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पूर्व सुप्रीम लीडर को दी जाएगी अंतिम विदाई: मशहद में होगा सुपुर्द-ए-खाक ; करोड़ों लोगों के जुटने का अनुमान

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 जून 2026, 4:52 pm
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पूर्व सुप्रीम लीडर को दी जाएगी अंतिम विदाई

खुलासा फर्स्ट, तेहरान।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मौत के लगभग चार महीने बाद उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। खामेनेई की अंतिम इच्छा के अनुसार उन्हें ईरान के पवित्र शहर मशहद में इमाम रजा दरगाह परिसर के निकट दफनाया जाएगा।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार अंतिम संस्कार कार्यक्रम मुहर्रम की शुरुआत के आसपास आयोजित किया जा सकता है। अधिकारियों का अनुमान है कि तेहरान, कुम और मशहद में होने वाले कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में शामिल हो सकता है।

तीन शहरों में होगा अंतिम विदाई समारोह
जानकारी के मुताबिक, मुख्य राजकीय समारोह तेहरान में आयोजित होगा, जहां हजारों लोगों को अंतिम दर्शन का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद खामेनेई के पार्थिव शरीर को धार्मिक नगरी कुम ले जाया जाएगा और फिर मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि जनता को श्रद्धांजलि देने के लिए तीन दिन का विशेष कार्यक्रम रखा जाएगा। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी पूरी तरह IRGC को सौंपी गई है।

खोमैनी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है जनाजा

यदि अनुमान के मुताबिक 2 करोड़ लोग अंतिम यात्रा में शामिल होते हैं तो यह 1989 में इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खामेनेई के जनाजे का रिकॉर्ड तोड़ सकता है। खामेनेई के अंतिम संस्कार में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। उस ऐतिहासिक जनाजे को आज भी दुनिया के सबसे बड़े अंतिम संस्कार समारोहों में गिना जाता है।

इस्लामी परंपरा से अलग फैसला
आमतौर पर इस्लाम में मृत्यु के बाद जल्द से जल्द दफनाने की परंपरा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों, युद्ध की परिस्थितियों और भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए अंतिम संस्कार कार्यक्रम को टालना पड़ा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार इतने बड़े आयोजन के लिए व्यापक सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके।

मशहद में दफन होने की खास वजह
मशहद शिया मुसलमानों के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों में से एक माना जाता है। यहां स्थित इमाम रजा की दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक परिसरों में शामिल है और हर साल करोड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि मशहद में दफन होने से खामेनेई का नाम शिया इस्लाम के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की श्रेणी में और अधिक मजबूती से जुड़ जाएगा।

हमलों के बाद बदला था हालात
रिपोर्ट्स के अनुसार फरवरी में हुए बड़े सैन्य हमलों के दौरान खामेनेई गंभीर रूप से घायल हुए थे। बाद में उनकी मौत की पुष्टि की गई थी। इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, सुरक्षा कर्मियों और रणनीतिक संस्थानों को भी नुकसान पहुंचा था। अब पूरी दुनिया की नजर खामेनेई के अंतिम संस्कार पर टिकी है, जिसे ईरान के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में से एक माना जा रहा है।

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