अब तक सैकड़ों मकान बदल चुके हैं व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में: सुप्रीम कोर्ट को इंदौर से क्या जानकारी जाएगी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सुप्रीम कोर्ट ने कल देशभर के नगरीय निकायों-विकास प्राधिकरणों से आवासीय क्षेत्रों के बढ़ते व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माणों पर की गई ठोस कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की कि लैंडयूज बदलना सिस्टम से सरासर धोखा है। बात इंदौर की करें तो यहां ऐसे सैकड़ों मकान हैं जो तमाम नियम-कायदों को ताक में रखकर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में तब्दील हो चुके हैं।
अब सवाल यही है कि इंदौर से क्या रिपोर्ट जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर तक संपूर्ण जानकारी मांगी है।
इंदौर की स्थिति तो विचित्र है। यहां मास्टर प्लान की आड़ में जबरन तोड़फोड़ की गई तो कई जगह मास्टर प्लान और तमाम नियम-कायदों को ताक पर रखकर निर्माणों की अनुमति दे दी गई।
आश्चर्य की बात है कि निकाय-प्राधिकरण के अधिकारियों ने बिना मौका-मुआयना किए ही अनुमतियां जारी कर दीं और बाद में कभी पलटकर देखा भी नहीं कि नक्शा क्या था, निर्माण कैसा है और कितना कर लिया गया है।
नगर निगम ने खुद कुछ दिनों पूर्व ही रिपोर्ट जारी कर बताया है कि शहर में 1.28 लाख मकान ऐसे हैं जिनका नियम विरुद्ध व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
इनमें दुकानें, बैंक, होस्टल, ऑफिस, क्लिनिक, शोरूम और कोचिंग क्लासेस धड़ल्ले से चल रहे हैं। 22, 335 मकान हैं जिनमें आंशिक रूप से कमर्शियल गतिविधियां चल रही हैं।
पुराने मोहल्लों और गलियों की बात करें तो वे अब पूरी तरह कमर्शियल कॉरिडोर बन गए हैं। इसके सबसे बड़े उदाहरण सपना-संगीता रोड, स्कीम 74, 78, नरेंद्र तिवारी मार्ग, अन्नपूर्णा रोड, रणजीत हनुमान रोड, विजय नगर, पलासिया जैसे कई हिस्से हैं।
यह कहता है मास्टर प्लान
12 मीटर या अधिक चौड़ी सड़क पर सीमित कमर्शियल उपयोग संभव।
प्रमुख सडक़ों पर 30 मीटर गहराई तक कमर्शियल गतिविधि की अनुमति।
मिश्रित उपयोग (मिक्स यूज) के लिए पार्किंग और अन्य शर्तें जरूरी।
ग्रीन बेल्ट और ओपन स्पेस का उपयोग परिवर्तन आसान नहीं।
लैंडयूज परिवर्तन के लिए टीएंडसीपी की अधिसूचना जरूरी।
नियमों की गली से चलने लायक नहीं रहीं सड़कें... टीएंडसीपी और मास्टर प्लान में कुछ छूट दी गई है। नियमों के अनुसार 12 मीटर या उससे चौड़ी सड़क पर स्थित प्लॉट में सीमित कमर्शियल उपयोग की अनुमति दी जा सकती है।
कई मामलों में प्लॉट का आधा हिस्सा या 75 वर्गमीटर तक व्यावसायिक गतिविधि का प्रावधान है। प्रमुख मार्गों पर 30 मीटर तक कमर्शियल गतिविधि की अनुमति है और तो और टीएनसीपी की धारा 23-क के मुताबिक सरकार मास्टर प्लान में संशोधन कर सकती है, जिसका फायदा लोग उठा रहे हैं।
समस्या वहां बढ़ी, जहां सीमित मिक्स यूज की अनुमति थी। व्यवहार में पूरे क्षेत्र ही कमर्शियल हो गए। इसमें पीपल्यापाला, सिरपुर, अन्नपूर्णा क्षेत्र के क्षेत्रीय उद्यानों की जमीन भी शामिल है। इन क्षेत्रों में बड़े शोरूम, बैंक, ऑफिस और व्यावसायिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं।
कई इलाकों में हर मकान के नीचे दुकानें खुल चुकी हैं। ऊपर कोचिंग, ऑफिस, जिम, क्लिनिक जैसी गतिविधियां हो रही हैं। ऐसी गतिविधियों का सबसे ज्यादा असर ट्रैफिक पर पड़ा है जिसे सुधारने के लिए प्रशासन कई वर्षों से मशक्कत कर रहा है, लेकिन बात बन नहीं रही।
नतीजा ये कि जब प्रशासन ट्रैफिक नहीं सुधार पाता तो सारा इल्जाम वाहन चालकों पर ढोलकर चालान कार्रवाई शुरू कर देता है।
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