मादक पदार्थ निकला और कुछ ही: कठघरे में विभाग; विशेष कोर्ट में सुनवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पुलिस ने जिस कार्रवाई को 16 महीने पहले शहर की सबसे बड़ी एमडी ड्रग्स बरामदगी बताकर अपनी पीठ थपथपाई थी, वही केस महकमे के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है। करोड़ों रुपए की जिस कथित एमडी ड्रग्स के आधार पर एक पुलिसकर्मी को गिरफ्तार कर बर्खास्त किया गया, वह दो-दो सरकारी लैब की जांच में महज यूरिया निकला।
दो आईपीएस अधिकारी समेत 19 पुलिसकर्मी घेरे में
कोर्ट से बरी होने के बाद बर्खास्त पुलिसकर्मी ने दो आईपीएस अधिकारियों समेत 19 पुलिसकर्मियों को कटघरे में खड़ा किया है। विशेष अदालत में दायर परिवाद पर आज सुनवाई होगी।
लखन गुप्ता ने विशेष अदालत में दायर परिवाद में दो आईपीएस सहित 19 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। आरोप है उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया। मुखबिर के जरिए गिरफ्तार आरोपियों से उनका नाम बुलवाया गया, फिर पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया और अंतत: बर्खास्त कर दिया गया।
दो लैब की रिपोर्ट ने पलट दी कहानी
मामले की अहम कड़ी वह जब्त पदार्थ है, जिसे पुलिस ने 198 ग्राम एमडी ड्रग्स बताकर करोड़ों की खेप बरामद करने का दावा किया था। जांच के लिए भेजे गए नमूनों की 27 जून 2025 को भोपाल स्थित फॉरेंसिक लैब से आई रिपोर्ट में साफ हो गया जब्त पदार्थ यूरिया है। इस पर पुलिस ने हैदराबाद की केंद्रीय प्रयोगशाला का रुख किया, लेकिन वहां से 19 दिसंबर 2025 को आई रिपोर्ट में भी यही निष्कर्ष सामने आया।
कोर्ट ने किया बरी
दोनों रिपोर्टों के आधार पर विशेष अदालत ने लखन गुप्ता सहित सह आरोपी विजय पाटीदार और शाहनवाज शेख को दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद लखन गुप्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया झूठे साक्ष्य तैयार कर उन्हें साजिशन फंसाया गया।
उनके अधिवक्ता नितिन पाराशर के अनुसार परिवाद में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच की मांग की है। अदालत ने आज की तारीख तय की है, जहां एफआईआर दर्ज करने और आगे की जांच को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया जा सकता है।
यह है घटनाक्रम
26 फरवरी 2025 को रालामंडल क्षेत्र से विजय पाटीदार और शाहनवाज शेख को पकड़कर उनसे 198 ग्राम कथित एमडी ड्रग्स बरामद करने का दावा किया गया था। पूछताछ में दोनों ने पुलिसकर्मी लखन गुप्ता का नाम लिया, जिसके बाद उन्हें भी आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया गया लेकिन वैज्ञानिक जांच और अदालत के फैसले ने पुलिस की पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
अब निगाह विशेष अदालत की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां तय होगा ड्रग्स केस में आरोपी बनाए गए पुलिसकर्मी के आरोपों की जांच होगी या नहीं, और क्या इस पूरे घटनाक्रम में अधिकारियों की भूमिका भी कानूनी जांच के दायरे में आएगी?
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