गुटकेश्वर महादेव मंदिर में आस्था पर वर्चस्व की छाया
KHULASA FIRST
संवाददाता

सावन में आ रहे हजारों श्रद्धालु, लेकिन जिम्मेदार नदारद; पुजारियों के बीच अधिकार और दान-व्यवस्था को लेकर विवाद
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सावन माह में देवगुराड़िया स्थित प्राचीन श्री गुटकेश्वर महादेव मंदिर में हजारों श्रद्धालु और कांवड़िए पहुंच रहे हैं। पौराणिक मान्यता है कि यहां भगवान गरुड़ ने तपस्या की थी, जिसके चलते इस स्थान को गरुड़ तीर्थ भी कहा जाता है। मंदिर में प्राकृतिक गौमुख से शिवलिंग पर जलधारा गिरती है, जिसके कारण सावन में यहां भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है।
लेकिन आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर इन दिनों व्यवस्था और अधिकार को लेकर विवाद के आरोप लग रहे हैं। धार्मिक आयोजनों, व्यवस्थाओं, दान तथा अन्य आय से जुड़े मामलों पर अलग-अलग पक्षों द्वारा अधिकार जताने की बात कही जा रही है।
आरोप यह भी हैं कि कुछ कथित पुजारियों और उनसे जुड़े निजी व्यक्तियों का मंदिर की व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप है, जिससे श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं।श्रद्धालुओं द्वारा आरोप लगाए जा रहे हैं कि मंदिर परिसर में व्यवस्था संभालने के लिए प्रशासन का जिम्मेदार अधिकारी नियमित मौजूद नहीं रहता।
पुलिस की मौजूदगी भी पर्याप्त नजर नहीं आती। ऐसे में यदि मंदिर की व्यवस्था को लेकर अलग-अलग पक्षों के बीच विवाद बढ़ता है तो कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? मंदिर में विवाद को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर मुख्य पुजारी की ओर से कलेक्टर इंदौर को आवेदन दिया गया है।
आवेदन में कुछ लोगों पर मंदिर के विकास कार्य में बाधा डालने, तोड़फोड़ करने, गाली-गलौज करने और मंदिर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
आवेदन के मुताबिक मंदिर में 20 से 25 दिनों से जीर्णोद्धार कराया जा रहा था। मंदिर की व्यवस्था और देखरेख की जिम्मेदारी मुख्य पुजारी सहित सात पुजारियों पर बताई गई है।
विकास कार्य में बाधा डालने के आरोप
मुख्य पुजारी की ओर से आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग मंदिर की व्यवस्थाओं में अनधिकृत हस्तक्षेप कर अपना अधिकार स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस तरह का हस्तक्षेप भविष्य में विवाद को और गंभीर कर सकता है।
मुख्य पुजारी ने प्रशासन से मामले में समय रहते हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ ही आशंका जताई गई है कि विवाद पर तत्काल नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में स्थिति गंभीर हो सकती है और कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है।
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