सुसाइड नोट के हस्ताक्षर पर उठे सवाल: 4 आरोपी बरी; फॉरेंसिक रिपोर्ट में हस्ताक्षरों में अंतर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिला न्यायालय ने आत्महत्या के लिए उकसाने और अवैध सूदखोरी के मामले में आरोपी बनाए गए चार लोगों को दोषमुक्त कर दिया।
अदालत ने मामले में पेश सुसाइड नोट और अन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया। मामले में घटना के करीब 45 दिन बाद सामने आए सुसाइड नोट की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
45 दिन बाद पेश हुआ था सुसाइड नोट
मामला शिप्रा थाना क्षेत्र का है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता केके कुन्हारे के मुताबिक, 30 जून 2021 को मोटरसाइकिल शोरूम संचालक मनोज पटेल ने जहर खाकर आत्महत्या की थी। पुलिस ने घटना के बाद प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
करीब 45 दिन बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस को एक हिसाब-किताब की डायरी और एक पन्ने का कथित सुसाइड नोट सौंपा।
इसी आधार पर पुलिस ने दीपक जायसवाल, माखन, अनिल सहित चार लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और अवैध सूदखोरी की धाराओं में मामला दर्ज किया था।
हिंदी में हस्ताक्षर को लेकर उठा सवाल
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने सुसाइड नोट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया। तर्क दिया गया कि मनोज पटेल अपने आधिकारिक और निजी दस्तावेजों पर आमतौर पर अंग्रेजी में हस्ताक्षर करते थे, जबकि कथित सुसाइड नोट पर हिंदी में हस्ताक्षर थे।
अदालत के निर्देश पर मृतक के अन्य हस्ताक्षरयुक्त दस्तावेज मांगे गए, लेकिन परिजन उन्हें उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद पुलिस ने शोरूम से वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के हायर परचेज एग्रीमेंट की मूल प्रतियां जब्त कीं। इन दस्तावेजों पर मनोज पटेल के अंग्रेजी हस्ताक्षर पाए गए।
फॉरेंसिक जांच में भी सामने आया अंतर
सुसाइड नोट और अन्य दस्तावेजों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फॉरेंसिक जांच में सुसाइड नोट पर मौजूद हस्ताक्षरों और अन्य नमूनों के बीच अंतर पाया गया। इससे सुसाइड नोट की विश्वसनीयता पर सवाल और गहरा गया।
इसके अलावा मृतक के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में भी आरोपियों द्वारा कथित आर्थिक दबाव, लेनदेन या प्रताड़ना से संबंधित कोई निर्णायक साक्ष्य सामने नहीं आया।
संदेह का लाभ देकर चारों को दोषमुक्त किया
मामले में पेश दस्तावेजों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों पर विचार करने के बाद जिला न्यायालय ने अभियोजन के आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं माना। अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने और सूदखोरी के आरोपों में चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
अदालत ने मृतक के परिजनों की ओर से दायर क्रिमिनल रिवीजन याचिका भी खारिज कर दी। कोर्ट के फैसले में सुसाइड नोट की प्रमाणिकता और उपलब्ध साक्ष्यों की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण रही।
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