उठाए सवाल इस एप और नेट की डिजिटल प्रविष्टियां उपलब्ध नहीं: लाखों मतदाताओं के नाम हटाने पर आरटीआई में चुनाव कार्यालयों ने कहा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान इंदौर में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। आरटीआई से मिले जवाबों के अनुसार जिले के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के कार्यालयों ने कहा है कि गरुड़ एप व ईआरओ नेट पर की गई प्रविष्टियों से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड उनके स्तर पर संधारित नहीं है।
यह मामला 5 जनवरी 2022 से 15 अक्टूबर 2022 के बीच इंदौर की नौ विधानसभा सीटों में मतदाता सूची से हटाए गए 1 लाख 36 हजार 552 मतदाताओं से जुड़े दस्तावेजों की मांग से सामने आया है। निर्वाचन आयोग के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 2022 की संबंधित प्रक्रिया विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण थी, इसलिए इसे मौजूदा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।
आरटीआई में क्या मांगा गया था?...पूर्व पार्षद दिलीप कौशल ने जिला निर्वाचन कार्यालय, इंदौर व प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय से नौ विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए 1,36,552 मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की जानकारी मांगी थी। इनमें देपालपुर, इंदौर-1, इंदौर-2, इंदौर-3, इंदौर-4, इंदौर-5, डॉ. आंबेडकर नगर-महू, राऊ व सांवेर क्षेत्र शामिल हैं। आरटीआई में गरुड़ एप और ईआरओ नेट पर की गई प्रविष्टियों, अधिकारियों के निर्णयों, सत्यापन की सामग्री और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई थी।
चुनाव कार्यालयों के जवाब में क्या सामने आया?... आरटीआई के जवाबों में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों ने बताया कि उनके कार्यालयों में गरुड़ एप या बीएलओ द्वारा गरुड़ एप तथा ईआरओ नेट पर की गई प्रविष्टियों से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध अथवा संधारित नहीं है। देपालपुर विधानसभा के जवाब में कहा गया कि ईआरओ नेट या बीएलओ के गरुड़ एप से संबंधित कोई डिजिटल रिकॉर्ड कार्यालय में संधारित नहीं किया गया। इंदौर-1 के कार्यालय की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि उस समय भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश नहीं होने के कारण डिजिटल रिकॉर्ड का संधारण नहीं किया गया। इंदौर-2, इंदौर-3, इंदौर-4, इंदौर-5, राऊ और सांवेर के कार्यालयों के जवाबों में भी गरुड़ एप से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई है।
किन रिकॉर्ड की मांग की गई थी?...आरटीआई में केवल एप की प्रविष्टियों की जानकारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य दस्तावेज भी मांगे गए थे। इनमें गरुड़ एप और ईआरओ नेट पर दर्ज जानकारी, अधिकारियों के फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड, वीडियो, पेन ड्राइव, ईमेल या वाट्स एप के माध्यम से उपलब्ध प्रतियां तथा बैकअप रिकॉर्ड शामिल थे।
ठेका कंपनी और बैकअप रिकॉर्ड पर भी स्पष्ट जानकारी नहीं... आरटीआई के जवाबों में ठेका कंपनी, उसके कार्यादेश, अनुबंध, बैकअप डेटा और संबंधित पत्राचार को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। इन जवाबों से यह निष्कर्ष सीधे नहीं निकाला जा सकता कि भारत निर्वाचन आयोग के केंद्रीय स्तर पर कोई डेटा मौजूद ही नहीं है। उपलब्ध जवाब मुख्य रूप से संबंधित जिला और राज्य कार्यालयों में रिकॉर्ड के संधारण से जुड़े हैं।
गरुड़ एप के इस्तेमाल के निर्देश का भी जिक्र... मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की ओर से 1 सितंबर 2022 और 2 दिसंबर 2022 को जारी परिपत्रों का भी इस मामले में उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक इन निर्देशों में फोटो-समान व डेटा-समान प्रविष्टियों के मैदानी सत्यापन के लिए बूथ स्तर के अधिकारियों को गरुड़ एप के उपयोग के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में आरटीआई में स्थानीय कार्यालयों द्वारा डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की जानकारी मिलने पर रिकॉर्ड-संरक्षण और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
2025 में भी की थी शिकायत... दिलीप कौशल ने 31 जुलाई 2025 को इस संबंध में शिकायत मुख्य निर्वाचन आयुक्त समेत संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मतदाता सूची से नाम हटाने के बाद गरुड़ एप और उससे संबंधित डेटा नष्ट कर दिया गया।
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