सूखते बोरिंग और तालाब टैंकर के लिए चुकाने पड़ रहे ₹2000 रु.: कहीं चार साल से जलसंकट; कहीं गलियों तक नहीं पहुंच रहे टैंकर, 35 लाख लीटर की टंकी से सप्लाई पर भी उठे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

निजी बोरिंग से पानी खरीदने पर हर महीने ₹1500 तक खर्च
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अक्टूबर का महीना बीतने के साथ ही शहर में जलसंकट की आहट तेज होने लगी है। एक ओर तालाबों का जलस्तर लगातार गिर रहा है, तो दूसरी ओर कई बस्तियों में लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है।
कहीं निजी बोरिंग से पानी लेने पर हर महीने करीब 1500 रुपए खर्च हो रहे हैं, तो कहीं टैंकर बुलवाने के लिए 2000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कुछ रहवासियों को रिक्शे में बर्तन रखकर तीन से चार किलोमीटर दूर अरंडिया गांव से पानी लाना पड़ रहा है।
शहर के जलस्रोतों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। छोटी बिलावली और लिंबोदी तालाब सूख चुके हैं, जबकि पिपल्यापाला और बड़ी बिलावली तालाब में भी पानी सीमित बचने की बात सामने आ रही है। गर्मी से पहले ही जलसंकट के संकेत मिलने से आगामी महीनों में जलापूर्ति को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
इस बीच, हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर के सूख रहे तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से दो सप्ताह के भीतर निर्देश प्राप्त करने को कहा है। वहीं, नगर निगम मालवा-गंभीर लाइन, अतिरिक्त टैंकरों और बोरिंग की मरम्मत जैसे विकल्पों के जरिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
चार साल से परेशानी, फिर भी स्थायी समाधान का इंतजार
शहर के वार्ड 35 के अंतर्गत तलावली चांदा गांव, बजरंग नगर, रविदास नगर और निरंजनपुर झाडू बस्ती सहित कई क्षेत्रों में रहवासी लंबे समय से जलसंकट का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित जलापूर्ति की समस्या को लेकर शिकायतें करने के बावजूद उन्हें स्थायी राहत नहीं मिली है।
रहवासियों ने मंत्री तुलसी सिलावट और पार्षद राकेश सोलंकी तक अपनी परेशानी पहुंचाने की बात कही है। संगीता केरोल के मुताबिक, वे पिछले छह महीने से पानी की समस्या झेल रही हैं। शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
वहीं, गोलू केरोद का कहना है कि उनके क्षेत्र में करीब चार साल से पानी की परेशानी बनी हुई है। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ता है और आवश्यकता पड़ने पर टैंकर के लिए लगभग 2000 रुपए खर्च करने होते हैं।
रहवासियों को नियमित पानी नहीं मिलने का आरोप
क्षेत्र में पानी के वितरण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता सुभाष सोलंकी के मुताबिक, इलाके में वर्ष 2015 से 2018 के बीच पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था और वर्ष 2020 से इसमें पानी आने लगा।
सोलंकी का दावा है कि टंकी में करीब 35 लाख लीटर पानी आ रहा है, इसके बावजूद संबंधित रहवासियों को नियमित सप्लाई नहीं मिल रही है। उन्होंने पानी के वितरण की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, टंकी में पानी की वास्तविक उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
जलसंकट की शिकायतें केवल वार्ड 35 तक सीमित नहीं हैं। वार्ड 35 और 36 के अलावा तलावली चांदा, लसूड़िया मोरी और बजरंग नगर के कुछ हिस्सों में भी रहवासी पानी की समस्या बता रहे हैं। इसके साथ ही वार्ड 16, 20, 28, 30, 37, 45, 51, 63 और 79 के लोगों ने भी नियमित जलापूर्ति की मांग उठाई है।
रिक्शे में बर्तन रखकर पानी लाने की मजबूरी
जलसंकट का असर बुजुर्गों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे परिवारों पर भी पड़ रहा है। 55 वर्षीय सुभाषचंद्र मेरु रिक्शे में बर्तन रखकर दूसरे क्षेत्र से पानी लाते हैं। उनका कहना है कि उनकी गली तक टैंकर भी नहीं पहुंचते, ऐसे में पानी की व्यवस्था करना अपने आप में चुनौती बन गया है।
मनोरमा जैन भी करीब एक साल से पानी की परेशानी झेल रही हैं। उनके अनुसार, जरूरत पड़ने पर टैंकर बुलवाना पड़ता है, जिसके लिए लगभग 2000 रुपए खर्च करने होते हैं। इस तरह नियमित जलापूर्ति नहीं होने से परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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