जिनके हाथों से रोशन होते हैं हजारों घर: उनके अपने आंगन में रहता है अभावों का अंधेरा
KHULASA FIRST
संवाददाता

आधुनिक झालरों के दौर में भी कायम है मिट्टी के दीपकों का उजियारा
बिजली की चमक के बीच मिट्टी के दीयों का कायम है मान
दूसरों की दीपावली संवारने में खप जाती है कुम्हारों की पूरी जान
मिट्टी को आकार देकर खुशियां गढ़ते हैं ये मेहनतकश हाथ
इनके बनाए दीपकों से जगमगाते हैं घर-आंगन, लेकिन खुद का जीवन संघर्षों के साथ
दीपोत्सव पर मिट्टी के हर दीपक में छिपी है एक मजदूर की मेहनत और कुर्बानी
हेमंत उपाध्याय 99930-99008, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
दीपावली आते ही शहरों से लेकर गांवों तक रोशनी का संसार सजने लगता है। बाजार रंग-बिरंगी विद्युत झालरों, चमकदार लाइटों, आकर्षक सजावटी उपकरणों और आधुनिक रोशनी के साधनों से भर जाते हैं। मकानों की छतों से लेकर बालकनी, खिड़कियों और दरवाजों तक बिजली की लड़ियां अपनी चमक बिखेरती हैं।
बदलते समय के साथ दीपावली मनाने के तौर-तरीकों में भी काफी बदलाव आया है, लेकिन इन तमाम आधुनिक साधनों के बीच मिट्टी के छोटे-छोटे दीपकों का अस्तित्व आज भी कायम है। वजह केवल परंपरा नहीं, बल्कि उस मिट्टी की खुशबू, संस्कृति से जुड़ाव और भावनाओं का वह रिश्ता है, जिसे कोई विद्युत झालर कभी पूरी तरह नहीं बदल सकती।
दीपोत्सव की रात जब घरों की मुंडेरों, चौखटों और आंगनों में मिट्टी के दीपक एक कतार में जलते हैं तो उनकी सादगी भरी रोशनी देखने लायक होती है। इन दीपकों की लौ में केवल तेल और बाती नहीं जलती, बल्कि उन अनगिनत हाथों की मेहनत भी दिखाई देती है, जिन्होंने इन्हें तैयार करने के लिए कई दिनों तक पसीना बहाया है।
एक दीपक की कीमत में छिपी होती है कई घंटों की मेहनत
बाजार में मिट्टी का एक दीपक खरीदते समय हम अक्सर उसकी कीमत पर ध्यान देते हैं, लेकिन उसके पीछे लगी मेहनत को नहीं देख पाते। मिट्टी को गूंथने, आकार देने, सुखाने और पकाने तक हर चरण में श्रम लगता है।
तैयार दीपकों को सावधानी से बाजार तक पहुंचाना भी अपने आप में एक चुनौती है, क्योंकि जरा-सी लापरवाही में कई दीपक टूट सकते हैं। इसके बाद भी इनकी बिक्री से मिलने वाली राशि का बड़ा हिस्सा लागत और रोजमर्रा के खर्चों में चला जाता है।
त्योहार के कुछ दिनों में अच्छी बिक्री की उम्मीद इन परिवारों को पूरे साल मेहनत करने का हौसला देती है। कई बार दिनभर दुकान या सड़क किनारे बैठकर ग्राहक का इंतजार करना पड़ता है।
ग्राहक आते हैं तो मोलभाव करते हैं, लेकिन शायद ही कोई यह समझ पाता है कि दीपक बनाने वाले परिवार के लिए कुछ रुपये का अंतर भी कितना मायने रखता है। ऐसे में मिट्टी का दीपक खरीदना केवल एक परंपरा निभाना नहीं, बल्कि मेहनतकश हाथों की आजीविका को सहारा देना भी है।
इनकी मेहनत का सम्मान भी हो दीपावली की खुशियों का हिस्सा
दीपोत्सव का वास्तविक अर्थ केवल अपने घर को रोशन करना नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियों का उजाला पहुंचाना है। ऐसे में दीपावली पर मिट्टी के दीपक खरीदते समय उन हाथों को याद रखना भी जरूरी है, जिन्होंने इन्हें बनाया है।
यदि हम स्थानीय कुम्हारों और छोटे दीपक विक्रेताओं से सीधे दीपक खरीदें, उचित कीमत दें और अनावश्यक मोलभाव से बचें तो उनके त्योहार की खुशियों में भी कुछ इजाफा कर सकते हैं।
हमारे लिए कुछ रुपये की खरीदारी भले ही छोटी बात हो, लेकिन किसी मेहनतकश परिवार के लिए यही कमाई बच्चों के चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। दीपावली पर घर की सजावट के साथ उन लोगों के जीवन में भी थोड़ा उजाला पहुंचाने का प्रयास होना चाहिए, जिनकी मेहनत से हमारा त्योहार जगमगाता है।
दरअसल, मिट्टी का दीपक केवल मिट्टी, तेल और बाती से बना एक छोटा-सा पात्र नहीं है। यह मेहनत, परंपरा, संस्कृति और आत्मसम्मान का प्रतीक है। इसकी छोटी-सी लौ हमें यह भी याद दिलाती है कि उजाला बांटने के लिए हमेशा खुद का जीवन रोशन होना जरूरी नहीं।
कुछ लोग अपनी तमाम परेशानियों और अभावों के बीच भी दूसरों के घरों में रोशनी पहुंचाने का काम करते हैं। दीपावली की रात जब हजारों दीपक एक साथ जलते हैं, तब उनकी चमक के पीछे उन अनदेखे हाथों का पसीना भी होता है।
इस बार जब आप अपनी चौखट पर मिट्टी का दीपक जलाएं तो एक पल उन हाथों के बारे में भी सोचिएगा, जिन्होंने उसे बनाया है। क्योंकि दीपावली की असली जगमगाहट केवल घरों में जलते दीपकों में नहीं, बल्कि उन मेहनतकश लोगों के जीवन में खुशियां पहुंचाने में भी है, जिनकी मेहनत से यह पर्व रोशन होता है।
खुद के घर में भले कम रोशनी, दूसरों के आंगन में बिखेरते हैं उजियारा
इस पूरे कारोबार का सबसे भावुक पहलू उन परिवारों की आर्थिक स्थिति है, जिनके हाथों से हजारों घरों में दीपावली की रोशनी पहुंचती है। कई कुम्हार और दीपक बनाने वाले मजदूर सीमित आमदनी में अपना परिवार चलाते हैं।
सालभर काम की अनिश्चितता और आर्थिक परेशानियों के बीच दीपावली उनके लिए कमाई का एक महत्वपूर्ण अवसर बनकर आती है। त्योहार से पहले वे अपनी पूरी ताकत दीपक तैयार करने में लगा देते हैं।
उम्मीद रहती है कि इस बार बिक्री अच्छी होगी तो घर का खर्च निकलेगा, बच्चों की जरूरतें पूरी होंगी और कुछ बचत भी हो जाएगी। लेकिन विडंबना देखिए कि जिन हाथों से दूसरों के घरों को रोशन करने के लिए हजारों दीपक तैयार होते हैं, उन्हीं हाथों के घरों में कई बार त्योहार की चमक सीमित रह जाती है।
जिनकी मेहनत से दूसरों की चौखटें जगमगाती हैं, उनके अपने घरों में खुशियों के लिए संघर्ष जारी रहता है। वे अपनी आर्थिक परिस्थितियों से जूझते हुए भी दूसरों के घरों में उजाला पहुंचाने का काम करते हैं।
रोशनी के पीछे छिपी है मेहनतकश हाथों की कहानी
दीपावली पर घरों को रोशन करने वाले इन मिट्टी के दीपकों के पीछे एक ऐसी दुनिया है, जिसके बारे में आमतौर पर बहुत कम लोग सोचते हैं। कुम्हार परिवार और दीपक बनाने वाले मजदूर त्योहार से काफी पहले ही अपने काम में जुट जाते हैं।
मिट्टी जुटाने से लेकर उसे साफ करने, गूंथने, चाक पर आकार देने, दीपक सुखाने और पकाने तक की प्रक्रिया में कई चरणों की मेहनत शामिल होती है। कहीं हाथों से मिट्टी को आकार दिया जाता है तो कहीं चाक लगातार घूमता रहता है।
दिन चढ़ने से लेकर शाम ढलने तक इन परिवारों के हाथ मिट्टी से सने रहते हैं। दीपकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कई बार रात तक काम करना पड़ता है। एक-एक दीपक तैयार करने में भले ही कुछ पल लगते हों, लेकिन हजारों दीपकों का उत्पादन करना आसान नहीं होता। मौसम की मार, मिट्टी की उपलब्धता, ईंधन का खर्च और बाजार तक सामान पहुंचाने की परेशानी इनकी मेहनत को और कठिन बना देती है।
विद्युत झालरों की चमक के बीच मिट्टी के दीपक की लौ का अलग आकर्षण
आज बाजार में रोशनी के अनगिनत विकल्प उपलब्ध हैं। रंग बदलती एलईडी लाइटें, चमकदार झालरें और आकर्षक सजावटी उपकरण घरों को आधुनिक रूप देते हैं। इनके बीच मिट्टी का दीपक अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
बिजली से चलने वाली रोशनी में चमक जरूर है, लेकिन मिट्टी के दीपक की लौ में अपनापन महसूस होता है। जब दीपावली की शाम घरों की मुंडेर पर एक के बाद एक दीपक जलाए जाते हैं, तो उनकी टिमटिमाती रोशनी वातावरण को एक अलग ही खूबसूरती देती है।
हवा के हल्के झोंके के साथ हिलती लौ, दीपक से उठती तेल की हल्की खुशबू और मिट्टी की सौंधी महक त्योहार के पारंपरिक स्वरूप को जीवंत कर देती है। यही वजह है कि आधुनिकता के इस दौर में भी लोग अपने घरों में मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा को बनाए हुए हैं।
कई घरों में बिजली की झालरों के साथ मिट्टी के दीपक भी सजाए जाते हैं। मानो आधुनिकता और परंपरा एक साथ मिलकर दीपावली की खुशियां बांट रहे हों।
संबंधित समाचार

छापे से ज्यादा चर्चा ‘सौदेबाजी’ की:शिमला पान मसाला के अवैध कारोबार पर फूड़ और जीएसटी विभाग मौन

यात्री की कथित लापरवाही से विमान में हड़कंप मच गया:घटना के बाद विमान में यात्रियों और क्रू मेंबर्स के बीच चिंता का माहौल; यात्री के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया

कंधों पर साथी की अर्थी:आंखों में आंसू और दिल में कभी न भूल पाने वाला दर्द

वीडियो देखिये, टीआई की हत्या के विरोध में कांग्रेस का प्रदर्शन:धर्मनगरी में सरकार के खिलाफ नारेबाजी

देखिये वीडियो, खातेगांव टीआई हत्याकांड:घटनास्थल पर तस्दीक के दौरान भागने लगा वाहन मालिक; पुलिस ने पीछा कर पकड़ा, पैर में आई चोट

वीडियो देखिये, राहुल गांधी पर डिप्टी सीएम का निशाना:बोले- देश में उनकी बातों पर कौन भरोसा करता है?

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:रिश्वत लेते कर्मचारी गिरफ्तार; कूलर के नीचे छिपाया लिफाफा

वीडियो देखिये, युवक को पकड़ने पहुंची पुलिस पर चाकू से हमला:जवान की पीठ पर किया वार; अस्पताल में भर्ती

टीआई की शहादत ने खोली तस्करी की परतें:इस वजह से गुजरात जा रही शराब? एमपी की आबकारी नीति पर उठे सवाल

‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष कर भक्तों ने ग्रहण की महाप्रसादी

वीडियो देखिये, राहुल गांधी ने निभाया वादा तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने साझा की खुशखबरी:लंबे समय से परेशानी झेल रही छात्रा का सफल इलाज

यह वीडियो देखकर आंसू नहीं रोक पाएंगे आप:दिवंगत टीआई के शव के पास बेटे का रुदन-पापा उठ जाओ...; पत्नी बोलीं- आपने दो दिन से कुछ खाया नहीं

भीषण सड़क हादसा:तेज रफ्तार कार ने बाइक को पीछे से मारी टक्कर; पति-पत्नी और दामाद की मौत

कैबिनेट बैठक के बड़े फैसले:23 हजार करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी; 15 नए सैटेलाइट टाउन बनेंगे, धान पंजीयन की तारीख बढ़ी

न कोई वैध अनुमति न नक्शा पास हुआ:अवैध भवन निर्माणकर्ता का दावा; जिम्मेदारों की कर चुका हूं जेबें गर्म

संवेदनशील सुनवाई में त्वरित कार्रवाई और न्याय का भरोसा:पुलिस कमिश्नर इंदौर ने सुनी हर पीड़ित की बात; दिए उचित निराकरण के दिशा-निर्देश

वीडियो देखिये, एक बाइक पर सवार होकर आए 3 नकाबपोश बदमाश:पॉश इलाके में हथियारों के दम पर लूट: कांग्रेस प्रवक्ता के मकान में किराएदार के गोडाउन को बनाया निशाना

नशे पर पुलिस का एक साथ धावा:11 तस्कर हुए गिरफ्तार

कलेक्ट्रेट के प्यून की संपत्तियों को लेकर लोकायुक्त में शिकायत:इतने करोड़ की संपत्ति होने का दावा; जांच शुरू

गश्त के बजाय शराब पार्टी में जुटे पुलिसकर्मी:दो लाइन अटैच
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!