रसीदें 2.46 करोड़ की बैंक में मिले सिर्फ 16.70 लाख: नगर निगम में 2.30 करोड़ का घोटाला
KHULASA FIRST
संवाददाता

नेता प्रतिपक्ष ने किया 50 करोड़ से अधिक के घोटाले का दावा
फर्जी खातों और पीओएस मशीनों से वसूली का ग्राफ चमकाने के खेल का खुलासा एआरओ अखिलेश मालवीय और बिल कलेक्टर संयम नीमा निलंबित
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम का राजस्व विभाग फिर वित्तीय अनियमितताओं और गंभीर घोटालों के केंद्र में है। निगम में एक मामले की जांच पूरी भी नहीं हो पाती कि गबन का दूसरा नया कारनामा सामने आ जाता है।
फर्जी बिल भुगतान और अवैध नामांतरण प्रकरणों के बाद अब राजस्व रिकॉर्ड्स में कागजी बाजीगरी कर करोड़ों रुपए का 'हवाई' कलेक्शन दिखाने के नए मामले का खुलासा हुआ है।
जोन-2 के वार्ड 69 में वसूली का ग्राफ कागजों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए पीओएस मशीनों के जरिए करोड़ों रुपए की फर्जी रसीदें काट दी गईं। आधिकारिक पोर्टल पर कुल 2 करोड़ 46 लाख 29 हजार 999 रुपए की वसूली दर्ज की गई, लेकिन जब पोर्टल पर दर्ज इन रसीदों का बैंक खाते में जमा राशि से मिलान किया गया, तो निगम के होश उड़ गए।
बैंक खाते में वास्तव में केवल 16 लाख 70 हजार 252 रुपए के ट्रांजेक्शन ही पाए गए। कागजी रसीदों और वास्तविक जमा राशि के बीच सीधे-सीधे 2 करोड़ 29 लाख 59 हजार 747 रुपए करीब 2.30 करोड़ रुपए का अंतर मिला है।
आयुक्त का कड़ा रुख
दो कर्मचारी निलंबित, ट्रेंचिंग ग्राउंड भेजा... मामले की गंभीरता को देखते हुए निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने कार्रवाई करते हुए प्रकरण में गंभीर लापरवाही और फर्जीवाड़े में संलिप्तता पाए जाने पर बिल कलेक्टर संयम नीमा और प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी एआरओ अखिलेश मालवीय को परसों सस्पेंड कर दिया गया। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय ‘ट्रेंचिंग ग्राउंड' तय किया गया है।
पानी, कचरा और संपत्ति कर के नाम पर काटी फर्जी रसीदें..बिल कलेक्टर ने कबूला सच... जांच के दौरान सामने आया कि जोन-2 के अंतर्गत आने वाले वार्ड 69 में संपत्ति कर, कचरा कर और जल कर की वसूली का ग्राफ चमकाने के लिए फर्जी खातों का सहारा लिया गया। इन बोगस खातों में पीओएस मशीनों का इस्तेमाल कर रसीदें जनरेट की गईं और उन्हें सिस्टम पर अपलोड कर दिया गया।
निगम के निलंबन आदेश के अनुसार, पूछताछ में बिल कलेक्टर संयम नीमा ने स्वीकार किया कि इन जारी रसीदों के बदले किसी भी करदाता या नागरिक से वास्तविक नकदी या ऑनलाइन राशि प्राप्त नहीं की गई थी।
यह पूरी बाजीगरी केवल विभागीय बैठकों में वसूली का ग्राफ बढ़ा हुआ दिखाने के उद्देश्य से रची गई थी। निगम प्रशासन ने इसे राजस्व रिकॉर्ड के साथ आपराधिक कूटरचना और गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है।
वहीं, प्रभारी एआरओ अखिलेश मालवीय पर आरोप है कि उन्होंने अपने अधीनस्थ बिल कलेक्टर द्वारा जारी की गई रसीदों का बैंक जमा और रिकॉर्ड से मिलान करने में घोर लापरवाही बरती और पूरी प्रक्रिया की निगरानी नहीं की।
40 लाख की फर्जी एंट्री का एक और मामला, 1995 के पुराने खातों में हेरफेर... इसी जांच की कड़ी में यह बात भी सामने आई कि राज मोहल्ला जोन-2 में संपत्तिकर खाते की देनदारी को खत्म शून्य करने के लिए फर्जी पोस्टिंग का खेल भी चल रहा था।
शिकायत मिलने पर निगमायुक्त ने अपर आयुक्त आकाश सिंह को जांच सौंपी थी। जांच में पाया गया कि बिल कलेक्टर संयम नीमा ने एक संपत्ति कर खाते में करीब 40 लाख रुपए की फर्जी एंट्री कर दी थी।
यह खाता वर्ष 1995 का था, जिसके पुराने रिकॉर्ड में फेरबदल कर निगम को भारी आर्थिक चपत लगाने का प्रयास किया गया। अपर आयुक्त के अनुसार, शुरुआती जांच में फिलहाल किसी सीधे नकद लेनदेन का साक्ष्य नहीं मिलने के कारण वित्तीय रिकवरी नहीं निकाली गई है, लेकिन दोनों कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जाँच के आदेश दिए गए हैं।
निलंबित मालवीय पर अवैध नामांतरण और कर घटाने के 3 गंभीर मामले
जांच के दौरान निलंबित प्रभारी एआरओ अखिलेश मालवीय के खिलाफ तीन संपत्ति खातों में नियमों को ताक में रखकर नामांतरण करने और निगम को चपत लगाने की बात भी साबित हुई है।
प्रॉपर्टी आईडी 1000876273 : बिना किसी पंजीकृत कानूनी दस्तावेज और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के नामांतरण कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह बदलाव खुद उनके यूजर आईडी से भी नहीं दर्ज किया गया है।
प्रॉपर्टी आईडी 9000273809: नियमों के विरुद्ध पुराने खाते को पृथक किए बिना नया खाता दर्ज किया गया और बिना किसी सक्षम अनुमति के नाम बदल दिया गया।
प्रॉपर्टी आईडी 1000858066: संपत्ति कर का निर्धारण नियमानुसार न करते हुए काफी कम किया गया, जिससे करदाता को अनुचित लाभ मिला और निगम खजाने को बड़ा वित्तीय
नुकसान हुआ।
निगम के वे चर्चित मामले, जिन्होंने प्रशासनिक साख पर उठाए सवाल
103.42 करोड़ रुपए का फर्जी बिल भुगतान घोटाला
बिना काम किए जाली वर्क ऑर्डर और फर्जी बिलों के आधार पर 103.42 करोड़ रुपए के भुगतान का मामला प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में है, जिसमें 32 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
354 खातों में फर्जी नामांतरण का खेल: अधिकारियों की लॉगिन आईडी का गलत इस्तेमाल कर 354 संपत्तियों के रिकॉर्ड्स बदलने का आपराधिक मामला दर्ज किया जा चुका है।
डिजिटल सिस्टम पर सवाल: पीओएस मशीनों से फर्जी रसीदें जनरेट होने और संपत्ति खातों से खिलवाड़ होने के कारण निगम की पूरी डिजिटल व्यवस्था और साइबर सुरक्षा कटघरे में खड़ी हो गई है।
विपक्ष आक्रामक 2.30 करोड़ से शुरू हुआ खेल 50 करोड़ का, सभी 22 जोनों की हो जांच
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनिला मिमरोट ने इस मामले में निगम प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जोन-2 में 103 संपत्तिकर खातों से करदाताओं की राशि जमा तो कराई गई, लेकिन वह पैसा निगम के खाते में नहीं पहुंचा।
नेता प्रतिपक्ष का दावा है कि शुरुआत में यह मामला केवल 2 करोड़ रुपए के गबन का लग रहा था, लेकिन जिस तरह से फर्जी पोस्टिंग और पीओएस मशीनों के फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं, यह घोटाला 50 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
उन्होंने आशंका जताई है कि ऐसी फर्जी पोस्टिंग और ‘हवाई' रसीदों का खेल केवल एक जोन तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के सभी 22 जोनों में फैला हुआ है। उन्होंने निगम के सभी 22 जोनों के राजस्व रिकॉर्ड्स की जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर तत्काल पुलिस एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
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