लॉरेंस कनेक्शन की तलाश में गुजरात तक पहुंची एसआईटी!: भाजपा पदाधिकारी धर्मेंद्र झाला से घंटों पूछताछ अब हो सकते हैं गैंग को लेकर नए खुलासे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क की जांच अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंचती दिखाई दे रही है। इंदौर क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने गुजरात के अहमदाबाद से भाजपा से जुड़े बताए जा रहे पदाधिकारी धर्मेंद्र झाला को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
सूत्रों के मुताबिक कई घंटों चली इस पूछताछ में लॉरेंस गैंग से जुड़े संदिग्ध संपर्कों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और कुछ अहम व्यक्तियों से रिश्तों को लेकर सवाल-जवाब किए गए। हालांकि, पुलिस ने अभी तक आधिकारिक तौर पर न तो गिरफ्तारी की पुष्टि की है और न ही पूछताछ के निष्कर्ष सार्वजनिक किए हैं, लेकिन जांच एजेंसियों की गतिविधियों ने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
विभिन्न प्रदेशों में नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी एसआईटी: सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच की एसआईटी पिछले कई महीनों से लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क की उन कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, जो मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात तक फैली हुई बताई जा रही हैं। इसी जांच के दौरान पहले राजपाल और राहुल बाबा को पकड़ा गया था। राहुल बाबा के मोबाइल नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच में कई नए नाम सामने आए, जिनमें अहमदाबाद निवासी धर्मेंद्र झाला का नाम भी शामिल बताया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों का फोकस कुछ प्रमुख बिंदुओं पर रहा। इसमें राहुल बाबा और धर्मेंद्र झाला के बीच कितनी बार संपर्क हुआ?,बातचीत का विषय क्या था?क्या किसी गैंग सदस्य की आर्थिक, सामाजिक या अन्य प्रकार से मदद की गई? किन-किन नंबरों पर लगातार संपर्क बना हुआ था? क्या लॉरेंस नेटवर्क से जुड़े किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष मुलाकात हुई थी? क्या सोशल मीडिया और इंटरनेट कॉलिंग एप्स का इस्तेमाल किया गया? सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसियों के पास कुछ तकनीकी साक्ष्य और कॉल रिकॉर्ड मौजूद हैं, जिनके आधार पर पूछताछ आगे बढ़ाई गई।
अहमदाबाद से इंदौर तक चला ऑपरेशन
जानकारी के अनुसार, एसआईटी प्रभारी टीआई नीरज मेढ़ा अपनी टीम के साथ अहमदाबाद पहुंचे थे। वहां स्थानीय एजेंसियों के सहयोग से धर्मेंद्र झाला से पूछताछ की गई। बाद में उसे इंदौर लाए जाने की भी चर्चा है, हालांकि इस संबंध में पुलिस अधिकारियों ने आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।क्राइम ब्रांच पहले ही कई जेलों में बंद आरोपियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि लॉरेंस गैंग केवल अपराधियों के नेटवर्क के जरिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय संपर्कों और सहयोगियों के माध्यम से भी अपनी गतिविधियां संचालित करता है। इसी कारण पुलिस अब हर उस व्यक्ति की भूमिका खंगाल रही है जिसका नाम कॉल रिकॉर्ड या अन्य डिजिटल साक्ष्यों में सामने आ रहा है।
पूछताछ में महत्वपूर्ण जानकारियां मिली
सूत्रों का कहना है कि एसआईटी को पूछताछ में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनका तकनीकी सत्यापन किया जा रहा है। यदि कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजी प्रमाण एक-दूसरे से मेल खाते हैं तो आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ या कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या धर्मेंद्र झाला केवल एक संपर्क सूत्र था या जांच एजेंसियों को उसके जरिए लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क की कोई बड़ी कड़ी हाथ लगी है। इसका्र जवाब एसआईटी की आगामी कार्रवाई और आधिकारिक खुलासे के बाद ही सामने आएगा।
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