भाजपा के दर्जनभर जिला अध्यक्षों पर गिर सकती है गाज: दतिया उपचुनाव के बाद विधायक-मंत्रीनिष्ठ पदाधिकारियों की होगी समीक्षा
KHULASA FIRST
संवाददाता

महेश दीक्षित 98935-66422 खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट वितरण के बाद सामने आए विरोध, सामूहिक इस्तीफों और अनुशासनहीनता की घटनाओं ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा के लिए मजबूर कर दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश के दर्जनभर से अधिक जिलाध्यक्षों की कार्यशैली की जांच की तैयारी है।
इसमें जिन जिलाध्यक्षों की प्राथमिक निष्ठा पार्टी संंगठन के बजाय किसी मंत्री, सांसद या विधायक के प्रति दिखाई देती है या उनके ‘यस मैन’ की तरह काम करते दिखाई देते हैंं, उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
पा र्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश भाजपा संगठन को स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठनात्मक पदों पर बैठे पदाधिकारियों की जवाबदेही केवल पार्टी संगठन और उसके निर्णयों के प्रति होनी चाहिए। यदि किसी जिले में संगठन व्यक्तिगत प्रभाव में काम करता पाया गया तो संबंधित पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों की समीक्षा होगी तथा उन्हें पार्टी दायित्वों से मुक्त किया जा सकता है।
उपचुनाव के बाद होगी जिलों की पड़ताल...भाजपा दतिया उपचुनाव संपन्न होने के बाद प्रदेश के सभी संगठनात्मक जिलों का फीडबैक जुटाएगी। इस दौरान जिलाध्यक्षों के साथ-साथ प्रमुख संगठन पदाधिकारियों के कामकाज, संगठन विस्तार, अनुशासन बनाए रखने की क्षमता और केंद्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व के निर्णयों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का मूल्यांकन किया जाएगा।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिन जिलाध्यक्षों पर किसी नेता विशेष के प्रभाव में संगठन चलाने या संगठनात्मक निर्णयों को व्यक्तिगत निष्ठा के आधार पर प्रभावित करने के आरोप हैं, उन्हें बदला जा सकता है। ऐसे जिलाध्यक्षों की संख्या दर्जनभर से अधिक बताई जा रही है।
दतिया घटनाक्रम बना समीक्षा का आधार... दतिया उपचुनाव में पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने के बाद जिला संगठन के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफे दिए थे। कुछ कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक रूप से विरोध भी दर्ज कराया।
भाजपा नेतृत्व ने इसे केवल स्थानीय असंतोष नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन के उल्लंघन के रूप में देखा है। पार्टी का मानना है कि प्रत्याशी चयन केंद्रीय नेतृत्व का निर्णय था, इसलिए उसके खिलाफ सार्वजनिक विरोध से पार्टी की छवि प्रभावित हुई और गलत संदेश गया। यही कारण है कि अब जिला इकाइयों की कार्यप्रणाली की व्यापक समीक्षा की तैयारी की जा रही है।
निकाय चुनाव से पहले संगठन को धार देने की तैयारी...भाजपा अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। अगले महीने प्रस्तावित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी पूरी तरह चुनावी तैयारियों में जुटेगी। इससे पहले जिला संगठनों की समीक्षा पूरी कर आवश्यक बदलाव किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कई जिलों में नेतानिष्ठों के हाथों में कमान... बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में संगठन की कमान मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के करीबी नेताओं के हाथों में चली गई है। संगठन यदि किसी व्यक्ति विशेष पर केंद्रित हो जाता है, तो उस नेता के कमजोर पड़ने का असर पूरे संगठन पर दिखाई देता है।
पार्टी के भीतर अब इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि जिला संगठन किसी नेता विशेष की पहचान से नहीं, बल्कि संगठन की विचारधारा, अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व के आधार पर संचालित हो। पार्टी सूत्रों का कहना है इसी उद्देश्य से आने वाले दिनों में संगठनात्मक फेरबदल की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
संगठन मंत्री व्यवस्था पर फिर मंथन.. दतिया प्रकरण के बाद भाजपा जिला और संभाग स्तर पर संगठन मंत्री की व्यवस्था को फिर से मजबूत करने पर भी विचार कर रही है। संगठन मंत्री की भूमिका कार्यकर्ताओं और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने, समय रहते असंतोष की जानकारी प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाने और अनुशासन बनाए रखने की होगी।
पार्टी का आकलन है कि यदि संगठनात्मक संवाद की यह व्यवस्था सक्रिय रहती है तो भविष्य में दतिया जैसी परिस्थितियों को टाला जा सकेगा।
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