खीरे की खेती से 24 गुना कमाया मुनाफा: इस योजना से मजबूत हो रही किसानों की आर्थिक स्थिति
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
उद्यानिकी विभाग की शेडनेट हाउस योजना किसानों के लिए आर्थिक स्थिति सुधारने का माध्यम बन रही है। पेटलावद विकासखंड के मोहनपुरा गांव के चन्द्रपाल सिंह राठौर ने आधुनिक तकनीक अपनाकर न सिर्फ आर्थिक सफलता हासिल की है बल्कि चौंका देने वाला 24 गुना मुनाफा कमा रहे हैं।
इसके पहले राठौर अपने खेत में सोयाबीन एवं गेहूं की पारंपरिक खेती करते थे। इससे उन्हें लगभग 25 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था। खेती पर लगभग 35 हजार रुपए की लागत आती थी, जबकि कुल आय 77 हजार रुपए तथा शुद्ध आय केवल 42 हजार रुपए रहती थी। सीमित आय के कारण कृषि से अपेक्षित आर्थिक लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा था।
मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर योजना ने बदले हालात
चंद्रभानसिंह के लिए सरकार के उद्यानिकी विभाग की एमडीएच (मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर ) योजना लाभदायक साबित हो रही है। राठौर ने एमडीएच योजना के अंतर्गत 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में शेडनेट हाउस की स्थापना की। इस परियोजना की लागत 28.40 लाख रुपए रही, जिसमें शासन द्वारा 50 प्रतिशत अर्थात 14.20 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया।
खीरे की खेती से 24 गुना मुनाफा कमाया
शेडनेट हाउस स्थापित होने के बाद उन्होंने उन्नत खीरे की हाईटेक खेती प्रारंभ की। इससे लगभग 800 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस पर लगभग 6 लाख रुपए की लागत आई, जबकि कुल आय 16 लाख रुपए रही। सभी खर्चों के बाद उन्हें लगभग 10 लाख रुपए की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इस प्रकार उनकी शुद्ध आय 42 हजार से बढ़कर लगभग 10 लाख रुपए हो गई, जो लगभग 24 गुना अधिक है।
अन्य किसानों के लिए भी नई राह दिखा रही है योजना
राठौर का कहना है कि संरक्षित खेती से फसल पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का प्रभाव बहुत कम पड़ता है। उन्नत किस्मों का चयन, वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का उपयोग तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान कम क्षेत्र में भी अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता प्राप्त कर सकते हैं। गुणवत्तापूर्ण उत्पाद होने से बाजार में बेहतर मूल्य भी मिलता है, जिससे आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
प्रेरणास्रोत बनी योजना
राठौर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों तथा शासन की योजनाओं का समुचित लाभ लें, तो कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर संरक्षित खेती अपनाने का संदेश दे रही है।
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