मुखिया मुख सो चाहिए: आरएसएस प्रमुख ने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन को सही करार दिया
KHULASA FIRST
संवाददाता

संघ प्रमुख भागवत ने छात्र आंदोलन से उपजे आक्रोश पर रखा मरहम; सरकार को दिखाया सच का आईना
मोहन भागवत बोले- जेन-जी पर मुझे आंख मूंदकर भरोसा
मुखिया मुखु सो चाहिए, खान पान कहुं एक। पालइ पोषइ सकल अंग, तुलसी सहित बिबेक।
संघ सुप्रीमो ने युवाओं के मर्म को छुआ, आंदोलन करने वाली नई पीढ़ी के गुस्से को बताया जायज
भागवत ने जे जेन-जी पीढ़ी को ज्यादा ईमानदार, ज्यादा देशभक्त बताया, बोले-विरोध भी संवाद का एक तरीका
जेन-जी के पक्ष में खुलकर सामने आए सरसंघचालक, बोले-देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की वाकई है जरूरत
आरक्षण की भी संघ प्रमुख ने की हिमायत, एलजीबीटी समुदाय को भी माना भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
रामायण के अयोध्या कांड की इस चोपाई के अनुरूप ही आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहनराव भागवत ने कल दो टूक बात की। वे मुखातिब थे उस पीढ़ी के समक्ष, जो जेन-जी व जेन अल्फा पीढ़ी के नाम से इन दिनों देश ही नहीं, दुनिया में चर्चा में है। संघ सुप्रीमो ने देश की तरुणाई के बीच खुलकर वे सब बातें बोलीं, जिन्हें ये पीढ़ी सुनना चाहती थी।
संघ प्रमुख ने इस पीढ़ी के मर्म को न सिर्फ समझा, बल्कि उस मर्म को भी छुआ, जिसे सत्ता समझ नहीं पाई और आज सड़क से संसद तक संघर्ष छिड़ा हुआ है। एक परिवार के मुखिया के अनुरूप संघ सुप्रीमो ने खुलकर युवाओं का ये कहकर साथ दिया कि उनका गुस्सा जायज है।
जेन जी पीढ़ी को ईमानदार व देशभक्ति से जोड़कर संघ मुखिया ने उन सब दुष्प्रचारों को धो दिया, जो जंतर-मंतर से शुरू हुए देशव्यापी आंदोलन को एंटीनेशनल बता रहे थे। परिवार के मुखिया के नाते उन्होंने सत्ता प्रतिष्ठान तक ये बात बेबाकी से पहुंचाई भी कि आंदोलन सही था और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बेहद जरूरत है।
सरकार को इस सच्चाई से अवगत भी कराया कि विरोध भी संवाद का एक तरीका है और आंदोलन करने वाले भी हमारे अपने हैं। आरक्षण व्यवस्था के पक्षकार भी बने और बड़ा दिल उस समुदाय के लिए भी दिखाया, जिसे एलजीबीटी कहा जाता है। भागवत ने इस समुदाय को भी भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा करार देकर कथित संस्कृति रक्षा की बातों को विराम दिया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को जेन जी से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल हुए। वहां उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि हाल में हुए जेन-जी प्रदर्शन में जो शिकायतें थीं, वो जायज हैं। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन कर रहे जेन जी एंटी-नेशनल नहीं हैं और लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन भी सहमति बनाने का एक माध्यम है।
मुंबई में नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) के 15वें स्थापना वर्ष पर मोहन भागवत ने यह बातचीत की।
इस दौरान आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विरोध के दौरान अलग-अलग विचार सामने आते हैं और चर्चा के बाद एक सहमति बनती है। उन्होंने कहा, यह चर्चा संवाद के जरिए हो सकती है। अगर किसी वजह से बात नहीं सुनी जाती है तो आंदोलन किया जा सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य सहमति बनाना होना चाहिए, न कि समाज में विभाजन पैदा करना।
जंतर-मंतर सहित देशभर में हुए छात्र आंदोलन पर उन्होंने कहा जहां तक जेन-जी की बात है, हाल में जो हुआ, उसमें उनकी शिकायतें जायज हैं। भारत की शिक्षा व्यवस्था में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है और वह नहीं हो पा रहा है, इसलिए ये मुद्दे उठ रहे हैं, निश्चित रूप से संवाद होना चाहिए।
भागवत ने दो टूक कहा कि अगर जेन-जी विरोध-प्रदर्शन कर रही है तो वे देश-विरोधी नहीं हैं, वे हमारे अपने हैं, वे हमारी अगली पीढ़ी हैं। उनसे बातचीत के साथ-साथ अपनापन महसूस कराने की भी जरूरत है। उन्होंने कहा, जब हम उनकी उम्र के थे तो बड़ों की बात मान लेना हमारी आदत थी, हम सवाल नहीं करते थे, लेकिन आज जेन-जी और जेन-अल्फा सवाल करते हैं, वे तर्क संगत जवाब चाहते हैं।
आरएसएस प्रमुख ने कहा, मैं यह नहीं कहूंगा कि जेन-जी को विरोध नहीं करना चाहिए, लेकिन लोकतंत्र में विरोध कैसे और किस तरह किया जाए, इसके तरीके तय हैं। संविधान बनाने वालों और डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर के भाषणों में भी इसके संकेत मिलते हैं। हमें इस पर ध्यान देना चाहिए।
हमें यह भी समझना होगा कि जेन जी सिर्फ विरोध के लिए आवाज नहीं उठा रही है, वे कुछ समस्याओं के कारण अपनी बात रख रहे हैं और उन समस्याओं का समाधान होना चाहिए। आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए होना चाहिए।
जब तक सामाजिक भेदभाव, तब तक आरक्षण
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जब तक सामाजिक भेदभाव हैं तब तक आरक्षण लागू रहेगा। इस विषय में सब वो पढ़ें जो बाबा साहेब आंबेडकर ने आरक्षण के बारे में लिखा था। अगर हम ईमानदारी से उनकी सलाह मानेंगे तो कोई समस्या नहीं।
सामाजिक कारणों से आरक्षण है।जब तक सामाजिक भेदभाव है, आरक्षण चलेगा। जिन्हें मिल गया और जिनका जीवन स्तर ठीक हो गया, उन्हें बड़ा दिल दिखाकर इस लाभ को दूसरे के लिए छोड़ देना चाहिए।
एलजीबीटी समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा
आरएसएस प्रमुख ने कहा एलजीबीटी समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन फिलहाल विवाह की मौजूदा संस्था में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे अनचाहे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। उन्होंने समान लिंग वाले जोड़ों के लिए अलग कानून व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया।
गुरुवार को हुए कार्यक्रम मं लगभग 2,000 जेन-जी और जेन-अल्फा प्रतिभागियों ने भाग लिया, इसमें मोहन भागवत ने एक सवाल के जवाब में एलजीबीटीक्यूआईए समुदाय पर भी बात की। भागवत ने कहा कि आरएसएस लगातार यह मानता रहा है कि एलजीबीटी समुदाय के लोग उसी समाज का हिस्सा हैं, जिससे हम जुड़े हैं। हमारे समाज में उन्हें साथ लेकर चलने की परंपरा रही है।
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