और अब वहां विकास व विश्वास का तिरंगा लहरा रहा है. लेकिन अब दिमागी नक्सलियों का खतरा बरकरार है।
उन्होंने चेताया कि हालांकि भौतिक रूप से हथियारबंद नक्सलवाद कमजोर हुआ है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ जैसी सोच अभी भी सक्रिय है। ये सोच सत्ता और नीतियों पर प्रभाव डालती आ रही है।
प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्षों तक माओवादी सोच के लोग सत्ता के गलियारों और सरकारी समितियों में सलाहकारों के रूप में जमे रहे, जिससे देश की नीतियां प्रभावित हुईं। युवाओं और समाज को सावधान करते हुए पीएम ने कहा ये लोग हिंसा और अशांति के नए रास्ते खोज रहे हैं तथा समाज व युवा पीढ़ी को गलत राह पर ले जाने का प्रयास कर रहे हैं।
पीएम ने देशवासियों से कहा कि वे इन वैचारिक रूप से खतरनाक तत्वों की पहचान करें और उन्हें समाज में अलग-थलग करें। उन्होंने युवाओं से यह आह्वान किया गया कि वे इन नकारात्मक ताकतों के बहकावे में न आएं और देश को एक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत) बनाने की मुख्यधारा से जुड़ें।
प्रधानमंत्री ने कहा हथियारबंद नक्सली तो चले गए, लेकिन ‘दिमागी नक्सली’ अब भी मौजूद हैं और ऐसी सोच रखने वाले लोग मौके की तलाश में हैं। वे हिंसा और अशांति का रास्ता बना रहे हैं, वे समाज को गलत रास्ते पर ले जाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। हमें इन ‘दिमागी नक्सलियों’ की पहचान करना होगी।
हमें उन्हें अलग-थलग करना होगा और देश के युवाओं को देश को विकसित राष्ट्र बनाने की मुख्यधारा की कोशिशों से जोड़ना होगा।
अब नक्सलवाद के पास आखिरी सांस लेने की ताकत भी नहीं शेष... उन्होंने कहा नक्सलवाद, माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया। नौजवानों को छीन लिया, बर्बाद कर दिया और मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया।
नक्सलवाद ने चार दशक तक हिंदुस्तान के बहुत बड़े हिस्से को वहां की बड़ी आबादी को दबोचकर रखा था। बंदूक की नोंक पर रखकर नक्सलियों ने देश के सामान्य नागरिकों की रक्षा में 3500 से ज्यादा हमारे पुलिस सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए।
युद्ध में जितने सैनिक मरते हैं, उससे ज्यादा हमारे पुलिस-जवानों को जान की बाजी लगानी पड़ी ताकि देश के सामान्य जन को सुरक्षा मिले। पीएम मोदी ने कहा 2014 में हमने संकल्प लिया था कि हम देश को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे और आज मुझे खुशी है कि नक्सली-माओवादी हिंसा, आखिरी सांस लेने की भी शायद रहने की ताकत नहीं रही।
2047 के भारत के लिए ‘सप्तधारा’ सात शक्तियां साथ
प्रधानमंत्री ने लाल किले से ‘सप्तधारा’ का विजन पेश किया। यह अगले 5-7 वर्षों में भारत को तेजी से आगे बढ़ाने और 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए 7 प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ा है। ये अवधारणा प्राचीन भारत के ‘सप्त सिंधु’ विचार पर आधारित है।
ये हैं सात शक्तियां- सात आधार स्तंभ
विनिर्माण-मैन्युफैक्चरिंग : देश में उत्पादन और औद्योगिक ताकत को बढ़ाना।
कृषि और खाद्य प्रसंस्करण : किसानी को आधुनिक बनाना और खाद्य उद्योग को बढ़ावा देना।
प्रौद्योगिकी और नवाचार : नई तकनीक, डिजिटल क्रांति और रिसर्च को आगे लाना।
गति-शक्ति-इंफ्रास्ट्रक्चर : देश में मजबूत कनेक्टिविटी, सड़क, रेल और बुनियादी ढांचे का विकास
रक्षा शक्ति : सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा को और मजबूत करना।
हरित और नीली अर्थव्यवस्था : सौर, हरित ऊर्जा और समुद्री संसाधनों का सही उपयोग।
सॉफ्ट पावर : वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक और कूटनीतिक पकड़ को मजबूत करना।
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