ट्रैफिक जाम में रेंगता रहा शहर: कागजों पर दौड़ती रही यातायात पुलिस
KHULASA FIRST
संवाददाता

15 शिकायतों के निराकरण का दावा, लेकिन सड़कों पर दो घंटे तक हांफता रहा यातायात
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की सड़कों पर गाड़ियां रेंगती रहीं, एम्बुलेंस रास्ता तलाशती रही और जिम्मेदारों का सिस्टम अपनी रफ्तार से चलता रहा। आम आदमी जाम में फंसा वक्त गंवाता रहा, लेकिन यातायात पुलिस के खाते में कार्रवाई का हिसाब लगातार दुरुस्त होता रहा।
करीब दो घंटे तक मध्यक्षेत्र की रफ्तार थमी रही, फिर धीरे-धीरे रास्ते खुले। गनीमत रही कि जाम के बीच लोगों को सिर्फ इंतजार ही नहीं, व्यवस्था के दावों का तमाशा भी देखने को मिला। आखिर इंदौर की सड़कों पर ट्रैफिक फंसने की रफ्तार और पुलिस की कार्रवाई के आंकड़ों की रफ्तार में इतना अंतर क्यों है?
यहां सवाल सिर्फ जाम का नहीं, उस व्यवस्था का है जो शिकायतों के निपटारे में चुस्ती का दावा करती है, लेकिन सड़क पर उसकी परीक्षा होते ही सवालों में घिर जाती है।
यातायात पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2026 को यातायात बाधित होने, अवैध पार्किंग और गलत दिशा में वाहन चलाने से जुड़ी सभी 15 शिकायतों का निराकरण किया गया। शिकायतें रानीपुरा, छोगालाल उस्ताद मार्ग, संजय सेतु, राजवाड़ा, लोहा मंडी, जवाहर मार्ग, गंगवाल बस स्टैंड और जेल रोड डॉलर मार्केट सहित अन्य क्षेत्रों से मिली थीं।
इन इलाकों में वाहन चालक जाम से जूझते रहे। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के वाहन और एम्बुलेंस तक यातायात के बीच रेंगते नजर आए। करीब दो घंटे बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई।
पाटनीपुरा–मालवा मिल चौराहे पर शिकायत मिलने के बाद सिग्नल की टाइमिंग बढ़ाई गई। गौराकुंड चौराहे से खजूरी बाजार के बीच रास्ता रोककर खड़ी कार का ऑनलाइन चालान बनाया गया।
गलत दिशा में वाहन चलाने की शिकायत पर संबंधित वाहन के खिलाफ भी चालानी कार्रवाई की गई। यातायात पुलिस का कहना है कि हेल्पलाइन और ट्रैफिक साथी ऐप से मिलने वाली शिकायतों पर संबंधित टीमों को मौके पर भेजकर कार्रवाई की जा रही है।
लेकिन शहर के प्रमुख मार्गों पर घंटों तक बाधित यातायात यह सवाल खड़ा करता है कि शिकायतों के निराकरण के साथ जाम से तत्काल राहत दिलाने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। क्योंकि कार्रवाई का असली प्रमाण चालान की संख्या से नहीं, बल्कि सड़क पर दौड़ते सुचारू यातायात से मिलेगा।
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