51 से अधिक रजिस्ट्रियों पर उठाए सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता एवं अधिवक्ता प्रमोद कुमार द्विवेदी ने पत्रकार वार्ता में इंदौर नगर निगम आयुक्त और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी नियम-2015 के प्रावधानों के पालन से लेकर संपत्तिकर रसीद, नामांतरण, रजिस्ट्रियों और अवैध कॉलोनियों के मामले में शासन और निगम से जवाब मांगा।
द्विवेदी ने सवाल किया कि सूचना प्रौद्योगिकी नियम-2015 के प्रावधानों का आयुक्त ने अवलोकन क्यों नहीं किया। डिजिटल हस्ताक्षर यदि दोनों उपायुक्तों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए तो संबंधित लोगों के खिलाफ किन आपराधिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कराया गया?
उपायुक्तों की कथित लापरवाही पर क्या कार्रवाई हुई? उन्होंने कहा कि 51 से अधिक रजिस्ट्रियां होने के बावजूद विभाग और शासन की ओर से क्या कार्रवाई की जा रही है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि संबंधित पक्ष पीड़ित हैं तो शासन द्वारा स्टांप ड्यूटी माफी के लिए कोई पहल क्यों नहीं की जा रही और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज क्यों नहीं कराया जा रहा?
द्विवेदी ने कहा कि क्या नगर निगम की संपत्तिकर रसीद और नामांतरण दाखिले से किसी व्यक्ति का स्वत्व प्रमाणित होता है? यदि यह स्वत्व का प्रमाण है तो नगर निगम विधान की आवश्यकता ही क्या रह जाती है। उन्होंने कहा कि संपत्तिकर रसीद और दाखिले में नगर निगम विधान की धारा 167 का उल्लेख होता है, जिसमें स्पष्ट किया जाता है कि यह स्वत्व का प्रमाण नहीं है।
कॉलोनी अवैध है तो क्यों नहीं की जा रही कार्रवाई ?
उन्होंने पूछा कि यदि कोई कॉलोनी अवैध है तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? अवैध कॉलोनियों में निर्माण कैसे हो रहे हैं और ये कॉलोनियां आखिर बसी कैसे? द्विवेदी ने वर्ष 1999 से भाजपा परिषद और वर्ष 2003 से भाजपा सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि अब तक कितने कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
एक आदेश से रजिस्ट्रियां रोकना कितना उचित?
द्विवेदी ने कहा कि रजिस्ट्री से नगर निगम को 3 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी के रूप में आय प्राप्त होती है, जबकि मध्यप्रदेश शासन को स्टांप ड्यूटी, पंजीयन शुल्क, उपकर और पंचायत कर सहित विभिन्न मदों में राजस्व मिलता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या इन सभी राजस्व स्रोतों को एक अधिकारी के आदेश से रोका जा सकता है?
उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ष गाइडलाइन में वृद्धि राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से करती है और स्टांप ड्यूटी भी बढ़ाई गई है। सरकार का तर्क रहता है कि विकास कार्यों के लिए धन की आवश्यकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि रजिस्ट्रियां रोकने से सरकार और स्थानीय निकाय को राजस्व कैसे मिलेगा?
फर्जी नामांतरण घोटाला उजागर करने का दावा: द्विवेदी ने दावा किया कि नगर निगम से जुड़े फर्जी नामांतरण घोटाले को उन्होंने ही उजागर किया था। उन्होंने शासन और नगर निगम से पूरे मामले में जवाबदेही तय करने तथा संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
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