खबर
Top News

हर दिन 65 करोड़ का ट्रांजेक्शन: दुनिया के कुल डिजिटल लेनदेन का आधा भारत में

Khulasa First

KHULASA FIRST

संवाददाता

24 सितंबर 2026, 2:02 pm
शेयर करें:
हर दिन 65 करोड़ का ट्रांजेक्शन

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यूपीआई पर चार्ज लगाने का विरोध व्यापारी वर्ग द्वारा किया जा रहा है। डिजिटल कारोबार दुनिया में भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि और ताकत दोनों के रूप में सामने आया है इसके बारे में तकनीकी पहलुओं पर अर्थशास्त्र के शोधकर्ता और विशेषज्ञ सुखबीरसिंह जाटव ने बताया भारत आज विश्व के डिजिटल भुगतान परिदृश्य में एक ऐसा असाधारण मुकाम हासिल कर चुका है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने स्वयं मान्यता दी है।

यूपीआई को दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक-समय भुगतान प्रणाली (अर्थात ऐसी प्रणाली, जिसमें लेनदेन का निपटान तत्काल और अंतिम रूप से होता है, बिना किसी विलंबित समाशोधन प्रक्रिया के) घोषित किया गया है।

एसीआई वर्ल्डवाइड की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक रियल-टाइम भुगतान लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इस तथ्य को रेखांकित करती है कि दुनिया में जितने भी तात्कालिक डिजिटल भुगतान होते हैं, उनमें से करीब आधे अकेले भारत की सीमाओं के भीतर संपन्न होते हैं।

यह उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय है, क्योंकि भारत में प्रतिदिन 65 करोड़ से अधिक यूपीआई लेनदेन होते हैं, जबकि तुलनात्मक रूप से विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा कहीं छोटा है। ब्राजील में प्रतिदिन 20 करोड़ से अधिक, चीन की अंतर-बैंक भुगतान प्रणाली में लगभग 4.5 करोड़, ब्रिटेन की फास्टर पेमेंट्स सेवा में करीब 1.5 करोड़ और संपूर्ण यूरोपीय संघ की एसईपीए इंस्टेंट प्रणाली में लगभग 7 करोड़ लेनदेन प्रतिदिन दर्ज होते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में करीब 240 अरब लेनदेन यूपीआई के माध्यम से हुए, जो वैश्विक कुल डिजिटल लेनदेन संख्या का लगभग आधा भाग है।

उपलब्धि पर मंडरा रहे चुनौती के बादल... यह आंकड़ा स्वयं में इस बात का प्रमाण है कि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (यानी ऐसी बुनियादी तकनीकी व्यवस्था, जो अंतर-संचालनीय, खुली और नागरिकों के लिए सुलभ हो) के क्षेत्र में तकनीकी रूप से अधिक उन्नत माने जाने वाले अनेक देशों को भी पीछे छोड़ दिया है, किंतु इसी उपलब्धि पर अब एक नई नीतिगत चुनौती के बादल मंडरा रहे हैं।

दो हजार रुपए से अधिक मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) अर्थात वह शुल्क जो व्यापारी को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले भुगतान सेवा प्रदाता को चुकाना पड़ता है) आरोपित करने के प्रस्ताव का व्यापारी वर्ग व्यापक स्तर पर विरोध कर रहा है।

नकद लेनदेन से टैक्स चोरी को मिलेगा बढ़ावा... नकद लेनदेन की एक मूलभूत विशेषता यह है कि इसका कोई डिजिटल अनुरेख नहीं होता, जिसके कारण आय और विक्रय को छिपाना अपेक्षाकृत सरल हो जाता है।

इससे कर चोरी (टैक्स एवेज़न) को बढ़ावा मिलता है, कर आधार (टैक्स बेस, यानी वह कुल आर्थिक गतिविधि, जिस पर कर आरोपित किया जा सकता है) संकुचित होता है और सरकार का कर राजस्व प्रभावित होता है। इस राजकोषीय क्षति का अंतिम बोझ ईमानदार करदाताओं और सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता, दोनों पर पड़ता है।

वित्तीय समावेशन की गति होगी अवरुद्ध... विगत एक दशक में यूपाई ने ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों के उन विशाल वर्गों को औपचारिक वित्तीय तंत्र से जोड़ने का कार्य किया है, जिनकी पहले बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच सीमित या नगण्य थी। इसी प्रक्रिया को वित्तीय समावेशन कहा जाता है।

नकदी को पुनः प्रोत्साहन मिलने से इस समावेशन की गति अवरुद्ध हो सकती है, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव उन व्यक्तियों की साख पर पड़ेगा, जिनके पास लेनदेन का कोई इतिहास उपलब्ध नहीं होगा। आधुनिक ऋण-मूल्यांकन प्रणालियां अब डिजिटल लेनदेन आंकड़ों को साख-योग्यता आंकने का प्रमुख आधार मानती हैं।

औपचारिकता में इस कमी से आय असमानता के और अधिक व्यापक होने की आशंका बनी रहती है, क्योंकि बड़े और संगठित व्यापारिक प्रतिष्ठान इस परिवर्तन की लागत को अपेक्षाकृत सहजता से वहन कर लेते हैं, जबकि असंगठित एवं लघु क्षेत्र इसके प्रभाव के प्रति कहीं अधिक संवेदनशील होता हैं।

नकद लेनदेन में हैं कई जोखिम... यह समझना अत्यावश्यक है कि नकदी भी वस्तुतः ‘मुफ्त’ नहीं होती, भले ही सामान्य व्यवहार में यह धारणा प्रचलित हो कि नकद लेनदेन में कोई प्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगता। प्रत्येक मुद्रा-रूप में धारित संसाधन की अपनी एक अवसर लागत (यानी किसी संसाधन को एक निश्चित उपयोग में लगाने पर छूट जाने वाला सर्वश्रेष्ठ वैकल्पिक लाभ) होती है, जो प्रत्यक्ष रूप से दृष्टिगोचर नहीं होती, किंतु आर्थिक विश्लेषण में इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। नकद संभालने, गिनने, जमा करने और उसके प्रबंधन में लगने वाला समय स्वयं में एक श्रम-लागत है, जिसे यदि उत्पादक गतिविधि में नियोजित किया जाता तो वह अतिरिक्त मूल्य सृजन में योगदान दे सकता था।

सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि नकदी पर किसी प्रकार का ब्याज अर्जित नहीं होता, जो राशि व्यक्ति नकद रूप में धारण करता है, वही राशि बैंकिंग तंत्र में जमा रहने पर न केवल प्रतिफल देती, बल्कि बैंकों के पास ऋण-योग्य निधि को भी बढ़ाती, जिससे साख सृजन की प्रक्रिया सुदृढ़ होती।

इसके अतिरिक्त बैंकों की शाखाओं और एटीएम नेटवर्क को बनाए रखने में नियोजित विशाल मानव श्रम एवं परिचालन व्यय भी समाज के लिए एक वास्तविक संसाधन-हानि है, जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में ‘नकदी की सामाजिक लागत’ (सोशल कॉस्ट ऑफ कैश) कहा जाता है।

चाहे यूपीआई पर एमडीआर शुल्क आरोपित हो अथवा नकदी की ओर पुनर्गमन, दोनों ही परिस्थितियों में लेनदेन लागत में वृद्धि होती है और अर्थशास्त्र के मूल सिद्धांत के अनुसार लेनदेन लागत में इस प्रकार की वृद्धि सदैव बाजार को उसके कुशलतम संतुलन बिंदु से विचलित करती है, जिसका संचयी बोझ अंततः उपभोक्ता एवं लघु व्यापारी वर्ग, दोनों को वहन करना पड़ता है।

द्वितीय, मुद्रा के परिसंचरण वेग (वेलोसिटी ऑफ मनी, अर्थात एक निश्चित अवधि में मुद्रा की एक इकाई कितनी बार हाथ बदलती है, इसका मापक) में कमी आने से विनिमय समीकरण के अनुसार समग्र आर्थिक क्रियाकलाप प्रभावित होता है, जिसका सीधा असर आय गुणक पर भी पड़ता है। गुणक का मूल्य घटने से राजकोषीय एवं मौद्रिक नीति, दोनों की प्रभावशीलता क्षीण होती है।

तृतीय, बैंकिंग आदतों में शिथिलता आने से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण डीबीटी जैसी कल्याणकारी योजनाएं भी बाधित हो सकती हैं, क्योंकि निष्क्रिय खातों को बैंक स्वतः बंद कर सकते हैं, जिससे लाभार्थियों की औपचारिक वित्तीय तंत्र तक पहुंच पुनः अवरुद्ध होने का जोखिम उत्पन्न होता है।

चतुर्थ, व्यवहारवादी अर्थशास्त्र की दृष्टि से यूपीआई ने उपभोक्ताओं की सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (अर्थात आय में एक इकाई वृद्धि होने पर उपभोग व्यय में होने वाली वृद्धि का अनुपात) को बढ़ाया है, क्योंकि डिजिटल भुगतान में "पेन ऑफ पेइंग’ अर्थात पैसा व्यय करते समय अनुभव होने वाली मनोवैज्ञानिक पीड़ा नकद भुगतान की तुलना में अपेक्षाकृत कम महसूस होती है।

यदि नकदी की वापसी से यह प्रवृत्ति क्षीण होती है, तो केन्सीय गुणक प्रभाव भी दुर्बल पड़ेगा, जिसका समग्र मांग पर प्रतिकूल प्रभाव संभावित है।

अंततः आयकर अधिनियम के अंतर्गत लागू नकद लेनदेन सीमा के कारण बड़ी राशि का नकद लेनदेन वैधानिक रूप से संभव नहीं रह जाता, जिससे नकद-प्रधान कारोबारी ढांचे में वस्तुओं और सेवाओं की उत्पादन लागत में अनावश्यक वृद्धि होने की संभावना उत्पन्न होती है और अर्थशास्त्र के अधिकांश प्रतिस्पर्धी बाजार मॉडलों के अनुरूप ही यह अतिरिक्त लागत भी अंततः मूल्य-हस्तांतरण की प्रक्रिया के माध्यम से उपभोक्ता एवं व्यापारी वर्ग, दोनों के मध्य वितरित हो जाती है।

संक्षेप में कहा जाए तो भारत ने वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में जो नेतृत्व की स्थिति अर्जित की है, वह किसी संयोग का परिणाम नहीं अपितु सुविचारित नीतिगत हस्तक्षेप और तकनीकी नवाचार के समन्वय का प्रतिफल है, किंतु एमडीआर जैसे प्रस्तावों पर उत्पन्न वर्तमान गतिरोध यह स्मरण कराता है कि किसी भी आर्थिक उपलब्धि को सतत बनाए रखना उतना ही चुनौतीपूर्ण दायित्व है, जितना उसे प्रारंभ में अर्जित करना।

कर राजस्व, वित्तीय समावेशन, बैंकिंग तंत्र की सुदृढ़ता, तथा समष्टि आर्थिक संवृद्धि इन समस्त आयामों पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों को दृष्टिगत रखते हुए नीति-निर्माताओं को भुगतान सेवा प्रदाताओं की लागत-वसूली की वैध आवश्यकता और डिजिटल भुगतान तंत्र की व्यापक सामाजिक उपयोगिता के मध्य एक विवेकपूर्ण संतुलन स्थापित करना अपरिहार्य होगा।

बाजार में मुद्रा प्रचलन फिर बढ़ने का अंदेशा
अर्थशास्त्रीय दृष्टिकोण से देखें तो यह पूर्णतः तर्कसंगत आशंका है। यदि उच्च-मूल्य लेनदेन पर शुल्क लागू होता है, तो व्यापारी स्वाभाविक रूप से ग्राहकों को नकद भुगतान की ओर प्रोत्साहित करने लगेंगे, जिससे बाजार में मुद्रा प्रचलन पुनः विस्तारित हो सकता है।

इसका प्रभाव विशेष रूप से उन लघु व्यापारियों पर अधिक गहरा पड़ेगा, जिनका लाभ पहले से ही अत्यंत संकीर्ण है, और जो इस अतिरिक्त लागत को वहन करने में असमर्थ होकर डिजिटल भुगतान तंत्र से विमुख हो सकते हैं।

यदि इसके परिणामस्वरूप लेनदेन की गति मंद पड़ती है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव भारत की उस वैश्विक साख पर भी पड़ सकता है, जो उसने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर मॉडल को अन्य विकासशील राष्ट्रों के साथ साझा करने की दिशा में अर्जित की है।

संबंधित समाचार

इंडिया-वेस्टइंडीज T20 मुकाबला
Top News

इंडिया-वेस्टइंडीज T20 मुकाबला:स्टेडियम में तैयारियां तेज; पिच से सुरक्षा तक इंतजाम शुरू, फैंस में भारी उत्साह

about 3 hours ago
MP के युवाओं के लिए सुनहरा मौका
Top News

MP के युवाओं के लिए सुनहरा मौका:कांस्टेबल ड्राइवर के पदों पर निकली भर्ती; जानिए आवेदन की पूरी प्रोसेस

about 3 hours ago
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर अड़े राहुल गांधी
Top News

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर अड़े राहुल गांधी:जंतर-मंतर जाने को लेकर पुलिस से बहस; प्रियंका का सड़क पर लेटकर धरना

about 3 hours ago
रिकॉर्ड में एक दुकान, मौके पर अवैध मल्टी खड़ी कर डकार गए एमओएस
Top News

रिकॉर्ड में एक दुकान, मौके पर अवैध मल्टी खड़ी कर डकार गए एमओएस:जोन-13 में बिल्डर की धांधली- नक्शा बदलकर लाखों का राजस्व डुबाया

about 4 hours ago
बाउंड ओवर नोटिस से नाराज 28 पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा
Top News

बाउंड ओवर नोटिस से नाराज 28 पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा:आधी रात थाने पर धरना; इनके पहुंचने पर माने

about 4 hours ago
MP में बढ़ा हुआ बस किराया कम करने की तैयारी
Top News

MP में बढ़ा हुआ बस किराया कम करने की तैयारी:मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए ये निर्देश

about 4 hours ago
मंदिर से चोरी अष्टधातु प्रतिमाएं बरामद
Top News

मंदिर से चोरी अष्टधातु प्रतिमाएं बरामद:पुलिस ने आरोपी को पकड़ा; चार साथियों के नाम का खुलासा

about 4 hours ago
बैंक अधिकारी बनकर नगर निगम ठेकेदार से ठगी
Top News

बैंक अधिकारी बनकर नगर निगम ठेकेदार से ठगी:खाते से उड़ाए हजारों रुपए; शिकायत के बाद केस दर्ज

about 4 hours ago
परिवार ने कलेक्टर से लगाई गुहार
Top News

परिवार ने कलेक्टर से लगाई गुहार:धमकी और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत; सरकारी के बाद अब निजी जमीन पर कब्जे का आरोप

about 4 hours ago
MP में पटवारियों पर कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
Top News

MP में पटवारियों पर कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद:4 सस्पेंड; 52 को सेवा समाप्ति का नोटिस, काम बंद करने की दी चेतावनी

about 4 hours ago
3 साल से स्पीड ब्रेकर की मांग अधूरी, लोग नाराज
Top News

3 साल से स्पीड ब्रेकर की मांग अधूरी, लोग नाराज:स्कूटी से गिरकर महिला हो चुकी है घायल

about 4 hours ago
जनसुनवाई में अधिकारियों को सौंपा दूषित पानी का गिफ्ट
Top News

जनसुनवाई में अधिकारियों को सौंपा दूषित पानी का गिफ्ट:नगर निगम की नाकामी; 6 महीने से गंदा पानी पीने को मजबूर है जनता

about 4 hours ago
देखिए वीडियो, पांच मंजिला इमारत ढही
Top News

देखिए वीडियो, पांच मंजिला इमारत ढही:इतने लोगों के दबे होने की आशंका; दो बच्चे सुरक्षित निकाले गए, रेस्क्यू जारी

about 4 hours ago
सड़कों पर पसरी गंदगी, गलियों में न झाड़ू लगी, न पहुंची कचरा गाड़ियां
Top News

सड़कों पर पसरी गंदगी, गलियों में न झाड़ू लगी, न पहुंची कचरा गाड़ियां:नंबर वन शहर की सफाई व्यवस्था बेपटरी

about 4 hours ago
कांग्रेस पार्षद  का निधन
Top News

कांग्रेस पार्षद का निधन:अस्पताल में तोड़ा दम; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

about 4 hours ago
आटा चक्की चलाते-चलाते प्रॉपर्टी लाइन का बड़ा ब्रोकर बन गया गुड्डा
Top News

आटा चक्की चलाते-चलाते प्रॉपर्टी लाइन का बड़ा ब्रोकर बन गया गुड्डा:बंटी नागर ने भी निभाया याराना; दोनों ने जमकर कूटा माल

about 5 hours ago
फर्नीचर गोदाम में लगी भीषण आग
Top News

फर्नीचर गोदाम में लगी भीषण आग:करोड़ों रुपए का सामान जलकर हुआ राख; 7 फायर ब्रिगेड मौके पर

about 5 hours ago
तू गलत कर रहा है हमें तो प्लॉट लग रहा है
Top News

तू गलत कर रहा है हमें तो प्लॉट लग रहा है:विकास जरिया को धमकाने की रिकॉर्डिंग आई सामने

about 5 hours ago
रावण दहन के विरोध में समाज
Top News

रावण दहन के विरोध में समाज:इतने आयोजकों को कानूनी नोटिस; कहा-‘प्रथा बंद करें, नहीं तो आंदोलन करेंगे’

about 5 hours ago
40 साल से बसे 400 परिवार सरकारी रिकॉर्ड और मूलभूत सुविधाओं से बाहर
Top News

40 साल से बसे 400 परिवार सरकारी रिकॉर्ड और मूलभूत सुविधाओं से बाहर:स्वामित्व योजना में राऊ की एक भी रजिस्ट्री नहीं

about 5 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!