लंदन में बैठा सनपाल: जबलपुर में चलता रहा जमीन का खेल; चार साल से एलओसी, फिर भी उसके नाम हो गया जमीन का नामांतरण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एक तरफ भारतीय जांच एजेंसियों की फाइलों में वर्षों से फरार चल रहे सतीश सनपाल का नाम है, दूसरी तरफ दुबई की चमकदार दुनिया में उसका कारोबारी साम्राज्य। अब इस कहानी में जबलपुर की जमीन का एक ऐसा एंगल सामने आया है, जिसने पूरे मामले पर सवाल खड़ा कर दिया है।
दावा है कि चार साल से फरार भगोड़ा सनपाल विदेश में रह रहा था और इसी दौरान जबलपुर जिले की एक जमीन का नामांतरण उसके नाम पर हो गया। यदि राजस्व रिकॉर्ड इसकी पुष्टि करते हैं तो सवाल सिर्फ जमीन के नामांतरण का नहीं, बल्कि यह भी है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ चार साल से खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) है और जो भारतीय एजेंसियों की नजर में फरार बताया जा रहा है, उसके नाम पर जमीन का राजस्व रिकॉर्ड आखिर कैसे अपडेट हुआ?
यही वह सवाल है, जिसका जवाब अब पुलिस के साथ-साथ राजस्व विभाग की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। अगस्त 2022 में जबलपुर पुलिस के प्रतिवेदन के आधार पर ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने सतीश सनपाल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय पुलिस ने उसे दुबई से संचालित कथित ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का प्रमुख बताया था। उसकी गिरफ्तारी में मदद के लिए 5,000 रुपए के इनाम की घोषणा की गई थी। चार साल बाद भी यह नाम पुलिस रिकॉर्ड से गायब नहीं हुआ।
उलटे 2026 में उसके खिलाफ दर्ज पुराने मामलों को लेकर हाई कोर्ट तक मामला पहुंचा। सनपाल ने जबलपुर के अलग-अलग थानों में दर्ज छह एफआईआर को चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें रद्द करने से इनकार कर दिया। कोर्ट के सामने पुलिस की चार्जशीट में मौजूद सामग्री को ट्रायल में जांचे जाने योग्य माना गया।
विदेश में बैठा आदमी... जमीन यहां कैसे ट्रांसफर हुई?... अब सबसे बड़ा सवाल जबलपुर की जमीन को लेकर है। मामले से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, एक जमीन का नामांतरण सतीश सनपाल के नाम पर होने की बात सामने आई है।
दावा यह है कि उस समय सनपाल भारत में मौजूद नहीं था और विदेश में रह रहा था।यहीं से राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल उठते हैं कि नामांतरण का आवेदन किसने दिया? दस्तावेज किसने पेश किए? क्या सनपाल स्वयं उपस्थित हुआ था या किसी अधिकृत व्यक्ति ने प्रक्रिया पूरी की?
पावर ऑफ अटॉर्नी थी तो वह कब और किसके पक्ष में थी?और सबसे बड़ा सवाल है कि एलओसी वाले व्यक्ति के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में एंट्री कैसे? अगर नामांतरण की प्रक्रिया नियमों के मुताबिक हुई है तो उसके दस्तावेज और आधार सामने आने चाहिए।
अगर सनपाल की अनुपस्थिति में किसी प्रतिनिधि के जरिए प्रक्रिया हुई है तो उस प्रतिनिधि की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। यानी जमीन का नामांतरण अब इस पूरे मामले में एक अलग और बेहद महत्वपूर्ण जांच बिंदु बन सकता है।
सट्टे से लेकर कथित हवाला तक, पुराने मामलों की लंबी फाइल...सनपाल के खिलाफ जबलपुर में दर्ज मामलों का रिकॉर्ड भी छोटा नहीं है। उपलब्ध न्यायिक और सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर उसके खिलाफ जबलपुर के ओमती, मदन महल, लॉर्डगंज, कोतवाली, गोरखपुर और गढ़ा थाना क्षेत्रों में नौ प्रकरणों का उल्लेख मिलता है।
इनमें सट्टेबाजी और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप शामिल बताए गए हैं। 2022 में पुलिस और आयकर विभाग ने उसके राइट टाउन स्थित कथित कैश कलेक्शन सेंटर पर कार्रवाई की थी। रिपोर्ट के मुताबिक वहां से 21.55 लाख रुपए, मोबाइल और दस्तावेज जब्त किए गए थे। उसके खिलाफ एलओसी जारी होने की कार्रवाई भी इसी दौर में हुई थी।
सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर भी चला था बुलडोजर... मई 2022 में जबलपुर जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई में आदर्श नगर रामपुर क्षेत्र में सनपाल से जुड़े बताए गए अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की गई थी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार करीब 6,000 वर्गफीट शासकीय जमीन, जिसकी कीमत लगभग 4.20 करोड़ रुपए बताई गई, को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और करीब 80 लाख रुपए के निर्माण को तोड़ा गया।
यानी एक तरफ पुलिस की कार्रवाई, दूसरी तरफ एलओसी, फिर एफआईआर और अब जमीन के कथित नामांतरण का नया सवाल है कि सनपाल से जुड़ी संपत्ति और उसके नियंत्रण का मुद्दा लगातार जांच के घेरे में बना हुआ है।
हाई कोर्ट से छह एफआईआर में राहत नहीं... अगस्त 2026 में हाई कोर्ट ने सनपाल की ओर से दायर छह एफआईआर रद्द करने की याचिकाएं खारिज कर दीं। सनपाल की ओर से यह दलील दी गई थी कि वह 2020 से दुबई में रह रहा है और घटनाओं के समय भारत में मौजूद नहीं था।
अदालत ने इस स्तर पर एफआईआर खत्म करने से इनकार किया और मामलों में मौजूद सामग्री को ट्रायल के दौरान जांचे जाने योग्य माना। इसका मतलब साफ है कि विदेश में रहना अपने आप में भारतीय मामलों से छुटकारे का आधार नहीं बन गया।
दुबई की चमक के बीच अब जबलपुर के दस्तावेजों पर नजर... सनपाल की पहचान अब सिर्फ पुराने सट्टा मामलों तक सीमित नहीं है। वह दुबई के कारोबारी और हाई-प्रोफाइल लाइफस्टाइल के कारण भी चर्चा में रहा है। मीडिया रिपोर्टों में उसकी संपत्ति और कारोबारी
साम्राज्य को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अलग विषय है। इसी बीच यूएई में उसके खिलाफ कथित वित्तीय कार्रवाई की खबरें भी सामने आईं, जिनका सनपाल ने खंडन किया है।
अब असली सवाल जमीन का
पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यही है कि जिस व्यक्ति के खिलाफ चार साल पहले एलओसी जारी हुआ, जिसके खिलाफ जबलपुर में कई एफआईआर दर्ज हैं और जो लंबे समय से विदेश में रह रहा है,उसके नाम पर जबलपुर की जमीन का नामांतरण कैसे हुआ? अगर यह नामांतरण नियमों के मुताबिक हुआ है तो पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक जांच के सामने आने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
लेकिन यदि दस्तावेजों में कोई गड़बड़ी, गलत प्रस्तुतिकरण, फर्जी हस्ताक्षर, पावर ऑफ अटॉर्नी या किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो यह मामला पुराने सट्टा प्रकरणों से अलग राजस्व और संपत्ति के एक नए विवाद का रूप ले सकता है।
अब गेंद पुलिस के साथ राजस्व विभाग के पाले में है कि जमीन का नामांतरण किस आधार पर हुआ, किसने आवेदन किया और विदेश में बैठे व्यक्ति के नाम पर यह प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई? इन सवालों के जवाब सामने आए तो यह कहानी सिर्फ दुबई के सट्टा किंग की नहीं रहेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि भारत में कानून की फाइलें जिस व्यक्ति को तलाश रही थीं, उसके नाम की जमीन की फाइलें यहां कैसे चलती रहीं।
संबंधित समाचार

नौनिहालों की जान दांव पर:सरकारी स्कूल की छत से टपक रहा पानी; गिर रहा प्लास्टर

इतने लाख लेकर भानजे ने थमा दी फर्जी रसीद:छात्र को परीक्षा से रोका तो हुआ खुलासा; एफआईआर दर्ज

हाईवे के ढाबों-होटलों में खाद्य सुरक्षा विभाग की दबिश पंद्रह नमूने लिए

शहर में स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा:दूसरा मरीज मिला; भर्ती के लिए भटकता रहा, स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर उठे सवाल

घर-घर पहुंचकर प्रभावितों की समस्याएं समझें अधिकारी:मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की केन-बेतवा लिंक परियोजना की समीक्षा, दिए निर्देश

ई-अटेंडेंस ऐप पर हाजिरी लगाना बना चुनौती:सिग्नल की तलाश में छत और पेड़ों पर चढ़ने को मजबूर शिक्षक

वीडियो देखिए:इनको ‘हीरो’ कहने पर भड़का सिख समाज; इस नेता के घर के बाहर प्रदर्शन, दंगों से प्रभावित परिवारों ने जताई नाराजगी, सार्वजनिक माफी की मांग

नियम तोड़ने वालों से ही संभलवाया ट्रैफिक:चालान की जगह हाथों में थमाईं जागरूकता की पटि्टयां

खजराना थाने पर कमिश्नर ने सुनीं जनता की शिकायतें:जन विश्वास कार्यक्रम में 15 से ज्यादा आवेदनों पर सुनवाई

कलेक्टर कार्यालय में ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ आंदोलन है जारी:किसानों के साथ आएंगे युवा; शासन ने लिया संज्ञान, उज्जैन संभाग आयुक्त से आज होगी चर्चा

सवारियों से भरी बस चला रहे थे नशेड़ी चालक:पुलिस ने तीन वाहन किए जब्त

बारिश में फिर पटरी पर लौटी हेरिटेज ट्रेन:155 साल पुराने रेलखंड पर सफर हुआ शुरू; 9.5 किमी के रास्ते में सुरंग, पुल और झरनों का नजारा

वसूली एजेंटों ने घर में घुसकर मंत्री समर्थक कारोबारी से की मारपीट:24 घंटे में चार गिरफ्तार; कोर्ट में पेश कर भेजा जेल

महाकाल का जयकारा लगाकर श्रद्धालुओं ने ग्रहण की प्रसादी

त्योहारों से पहले महंगाई की मार:एक महीने में 21 फीसदी महंगी हुई चीनी; एथेनॉल नहीं, ये वजहें हैं जिम्मेदार

‘साहब’ की गाड़ी आसानी से निकले:इसलिए मेन गेट ही कर दिया बंद; आरटीओ परिसर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर उठे सवाल

सीट के नीचे छिपा रखी थी 26 लाख की एमडी ड्रग्स:सुपर कॉरिडोर पर क्राइम ब्रांच ने दबोचा

कीचड़ और पानी भरे जानलेवा गड्ढों में बैठने को मजबूर हुए बेबस रहवासी:स्मार्ट सिटी में विकास के दावों का हुआ खुलासा; नगर निगम के करोड़ों के बजट के बाद भी गायब हुई सड़कें

6 शराब ब्रांड के सैंपल फेल:व्हिस्की-रम में फ्लेवर मिलाने का खुलासा; तीन कंपनियों को नोटिस, जवाब के बाद होगी आगे की कार्रवाई

जीफ्लिक्स एप का मालिक गिरफ्तार:बना रखे थे 20 हजार सब्सक्राइबर; 1000 से ज्यादा टीवी चैनल दिखाने का दावा
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!