33 साल का घोटाला: 6,000 आवंटियों के हक पर डाका डालकर बैठा आईडीए
KHULASA FIRST
संवाददाता

बेलगाम अफसरों की मनमानी से भाजपा सरकार की साख पर बट्टा, जनता में आक्रोश
5.89 करोड़ रु. जमा होने के बावजूद फाइल अटकी, दिवाली से पहले राजपत्र में अधिसूचना जारी करने की मांग
तीन दशकों की प्रशासनिक प्रताड़ना के बाद भी समाधान नहीं; 13 अक्टूबर तक फैसला नहीं हुआ तो आत्मदाह का अल्टीमेटम
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) की स्कीम 171 और स्कीम 77 से मुक्ति की मांग को लेकर वर्षों से संघर्ष कर रहे करीब 6,000 प्लॉटधारकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है।
कल सैकड़ों प्लॉटधारक आईडीए कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के सामने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि 33 साल से जमीन, प्लॉट और मकान के अधिकार के लिए संघर्ष करने के बावजूद मामला सरकारी फाइलों में उलझा हुआ है। अब उन्हें मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित और समयबद्ध निर्णय चाहिए।
प्लॉटधारकों का आरोप है कि उनकी जमीन और पैसा लंबे समय से आईडीए की योजनाओं में फंसा हुआ है। कई परिवारों की एक पीढ़ी अपने भूखंड पर मकान बनाने की उम्मीद में गुजर गई, लेकिन योजना से मुक्ति का रास्ता अब तक साफ नहीं हुआ।
लिखित आश्वासन के बाद लौटे प्रदर्शनकारी... लंबी चर्चा और हंगामे के बाद आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया। इसमें बताया कि स्कीम 171 और 77 के प्लॉटधारकों की ओर से योजना लैप्स करने संबंधी ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। इस पर आईडीए बोर्ड की बैठक अक्टूबर 2026 की निर्धारित तारीख अथवा उससे पहले आयोजित की जाएगी।
लिखित आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी वापस लौट गए, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अब 13 अक्टूबर 2026 की बोर्ड बैठक पर उनकी नजर है। यदि बैठक में पूर्व में दिए गए आश्वासनों के अनुरूप निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
5.89 करोड़ जमा, फिर भी मुक्ति का इंतजार... स्कीम 171 के प्लॉटधारकों के मुताबिक योजना से मुक्ति के लिए 22 दिसंबर 2024 को 5.89 करोड़ रुपए की प्रतिफल राशि जमा की जा चुकी है। इसके बावजूद प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। यही मुद्दा अब प्लॉटधारकों के आंदोलन का प्रमुख आधार बन गया है।
उनका सवाल है कि जब पूरी प्रतिफल राशि जमा हो चुकी है तो योजना से मुक्ति का निर्णय लगातार लंबित क्यों है? प्लॉटधारकों का आरोप है कि अगस्त 2025 की आईडीए बोर्ड बैठक में भी राशि जमा होने के इस महत्वपूर्ण तथ्य को उस तरह प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे योजना की मुक्ति पर प्रभावी निर्णय लिया जा सके।
प्लॉटधारकों द्वारा दिए ज्ञापन के अनुसार, 5 दिसंबर 2024 को अपर कलेक्टर बेनल के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय समिति ने स्कीम 171 से संबंधित 116 आपत्तियों के निराकरण की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
इसमें प्रतिफल राशि 5.84 करोड़ रुपए के स्थान पर 5.89 करोड़ रुपए प्राप्त होने की जानकारी भी सामने रखीथी। इसके बावजूद 8 अगस्त 2025 के बोर्ड संकल्प क्रमांक 169 में राशि जमा होने के तथ्य का उल्लेख नहीं किए जाने पर प्लॉटधारकों ने सवाल उठाए हैं।
योजना को हिस्सों में देखने पर भी आपत्ति... प्लॉटधारकों ने 8 अगस्त 2025 की बोर्ड बैठक में लिए निर्णय पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सहकारी संस्थाओं की भूमि को छोड़कर शेष सरकारी और निजी भूमि के संबंध में अलग से विचार करने का निर्णय लिया गया, जबकि उनके अनुसार पूरी प्रतिफल राशि जमा होने के बाद योजना की स्थिति पर समग्र और स्पष्ट निर्णय होना चाहिए।
स्कीम 77 के प्लॉटधारक भी परेशान
स्कीम 77 के दायरे में आने वाली अयोध्या पुरी के रहवासी भी लंबे समय से इसी तरह के संघर्ष से गुजर रहे हैं। अयोध्या पुरी रहवासी संघ वर्ष 2008 से जमीन और प्लॉट के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है। रहवासियों के अनुसार उनकी जमीन वर्ष 1996 में स्कीम 70 में शामिल की गई थी। इसके बाद से सैकड़ों परिवार अपने भूखंडों के भविष्य को लेकर परेशान हैं।
प्लॉटधारकों के अनुसार संबंधित क्षेत्र पहले स्कीम 132 में शामिल था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद वह योजना समाप्त हुई और बाद में आईडीए ने स्कीम 171 लागू कर दी। इसके बाद से प्रभावित परिवार योजना से मुक्ति की मांग कर रहे हैं।
33 साल से आईडीए के उपभोक्ता हक के लिए भटक रहे हैं। यह स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। जब प्लॉटधारकों की राशि जमा हो चुकी है, तो योजना से मुक्ति में अनावश्यक देरी क्यों हो रही है, इसका जवाब आईडीए को देना होगा। बोर्ड बैठक में इस मामले पर ठोस और अंतिम निर्णय होना चाहिए। यदि उपभोक्ताओं के साथ न्याय नहीं हुआ तो उनकी लड़ाई में मैं उनके साथ खड़ा रहूंगा। प्रशासन को भी इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए वर्षों से लंबित समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। -महेंद्र हार्डिया, विधायक, इंदौर
अगर समय पर एनओसी जारी हो जाती तो उपभोक्ताओं के नक्शे पास होते और वे अपने प्लॉट पर निर्माण कर पाते। आज लोगों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। संभागायुक्त, कलेक्टर और आईडीए सीईओ ने आश्वासन दिया है कि 13 अक्टूबर की बोर्ड बैठक में यह विषय रखा जाएगा और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि 13 अक्टूबर की बैठक के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो रहवासी और कांग्रेस पूरी ताकत के साथ आईडीए के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे। -चिंटू चौकसे, शहर कांग्रेस अध्यक्ष, इंदौर
विधायक महेंद्र हार्डिया ने अधिकारियों से मांगा ठोस समाधान
प्लॉटधारकों की मांग के समर्थन में लंबे समय से आवाज उठा रहे विधायक महेंद्र हार्डिया भी आईडीए कार्यालय पहुंचे। अधिकारियों के साथ बंद कमरे में हुई चर्चा में उन्होंने प्लॉटधारकों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की जरूरत बताई। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कब तक प्रभावित लोगों को तारीख और आश्वासन दिए जाते रहेंगे।
बैठक में संभाग आयुक्त भास्कर लक्षकार, कलेक्टर शिवम वर्मा, आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े, कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे और प्लॉटधारक प्रतिनिधि मौजूद रहे। चर्चा के दौरान प्लॉटधारकों ने दोहराया कि अब उन्हें नई तारीख नहीं, बल्कि अंतिम निर्णय चाहिए।
लगातार बैठकों के बावजूद मामला लंबित
प्लॉटधारकों ने यह भी सवाल उठाया कि 8 अगस्त 2025 के बाद हुई आईडीए बोर्ड की बैठकों में स्कीम 171 के विषय को प्राथमिकता से क्यों नहीं लिया गया। सहकारी संस्थाओं की जांच और लंबित ऑडिट को लेकर भी प्लॉटधारकों ने सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि संस्थाओं से जुड़ी जांच अपनी जगह प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन इसे योजना की मुक्ति में अनिश्चितकालीन देरी का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कुछ संस्थाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी प्रभावित प्लॉटधारकों के अधिकारों पर अनिश्चितकाल तक रोक नहीं लगनी चाहिए।
13 अक्टूबर की बैठक पर टिकी नजर... पुष्प विहार संघर्ष समिति ने 13 अक्टूबर 2026 की आईडीए बोर्ड बैठक को निर्णायक समयसीमा बताया है। समिति के पदाधिकारी राजेश तोमर ने संभाग आयुक्त, कलेक्टर और आईडीए सीईओ के सामने चेतावनी दी कि यदि बैठक में प्लॉटधारकों के पक्ष में पूर्व में दिए गए आश्वासनों के अनुरूप निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। समिति की ओर से आत्मदाह की चेतावनी भी दी गई है। प्रशासन के सामने दी गई इस चेतावनी को देखते हुए अब 13 अक्टूबर की बैठक महत्वपूर्ण हो गई है।
दिवाली से पहले राजपत्र में अधिसूचना की मांग... 10 सितंबर 2026 को पुष्प विहार कॉलोनी प्लॉटधारक समूह ने आईडीए सीईओ को ज्ञापन सौंपकर स्कीम 171 की मुक्ति के लिए विशेष बोर्ड बैठक बुलाने की मांग की।
समूह ने मांग की है कि 22 दिसंबर 2024 को पूरी प्रतिफल राशि जमा होने की तारीख को ध्यान में रखते हुए योजना की स्थिति स्पष्ट की जाए और नियमानुसार राजपत्र में अधिसूचना जारी की जाए।
समूह की अध्यक्ष सुनीता तोमर, कोषाध्यक्ष वर्षा माहेश्वरी, उपाध्यक्ष मुनेंद्र कुमार, महासचिव एन.के. मिश्रा सहित शिल्पी चांडक, विपिन सूद, प्रीति रघुवंशी, राकेश मालवीय, विमला पुरोहित और संजय मुछाल समेत अन्य पदाधिकारी आंदोलन में शामिल रहे।
हमने 2004 में मार्केट से पैसा जुटाकर यहां प्लॉट लिया था। चार साल पहले मेरे पति ने भी बड़े उत्साह से डेवलपमेंट चार्ज जमा किया था। उनका सपना था कि इस दिवाली अपने प्लॉट पर पूजा करेंगे और हमारी बेटी का क्लिनिक बनेगा, लेकिन आज तक सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।
मेरे पति अब इस दुनिया में नहीं हैं और उनका सपना अधूरा रह गया। हमारे वरिष्ठ लोग बार-बार भोपाल और आईडीए के चक्कर काटते हैं, लेकिन हर बार यही कहा जाता है कि जल्द काम हो जाएगा। -भावना अवस्थी, पीड़ित उपभोक्ता
मेरे मम्मी-पापा ने 2006 में प्लॉट खरीदा था। करीब 20-25 साल हो गए, लेकिन आज तक हमें निर्माण की अनुमति नहीं मिली। इतने वर्षों से हम आईडीए के चक्कर काट रहे हैं। हर बार कहा जाता है कि अगले महीने काम हो जाएगा, लेकिन वह अगला महीना कभी नहीं आता।
हमारी मांग है कि आईडीए की योजना हटाई जाए और हमें अपने प्लॉट पर घर बनाने की अनुमति दी जाए। अगर कुछ प्लॉटों को लेकर जांच या विवाद है तो उसके नाम पर 90 प्रतिशत लोगों को क्यों रोका जा रहा है। - अंतिम शर्मा, पीड़ित प्रदर्शनकारी
हम अपनी जमीन और अपना अधिकार मांगने आए हैं। कलेक्टर, संभागायुक्त और आईडीए सीईओ से मुलाकात हुई। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगली बोर्ड बैठक में हमारा विषय रखा जाएगा और इसका लिखित पत्र भी दिया है, लेकिन अधिकार देने के सवाल पर सभी पीछे हट रहे हैं।
हमारा कहना है कि यदि योजना में 10 प्रतिशत से कम विकास हुआ है और उपभोक्ताओं ने डेवलपमेंट चार्ज जमा कर दिया है तो नियमानुसार योजना के लैप्स होने की स्थिति बनती है। -डॉ. अनुष्का अवस्थी, पीड़ित/आंदोलनकारी
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