भिक्षुक केंद्र के नाम पर भ्रष्टाचार करने वाली रुपाली जैन की होगी गिरफ्तारी: कोर्ट ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भिक्षुक पुनर्वास केंद्र के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार करने वाली संस्था परम पूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशन सोसाइटी (संस्था प्रवेश) की संचालक रुपाली जैन अपनी करतूतों के चलते फिर मुसीबतों में घिर गई हैं। एरोड्रम पुलिस उसे 8 तारीख को गिरफ्तार कर सकती है।
दरअसल, करोड़ों का भ्रष्टाचार के मामले में छवि खराब होने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी छवि को वापस चमकाने के लिए रुपाली जैन ने इंडेप्थ मीडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक एजेंसी से एग्रीमेंट किया था, जिसमें एजेंसी द्वारा रुपाली जैन के लिए विभिन्न प्रकार की मीडिया एवं कंटेंट संबंधी सेवाए प्रदान की जानी थीं।
इस एग्रीमेंट के अनुसार एजेंसी द्वारा रुपाली जैन के न्यूज आर्टिकल्स, मीडिया में प्रकाशित/प्रसारित किए जाने वाले समाचार एवं लेख, उनके विभिन्न इवेंट से संबंधित सामग्री तथा उनके सामाजिक कार्यों से संबंधित ड्राफ्टिंग एवं मीडिया कंटेंट तैयार किया जाना था।
इसके अलावा एजेंसी द्वारा रुपाली जैन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित किए जाने वाले कंटेंट का निर्माण, ड्राफ्टिंग एवं अन्य आवश्यक मीडिया सामग्री भी तैयार की जाती थी।
इसके लिए रुपाली जैन द्वारा एजेंसी को 50 हजार रुपए प्रतिमाह भुगतान किया जाना तय हुआ था। शुरुआत में रुपाली जैन द्वारा कुछ समय तक निर्धारित भुगतान किया गया, लेकिन उसके बाद उनके द्वारा भुगतान करना बंद कर दिया गया और एजेंसी द्वारा निरंतर सेवाए प्रदान किए जाने के बावजूद बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया।
बाद में बकाया भुगतान के संबंध में एजेंसी द्वारा मांग किए जाने पर रुपाली जैन ने कंपनी को तीन चेक देकर एग्रीमेंट समाप्त कर दिया गया।
एजेंसी द्वारा जब ये चेक अपने बैंक में लगाए गए तो ये तीनों चेक बाउंस हो गए। चेक बाउंस होने पर एजेंसी द्वारा रुपाली को नोटिस भेजे गए, लेकिन उसने नोटिस को स्वीकार नहीं किए और बकाया राशि के भुगतान के संबंध में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया, जिसके बाद एजेंसी द्वारा कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत कर कानूनी कार्यवाही शुरू की गई।
इनमें से दो मामलों में रुपाली जैन द्वारा कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर जमानत प्राप्त की जा चुकी है, जबकि तीसरे मामले में उनके संबंध में न्यायालयीन कार्यवाही लंबित है और वह उस कार्यवाही में उपस्थित नहीं हुई।
इसके अलावा रुपाली जैन ने रुपए देने से बचने के लिए एजेंसी पर दबाव बनाने और पदाधिकारियों को परेशान करने के उद्देश्य से झूठे आरोप भी लगाए गए, जिसके विरुद्ध भी एजेंसी द्वारा विधिक कार्यवाही शुरू की गई है।
एजेंसी का स्पष्ट आरोप है कि उनकी सेवाओं के भुगतान से बचने के लिए रूपाली जैन द्वारा प्रशासनिक एवं पुलिस स्तर पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। जबकि एजेंसी द्वारा किसी प्रकार के दबाव अथवा गैर-कानूनी माध्यम का सहारा लेने के बजाय विधि द्वारा उपलब्ध वैधानिक उपचारों का सहारा लिया गया है।
चेक बाउंस के तीसरे मामले में कोर्ट की कार्यवाही को हल्के में लेना रुपाली को भारी पड़ गया, लिहाजा कोर्ट ने रुपाली के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर एरोड्रम पुलिस को 9 अक्टूबर को रुपाली जैन को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।
इस आदेश में रुपाली को किसी भी कीमत पर जमानत नहीं देने का भी उल्लेख विशेष तौर पर कोर्ट ने किया है। अब नियमानुसार एरोड्रम पुलिस 8 अक्टूबर को रुपाली को गिरफ्तार कर 9 अक्टूबर को कोर्ट में पेश करना होगा। इस वजह से आशंका जताई जा रही ही कि एरोड्रम पुलिस उसे 8 अक्टूबर को गिरफ्तार कर सकती है।
खुलासा फर्स्ट ने ही किया था भ्रष्टाचार का खुलासा
नगर निगम के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार करने के नए रास्ते खोलने के लिए 29 जनवरी 2021 को बहुत बड़ा षड्यंत्र रचते हुए शहर के कुछ भिक्षुओं को नगर निगम के कचरा वाहन में भरकर शहर की सीमा से बाहर शिप्रा इलाके में छोड़ दिया था इसका वीडियो भी नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया।
इसके बाद केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत इंदौर में भिक्षुक पुनर्वास केंद्र शुरू करने का प्रोजेक्ट बनाया गया। इसके टेंडर हुए तो एक संस्था ने ढाई करोड़ रुपए का टेंडर डाला, जो पहले से ही इस पर काम कर रही थी, जबकि रूपाली जैन की संस्था प्रवेश ने 3.64 करोड़ रुपए का टेंडर डाला, जिसे नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों ने मंजूर कर उसे काम दे दिया था।
संस्था प्रवेश में भिखारियों को कैद कर रखा जाता था, केंद्र में कई भिक्षुओं की तड़प तड़प कर मौत हो गई थी। यही नहीं वहां के 2 कर्मचारियों ने कथित तौर पर एक महिला के साथ सामूहिक दुषकर्म भी कर डाला था।
इन सब का खुलासा फर्स्ट ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए बड़ा खुलासा किया था। इसके बाद रूपाली जैन की एक से एक करतूतों का खुलासा भी खुलासा फर्स्ट द्वारा किया गया था।
अपनी करतूत का खुलासा होने के बाद खुद को बहुत बड़ी समाज सेविका बताने का ढोंग करने वाली रूपाली जैन की कथित साफ़ सुथरी सामाजिक छवि लोगो के सामने आ गई थी। अपनी धूमिल हुई छवि को चमकाने के लिए ही रूपाली जैन ने इंडेप्थ मीडिया प्राइवेट लिमिटेड एजेंसी का सहारा लिया था।
एजेंसी के कर्ताधर्ताओं ने रूपाली जैन की छवि को चमकाने का काफी प्रयास किया, हालांकि वो भी उसी दागदार छवि को चमकाने में कामयाब नहीं हो सके। लेकिन रूपाली जैन उनके भी रूपये खा गई, उन्हें चेक देकर टरकाने का प्रयास किया, लेकिन वो बाउंस हो गया। लिहाजा जिन लोगों के माध्यम से वह अपनी छवि चमकाने का प्रयास कर रही थी, उन्होंने ही उस पर कालिख पोत दी है।
खाएगी हवालात की हवा... अब भले ही एक रात के लिए ही सही रूपाली जैन को अपराधियों की तरह एरोड्रम थाने में हवालात की हवा तो खाना ही पड़ेगी। यदि एरोड्रम पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया तो इसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा, ऐसे में एरोड्रम थाना प्रभारी पर भी कोर्ट की गाज गिर सकती है। 8 अक्टूबर को उसे गिरफ्तार कर पुलिस 9 अक्टूबर को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेंद्र तिवारी की कोर्ट में प्रस्तुत करेंगी।
छवि चमकाने में लाखों रुपए कर दिए खर्च
भिक्षुक पुनर्वास केंद्र के नाम पर भ्रष्टाचार करने पर बदनाम हुई रुपाली जैन ने अपनी छवि चमकाने के लिए शहर के नामी अखबारों को लाखों रुपए देकर अपने लिए आधे पन्नों के आर्टिकल छपवा कर अवार्ड लिए गए।
पूरा शहर जनता है कि उस नामी अखबार द्वारा रुपए लेकर लोगों को अवार्ड दिए जाते हैं और उनके आर्टिकल छापे जाते हैं। इसके अलावा और भी प्लेटफॉर्म्स पर रुपाली जैन द्वारा सम्मान खरीदे गए।
उन सब में उसने लाखों रुपए खर्च कर दिए, लेकिन जिन लोगों ने उसकी धूमिल छवि को चमकाने का प्रयास किए गया, रुपाली उनके ही रुपए खा गई।
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