एसपी के आदेश को आईजी ने एक झटके में किया रद्द: अवकाश पर लगाई नकेल पर ब्रेक; पुलिस महकमे में दिनभर चली चर्चा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ग्रामीण पुलिस में छुट्टियों को लेकर शुरू हुई प्रशासनिक खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। ग्रामीण एसपी राजेंद्र कुमार वर्मा द्वारा पुलिसकर्मियों की छुट्टियों पर नियंत्रण के लिए जारी किया गया आदेश चार दिन भी नहीं टिक पाया।
इंदौर रेंज के आईजी अनुराग सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए आदेश को नियमों के विपरीत बताते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इस घटनाक्रम ने पुलिस महकमे में प्रशासनिक अधिकारों और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दरअसल 29 मई को जारी आदेश में एसपी ने सभी थाना और चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए थे कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को अवकाश देने से पहले निर्धारित स्तर पर स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।
आदेश में 30 दिन से अधिक के अवकाश की मंजूरी सीधे एसपी स्तर से और अन्य छुट्टियों की स्वीकृति डीएसपी व थाना प्रभारियों के माध्यम से करने की व्यवस्था तय की थी।
एसपी कार्यालय का तर्क था कि कई बार कर्मचारी बिना समुचित जानकारी के अवकाश पर चले जाते हैं, जिससे कानून व्यवस्था और संवेदनशील ड्यूटी प्रभावित होती है, लेकिन आदेश जारी होते ही पुलिस विभाग के भीतर असहजता बढ़ गई। कई अधिकारियों और थाना प्रभारियों ने इसे नियमों से परे बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी।
आदेश की समीक्षा, फिर किया निरस्त
मामला जब वरिष्ठ स्तर तक पहुंचा तो आईजी अनुराग सिंह ने आदेश की समीक्षा कराई और पाया कि आदेश मप्र सिविल सेवा (अवकाश) नियम-2025 व मुख्यालय भोपाल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
इसके बाद 2 जून को आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। अब चर्चा इस बात की है कि ऐसा आदेश जारी कैसे हुआ और बिना विधिक परीक्षण के लागू करने की कोशिश क्यों की गई।
कई अधिकारी इसे समन्वय की कमी से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह अनुशासन और नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश थी, जो नियमों की कसौटी पर टिक नहीं सकी।
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