एसडीएम धनगर ने हाई कोर्ट में दिया झूठा शपथ-पत्र: अवंतिका गैस पाइप लाइन विस्फोट में घायल इन्फ्लुएंसर का मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

पीड़िता को भुगतान हुआ ही नहीं था, अब बोले- टाइपिंग मिस्टेक
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अवंतिका गैस पाइप लाइन विस्फोट में बीते दिनों घायल सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जिनी झाला को सहायता राशि भुगतान मामले में एसडीएम घनश्याम धनगर का झूठ सामने आया है। झाला का कहना है हाई कोर्ट में दिए शपथ-पत्र में प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि स्वास्थ्य सहायता राशि का भुगतान हो गया है, जबकि उन्हें कोई राशि मिली ही नहीं। विवाद बढ़ने पर अब धनगर का कहना है कि ये टाइपिंग मिस्टेक थी।
अवंतिका गैस पाइप लाइन हादसे में चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिनके इलाज और आर्थिक सहायता को लेकर हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान प्रशासन ने जो शपथ-पत्र पेश किया, उस पर विवाद खड़ा हो गया है।
घायलों में शामिल सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जिनी झाला (गिरी राजकुमारी झाला) को हाई कोर्ट के आदेश के बाद एयरलिफ्ट करके अहमदाबाद के जायडस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
उनका आरोप है कि प्रशासन ने हाई कोर्ट में दिए शपथ-पत्र में उनके समेत अन्य पीड़ितों को स्वास्थ्य सहायता राशि का भुगतान करना बताया, जबकि वास्तविकता ये है कि भुगतान नहीं हुआ।
उन्होंने कहा सरकारी अधिकारी ही यदि हाई कोर्ट में गलत जानकारी दें तो ये बहुत गंभीर मामला है। हाई कोर्ट ने 7 दिन में सभी का भुगतान करने के निर्देश देते हुए 7 दिन बाद इस याचिका पर सुनवाई की बात कही है।
झाला ने ये भी सवाल उठाया कि यदि भुगतान हुआ ही नहीं था, तो फिर शपथ-पत्र में भुगतान होने की जानकारी किस आधार पर दर्ज की गई। इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
ये बोले एसडीएम धनगर
पूरे विवाद पर एसडीएम घनश्याम धनगर का कहना है हाई कोर्ट में दाखिल शपथ-पत्र में किसी प्रकार की जानबूझकर गलत जानकारी नहीं दी गई। उनके अनुसार यह केवल टाइपिंग की गलती थी। शपथ-पत्र में ‘पेमेंट प्रोसेस में है’ लिखा जाना था, लेकिन टाइपिंग के दौरान गलती से ‘पेमेंट हो गया’ दर्ज हो गया।
जैसे ही यह त्रुटि सामने आई, इसकी जानकारी तत्काल हाई कोर्ट को दे दी गई। उन्होंने कहा कोर्ट ने इस पर किसी प्रकार की नाराजगी व्यक्त नहीं की और न ही उनके द्वारा किसी तरह की माफी मांगी गई। बांबे हॉस्पिटल में इलाज संबंधी भुगतान किया जा चुका है, जबकि अन्य भुगतान की प्रक्रिया जारी है और निर्धारित समय के भीतर पूरा कर दिया जाएगा।
गलती है या लापरवाही
एसडीएम घनश्याम धनगर ने मामले को टाइपिंग की गलती बताया, लेकिन हाई कोर्ट जैसे संवेदनशील मंच पर दाखिल शपथ-पत्रों की कई स्तरों पर जांच होती है। इसके बावजूद यदि तथ्यात्मक त्रुटि सामने आती है तो यह केवल टाइपिंग की गलती है या लापरवाही, यह शोचनीय है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने वाले शपथ-पत्र पूरी तरह सत्यापित दस्तावेज होते हैं। इनमें किसी भी प्रकार की गलती प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है। बहरहाल, हाई कोर्ट ने प्रशासन से पीड़ितों को अब 7 दिन में पेमेंट करने के निर्देश देकर सूचित करने के लिए कहा है।
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