मेडिकल कॉलेजों में हजारों डॉक्टर हड़ताल पर: ओपीडी सेवाएं बंद; सामान्य ऑपरेशन भी नहीं हो सकेंगे, यह है कारण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
लंबित स्टाइपेंड संशोधन की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत जूनियर डॉक्टर सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के नेतृत्व में प्रदेशभर के करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस विरोध में शामिल हैं।
ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार
हड़ताल के चलते डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया है। ऐसे में अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। डॉक्टरों ने साफ किया है कि ऑपरेशन थिएटर में भी केवल गंभीर मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। इसके कारण हर्निया, रॉड इंप्लांट जैसे सामान्य ऑपरेशन फिलहाल टल सकते हैं।
अप्रैल 2025 से लागू होना था संशोधित स्टाइपेंड
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन 7 जून 2021 के सरकारी आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। साथ ही अप्रैल 2025 से देय एरियर का भुगतान भी लंबित है। कई बार शासन को अवगत कराने के बावजूद इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
8 हजार डॉक्टर आंदोलन में शामिल
JDA के मुताबिक, प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न इस हड़ताल में शामिल हैं। मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के इलाज और निगरानी का बड़ा हिस्सा इन्हीं डॉक्टरों के जिम्मे होता है, इसलिए हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ना तय माना जा रहा है।
डीन और विभागाध्यक्षों को सौंपा ज्ञापन
JDA के प्रतिनिधियों ने सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन और विभागाध्यक्षों (HOD) को पत्र सौंपकर हड़ताल की जानकारी दी है। डॉक्टरों का कहना है कि आपातकालीन सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। हालांकि ओपीडी सहित सभी इलेक्टिव सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।
तीन दिन से कर रहे शांतिपूर्ण विरोध
जूनियर डॉक्टर पिछले तीन दिनों से काली पट्टी बांधकर काम करते हुए शांतिपूर्ण विरोध जता रहे थे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार का ध्यान लंबित स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान की ओर आकर्षित करना है।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज होगा
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन का कहना है कि उनका आंदोलन केवल पहले से जारी सरकारी आदेश के क्रियान्वयन और बकाया एरियर के भुगतान की मांग को लेकर है। यदि सरकार जल्द फैसला लेती है तो हड़ताल समाप्त कर दी जाएगी, लेकिन मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन और तेज किया जा सकता है।
पहले भी हो चुका है आंदोलन
इससे पहले भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टरों ने सांकेतिक हड़ताल की थी। मार्च 2024 में जारी आदेश के अनुसार जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में करीब 3 हजार और सीनियर रेजिडेंट के स्टाइपेंड में करीब 4 हजार रुपए तक बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया था, जिसका लाभ 1 अप्रैल 2023 से दिया जाना था।
हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ोतरी का प्रावधान होने के बावजूद इसे समय पर लागू नहीं किया गया। नवंबर 2022 के बाद से अब तक स्टाइपेंड में कोई नई वृद्धि नहीं हुई है।
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