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ट्विशा केस में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए समर्थ व गिरिबाला: रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं करने और जांच पर उठे सवाल

KHULASA FIRST

संवाददाता

03 जून 2026, 5:30 pm
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ट्विशा केस में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए समर्थ व गिरिबाला

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
ट्विशा शर्मा मृत्यु प्रकरण में सीबीआई ने पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके पुत्र समर्थ सिंह की रिमांड बढ़ाने की मांग नहीं की, जिसके बाद दोनों को भोपाल की सीजेएम कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

सीबीआई सूत्रों के अनुसार रिमांड अवधि के दौरान गिरिबाला और समर्थ से कई चरणों में विस्तृत पूछताछ की गई। जांच एजेंसी ने उनसे घटना के विभिन्न पहलुओं को लेकर सवाल किए और उनके बयानों को रिकॉर्ड किया।

हालांकि दोनों ने उन पर लगाए गए मारपीट, प्रताड़ना और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के आरोपों से इनकार किया। उनका दावा है कि ट्विशा शर्मा के साथ उनके संबंध सामान्य थे। सीबीआई अब आरोपियों के बयानों का उपलब्ध तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों के साथ मिलान कर रही है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

संबंधित पुलिस अधिकारी से हो सकती है पूछताछ
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई अब इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारी से पूछताछ की तैयारी कर रही है। जल्द ही उन्हें नोटिस जारी हो सकता है। इसके अलावा मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों को भी पूछताछ के लिए तलब किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

सीबीआई यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साक्ष्य संरक्षण में हुई कथित चूक लापरवाही थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। मामले में आरोपी पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने मंगलवार को भोपाल केंद्रीय जेल में सुरक्षित स्थान की मांग की।

साक्ष्य संरक्षण में कथित लापरवाही: मामले की जांच के दौरान एक गंभीर प्रक्रियागत चूक भी सामने आई है। जांच में पता चला कि जिस लिगेचर बेल्ट के सहारे ट्विशा शर्मा फंदे पर लटकी मिली थी, उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तत्काल सुरक्षित नहीं किया गया था।

आरोप है कि घटनास्थल से बरामद यह महत्वपूर्ण साक्ष्य जांच अधिकारी द्वारा तत्काल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजने के बजाय करीब दो दिन तक अपनी निजी कार में रखा गया।

इतना ही नहीं, पोस्टमॉर्टम के दौरान भी इस बेल्ट को एम्स अस्पताल में जमा नहीं कराया गया था। साक्ष्य संरक्षण में हुई इस कथित लापरवाही ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब यह जांच का एक अहम पहलू बन गया है।

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