वीडियो देखिये, शहर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर कार्यशाला: स्वच्छता सिर्फ पोस्टर से नहीं, व्यवहार परिवर्तन से आएगी; नागरिकों की जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) को अधिक प्रभावी बनाने और स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से शनिवार को इंदौर में महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर आयोजित इस कार्यशाला में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, जनभागीदारी और व्यवहार परिवर्तन जैसे विषयों पर विस्तार से मंथन हुआ।
इंदौर सिटी बस कार्यालय में आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने की। वहीं, फीडबैक फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अजय सिन्हा ने मुख्य वक्ता के रूप में स्वच्छता को केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि नागरिकों की जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
व्यवहार परिवर्तन से ही आएगी वास्तविक स्वच्छता
अपने संबोधन में अजय सिन्हा ने कहा कि स्वच्छता केवल पोस्टर, नारों और प्रचार-प्रसार से नहीं आएगी। इसके लिए लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रत्येक नागरिक स्वच्छता को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली में अपशिष्ट कम उत्पन्न करने, वस्तुओं के पुनः उपयोग (री-यूज) और पुनर्चक्रण (री-साइकिल) की समृद्ध संस्कृति रही है। आधुनिक जीवनशैली के कारण यह परंपरा कमजोर हुई है, जिसे फिर से अपनाने की जरूरत है।
शिक्षा में शामिल हो भारतीय स्वच्छता संस्कृति
अजय सिन्हा ने सुझाव दिया कि भारतीय स्वच्छता संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार से जुड़े विषयों को स्कूलों और महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा से ही स्वच्छता और कचरा प्रबंधन का महत्व सिखाया जाए तो आने वाली पीढ़ी स्वच्छता को आदत और जिम्मेदारी दोनों के रूप में अपनाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नागरिक विदेशों में स्वच्छता और अनुशासन का पालन करते हैं, लेकिन अपने ही देश में अक्सर लापरवाही बरतते हैं। इस मानसिकता में बदलाव लाना समय की आवश्यकता है।
फ्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए बने अलग दिशा-निर्देश
कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर देश का तेजी से विकसित होता शहर है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में दूसरे शहरों और राज्यों से लोग आते हैं। ऐसे में शहर की स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने के लिए फ्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाहरी लोगों को शहर की कचरा पृथक्करण व्यवस्था, स्वच्छता नियमों और नागरिक जिम्मेदारियों की जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है, जितना स्थानीय नागरिकों को जागरूक करना।
जनभागीदारी से ही मिलेगा स्थायी परिणाम
कार्यशाला में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि स्वच्छता केवल नगर निगम या सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही स्वच्छता अभियान को स्थायी सफलता मिल सकती है।
विशेषज्ञों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी पालन, स्रोत पर कचरे के पृथक्करण, वैज्ञानिक तरीके से अपशिष्ट के निपटान और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी अपने विचार साझा किए।
जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
कार्यशाला में शहर के जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों तथा स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने तथा नागरिक सहभागिता बढ़ाने के लिए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
कार्यशाला का निष्कर्ष यही रहा कि स्वच्छ शहर का निर्माण केवल सरकारी योजनाओं और अभियानों से संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए व्यवहार में बदलाव लाना होगा। सामूहिक प्रयास, जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से ही इंदौर अपनी स्वच्छता की पहचान को और मजबूत बना सकेगा।
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