किस पार्टी ने नेता क्यों पकड़ी पुलिसकर्मी की कॉलर: बाद में किसने कहा-अनजाने में हुआ ऐसा; मामला आखिर क्या है
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, छतरपुर।
छतरपुर में 21 फरवरी को हुए एक प्रदर्शन के दौरान भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष नीरज चतुर्वेदी द्वारा एक पुलिसकर्मी की कॉलर पकड़े जाने का वीडियो सामने आया है। यह घटना राहुल गांधी का पुतला दहन करते समय छत्रसाल चौराहे पर हुई। वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक और आम लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
प्रदर्शन और घटना
युवा मोर्चा के कार्यकर्ता नीरज चतुर्वेदी के नेतृत्व में पुतला दहन के लिए छत्रसाल चौराहे पहुंचे। पुलिस ने पुतला छीनने का प्रयास किया, जिससे कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। वायरल वीडियो में जिलाध्यक्ष एक पुलिसकर्मी की कॉलर पकड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। मौके पर भारी पुलिस बल और कई अधिकारी मौजूद थे।
सवाल और प्रतिक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि वर्दी पर हाथ डालने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। चर्चा यह भी है कि आला अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है या नहीं।
जिलाध्यक्ष की सफाई
नीरज चतुर्वेदी ने कहा कि वे और उनके कार्यकर्ता पुलिस और प्रशासन का सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि भीड़ बहुत ज्यादा थी और पुलिस पुतला छीनने की कोशिश कर रही थी। धक्का-मुक्की में किसी कार्यकर्ता ने गिरने से बचते हुए अनजाने में पुलिसकर्मी की कॉलर पकड़ ली। उनका कहना है कि वर्दी का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था।
उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ में किसी के गिरकर घायल होने की संभावना थी, इसलिए यह घटना बचाव की स्थिति में अनजाने में हुई। वीडियो को लोग अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं, जिसके कारण अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है।
पूर्व में भी हो चुके हैं ऐसे मामले
जिले में राजनीतिक प्रदर्शन और पुतला दहन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। इनमें कैलाश विजयवर्गीय की प्रतीकात्मक शवयात्रा, विद्यार्थी परिषद के प्रदर्शन, वकीलों के आंदोलन और चक्का जाम शामिल हैं।
तुलना और विवाद
बिजावर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुआवजा और अधिग्रहण को लेकर हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर मामला दर्ज कर जेल भेजे जाने की कार्रवाई का भी जिक्र हो रहा है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि अलग-अलग मामलों में कार्रवाई का स्वरूप क्यों अलग दिखाई देता है। चर्चा यह भी है कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं है।
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