खबर
टॉप न्यूज

बिहार में जातीय राजनीति ध्वस्त होने की नव क्रांति का जय घोष

Khulasa First

Khulasa First

संवाददाता

25 नवंबर 2025, 4:44 pm
शेयर करें:
बिहार में जातीय राजनीति ध्वस्त होने की नव क्रांति का जय घोष

आलोक मेहता वरिष्ठ पत्रकार खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने बिहार से राजनीतिक व्यवस्था के लिए सम्पूर्ण क्रांति का आह्वान किया था। इसके 50 साल बाद प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जातीय राजनीति की कलंकित सत्ता व्यवस्था को बदलने में सफलता पाकर नव क्रांति कर दी है।

विशेष रूप से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में जेल याफ्ता लालू यादव के यादव मुस्लिम वोट बैंक को फेल करने और कांग्रेस द्वारा दलित मुस्लिम मतदाताओं को बंधक गुलाम समझने की दादागिरी को भी विफल किया जाना दूरगामी हितों का परिचायक है।

बिहार विधानसभा चुनावों ने एक स्पष्ट संकेत दिया है— जातिगत और सामुदायिक राजनीति की सीमाएं हैं, और सिर्फ पहचान-राजनीति अब उतनी मजबूत शक्ति नहीं रही जितनी पहले मानी जाती थी। महागठबंधन की हार इस तथ्य को दर्शाती है कि पुराने समीकरण, पुराने वोट बैंक अब बिना आधुनिक और विकास-उन्मुख रणनीति के काम नहीं कर सकते। इसी तरह कम्युनिस्ट माओवादी पार्टियों का लाल किला भी टूट फूट गया। नक्सल प्रभावित इलाका भी हिंसा से मुक्त हो गया है।

युवा मतदाता, आशावादी सामाजिक परिवर्तन, और बेहतर शासन की मांग ने बिहार की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। भविष्य के लिए, जो दल इन बदलते रुझानों को समझेगा और उसे अपनी राजनीति में आत्मसात करेगा, वह अधिक सफल होगा।मोदी के सबका साथ सबका विकास का फार्मूला जनता ने स्वीकार कर लिया।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता के 25 वर्ष और नीतीश कुमार की सत्ता के 20 वर्ष के कार्यकाल में दोनों पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लग सका। यह इस बात का भी प्रमाण है कि जनता भ्रष्ट, अपराधी और बेईमान नेतृत्व के बजाय ईमानदार और जनता के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित नेतृत्व को पसंद करती है।

बिहार की सामाजिक संरचना जटिल समझी जाती रही है। 2023 की जाति-गणना के मुताबिक, अत्यंत पिछड़ी जातियां राज्य की लगभग 36% हैं। पिछड़ी जातियां, अनुसूचित जातियां , उच्च जातियां— सभी का यहां महत्वपूर्ण प्रतिशत है। इस प्रकार, बिहार में जातिगत विभाजन राजनीतिक समीकरणों का मूल आधार रहा है।

यह वह जमीन है जिस पर दल हमेशा वोट बैंक विकास की रणनीति तैयार करते रहे। लेकिन हाल के समय में, बिहार के मतदाता पुराने जातिगत समीकरण के अलावा नई आशाओं और मुद्दों की ओर भी झुके हैं। यह युवा मतदाता वर्ग, पहली बार वोट देने वाले, विकास, रोज़गार और शासन-परदर्शिता जैसे एजेंडों को महत्व दे रहा है।

इस बदलाव का मतलब यह है कि सिर्फ जाति-गणित) अब चुनाव जीतने का पर्याप्त आधार नहीं रहा। लालू यादव की पारंपरिक ताकत मुसलमान+ यादव वोट बैंक माना जाता रह।, यह वोट बैंक लगभग 30% तक पहुंचता है। यह वही वोट बैंक है जिस पर लालू-राज की राजनीति लंबे समय से आधारित रही। लेकिन 2025 में, यह पुराना समीकरण पूरी तरह नाकाम रहा।

तेजस्वी यादव अन्य पिछड़ी जातियों में गहराई तक पैठ नहीं बना सके। इसके साथ ही, गठबंधन के आंतरिक मतभेद और सीट आवंटन की लड़ाइयों ने भी सुनिश्चित सहयोग को कमजोर कर दिया। महागठबंधन के विभिन्न घटक (राजद, कांग्रेस, लेफ्ट) के पास एक राजनीतिक संदेश नहीं था। इस तरह, आम मतदाताओं के लिए गठबंधन की कहानी स्पष्ट नहीं थी और यह एक बड़ी कमजोर कड़ी साबित हुई।

महागठबंधन में नेतृत्व का अस्थिर ढांचा था। राजद और कांग्रेस के बीच मुख़्यमंत्री चेहरे को लेकर विवाद, और रणनीति पर तालमेल की कमी सार्वजनिक रूप से दिखी। तेजस्वी यादव ने जो राजनीतिक आक्रामकता दिखाई, वह विशाल वोट बैंक तक नहीं पहुंच पाई क्योंकि उनकी रणनीति कहीं-कहीं अहस्तक्षेपपूर्ण रही।– गठबंधन में कथित फ्रेंडली मुकाबले भी हुए। कुछ सीटों पर राजद, कांग्रेस, वीआईपी आदि के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हुए।

महागठबंधन की स्थानीय संगठन उतनी मजबूत नहीं थी जितनी कि मोदी शाह नीतीश गठबंधन की थी।बूथ मैनेजमेंट में कमजोरी, उम्मीदवारों की पहचान की कमी और गठबंधन के अंदरूनी मतभेदों ने उनकी चुनावी लड़ाई को कमजोर कर दिया।इसमें यह भी देखा गया कि कांग्रेस द्वारा कुछ उम्मीदवारों का चयन गलत रहा। स्थानीय समीकरणों की अनदेखी हुई, जिससे मतदाता नाराज हुए।

युवा मतदाता, विशेष रूप से नौकरी, आर्थिक भविष्य और विकास-विकास एजेंडा पर अधिक ध्यान देने लगे हैं। पहले वोट देने वाले बहुतों ने जातिगत कार्ड की सीमाओं को पहचान लिया है। भाजपा-जदयू गठबंधन ने विकास, सुशासन, कानून-व्यवस्था पर एक स्पष्ट एजेंडा पेश किया, जिसे कई मतदाताओं ने पसंद किया।इसके विपरीत, महागठबंधन का एजेंडा धुंधला रहा- जाति-समर्थित रणनीतियां, लेकिन ठोस विकास व शासन की पहल कम दिखाई दी। यही नवीन राजनैतिक चेतना कुछ इलाकों में जाति-संकेतों की ताकत को कम कर रही है।

बिहार में सांप्रदायिक राजनीति का उपयोग राजनीतिक दलों द्वारा किया गया, लेकिन 2025 में यह उतना निर्णायक नहीं रहा जितना पहले माना जाता था। राजद हमेशा मुसलमान-समर्थित दावेदार समझता रहा , लेकिन महागठबंधन ने मुसलमान वोट को अकेले मुद्दे तक सीमित नहीं रखा — वे बड़े सामाजिक न्याय, गरीबी राहत और आर्थिक मुद्दों पर भी बात करना चाहते थे।

लेकिन उनकी पहुँच मात्र पहचान-आधारित राजनीति तक सीमित रही। इसके अलावा, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने सबका साथ के रास्ते को प्राथमिकता दी। गठबंधन में सीटों की टकराहट और बूथ मैनेजमेंट की कमजोरी ने नुकसान पहुंचाया।

महागठबंधन में नेतृत्व की वैचारिक अस्पष्टता, भरोसे की कमी और चयन प्रक्रिया सुधारने में असमर्थता ने मतदाताओं के मन में अनिश्चितता पैदा की। इस बीच एनडीए ने एक अधिक केंद्रित, विकास-उन्मुख और संगठनात्मक रूप से मजबूत अभियान चलाया, जिसने मतदाताओं को भरोसा हुआ।

2025 का बिहार चुनाव इस मायने में महत्वपूर्ण साबित हुआ कि पारंपरिक जातिगत और पहचान-राजनीति अब अपर्याप्त हो गई है। नए मुद्दे- जैसे रोज़गार, युवा आकांक्षाएं, आर्थिक समावेश, महिला सशक्तिकरण मतदाताओं के लिए पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

इसके साथ ही, मतदाता अब केवल जातिगत पहचान से संतुष्ट नहीं हैं; वे नियंत्रण एवं जवाबदेही, प्रभावी शासन और दूरगामी विकास की मांग कर रहे हैं। महागठबंधन के लिए सबसे बड़ा सबक यह है कि सिर्फ पुराने जातिगत समीकरणों को दोहराना और वोट बैंक के भरोसे राजनीति करना अब पर्याप्त नहीं है।

उन्हें अपनी रणनीति को पुनर्गठित करना होगा- बूथ स्तर की मजबूत संगठन, स्थानीय उम्मीदवारों का चयन, वास्तविक विकास-पक्षीय नारे, और नेतृत्व की स्पष्टता। साथ ही, नए मतदाताओं (युवा, पहली बार वोट देने वाले) को लक्षित करने के लिए एजेंडा तैयार करना होगा, ना कि सिर्फ जातिगत समीकरणों पर निर्भर रहना।

वामपंथी दलों में, भाकपा (माले) विपक्ष की सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रही है। 2020 में 19 में से 12 सीटें जीतने के बाद, इस बार भाकपा (माले) ने 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। कम्युनिस्ट पार्टियों ने इस बार 33 उम्मीदवार उतारे, जिनमें केवल 3 जीत पाए। मतलब कम्युनिस्ट अब बिहार से उखड़ गए हैं। वहीं राहुल गांधी का नेतृत्व विफल होने से गठबंधन की दशा दिशा बदलने वाली है।

बेहतर शासन की मांग ने बिहार की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। भविष्य के लिए, जो दल इन बदलते रुझानों को समझेगा और उसे अपनी राजनीति में आत्मसात करेगा, वह अधिक सफल होगा।

मोदी के ‘सबका साथ सबका विकास’ का फार्मूला जनता ने स्वीकार कर लिया। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता के 25 वर्ष और नीतीश कुमार की सत्ता के 20 वर्ष के कार्यकाल में दोनों पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लग सका।

यह इस बात का भी प्रमाण है कि जनता भ्रष्ट, अपराधी और बेईमान नेतृत्व के बजाय ईमानदार और जनता के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित नेतृत्व को पसंद करती है।

टैग:

संबंधित समाचार

सीईसी की लड़ाई राष्ट्रपति तक आई
Indore

सीईसी की लड़ाई राष्ट्रपति तक आई:ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के मुद्दे पर आज राष्ट्रपति से मिलेंगे इंडिया गठबंधन के नेता, समय मांगा

11 minutes ago
स्वच्छता के दावों के बीच बदहाल सार्वजनिक सुविधाएं
Top News

स्वच्छता के दावों के बीच बदहाल सार्वजनिक सुविधाएं:जहां हजारों की आवाजाही; वहीं सफाई और पानी का संकट

16 minutes ago
देखिये वीडियो, ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा
Top News

देखिये वीडियो, ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क का खुलासा:क्राइम ब्रांच ने 3 आरोपियों को पकड़ा; करोड़ों के हिसाब वाले रजिस्टर जब्त

22 minutes ago
व्यापारिक संगठनों की चेतावनी
Top News

व्यापारिक संगठनों की चेतावनी:यूपीआई पर चार्ज लगा तो बाजारों से हटेंगे क्यूआर कोड!

31 minutes ago
जमीन की नपती रोकने पर अड़ा यादव परिवार
Top News

जमीन की नपती रोकने पर अड़ा यादव परिवार:सीमांकन करने पहुंचे अफसरों के सामने हंगामा; थाने पहुंचे दोनों पक्ष

41 minutes ago
देखिए वीडियो, बदहाल सड़कों और ड्रेनेज को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन
Top News

देखिए वीडियो, बदहाल सड़कों और ड्रेनेज को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन:निगम को अल्टीमेटम; इतने दिन में समाधान नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

about 1 hour ago
आईडीए पर कांग्रेस ने लगाया दोहरी नीति का आरोप
Top News

आईडीए पर कांग्रेस ने लगाया दोहरी नीति का आरोप:छात्रों की गूंज कार्यक्रम के मैदान आवंटन पर विवाद

about 1 hour ago
युवक ने नाबालिग प्रेमिका के साथ की आत्महत्या
Top News

युवक ने नाबालिग प्रेमिका के साथ की आत्महत्या:फंदे पर लटके मिले शव; नहीं मिला सुसाइड नोट

about 1 hour ago
देखिए वीडियो, प्रसिद्ध अभिनेता के निधन के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस
Top News

देखिए वीडियो, प्रसिद्ध अभिनेता के निधन के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस:मौत की परिस्थितियों की जांच; राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

about 1 hour ago
सीबीआई की बड़ी कार्रवाई
Top News

सीबीआई की बड़ी कार्रवाई:प्राचार्य लाखों रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार; कर्मचारी की भूमिका भी जांच के दायरे में

about 1 hour ago
डिप्टी सीएम के 'करीबी' पर इतने करोड़ लेने का आरोप
Top News

डिप्टी सीएम के 'करीबी' पर इतने करोड़ लेने का आरोप:शराब दुकानों के ठेके दिलाने के बदले मदद का दावा

about 2 hours ago
चलती कार बनी आग का गोला
Top News

चलती कार बनी आग का गोला:महाकाल दर्शन करने जा रहा था परिवार; मची अफरा-तफरी

about 2 hours ago
दो हादसे
Top News

दो हादसे:बाइक भिड़ंत में युवक की मौत; बस की टक्कर से तीन की गई जान

about 2 hours ago
छात्रा की मौत का खुलासा
Top News

छात्रा की मौत का खुलासा:दोस्त हिरासत में; पूछताछ में किए कई खुलासे

about 2 hours ago
VIP नंबरों का क्रेज
Top News

VIP नंबरों का क्रेज:तीन साल बाद फिर इतने लाख रुपए के पार पहुंची इस नंबर की कीमत

about 2 hours ago
CJP के प्रदर्शन से पहले राजधानी में सख्ती
Top News

CJP के प्रदर्शन से पहले राजधानी में सख्ती:पुलिस ने अनुमति से किया इनकार; कई मेट्रो स्टेशन बंद

about 3 hours ago
भारत-वेस्टइंडीज T20 मुकाबला
Top News

भारत-वेस्टइंडीज T20 मुकाबला:सुरक्षा में हाईटेक तकनीक का सहारा; फेस रिकग्नाइजेशन से होगी निगरानी

about 3 hours ago
बस बॉडी-इंटीरियर के नाम करोड़ों की धोखाधड़ी
Top News

बस बॉडी-इंटीरियर के नाम करोड़ों की धोखाधड़ी:18 से अधिक बस संचालकों ने की शिकायत; डीसीपी तक पहुंचा मामला

about 3 hours ago
देर रात हुए दो भीषण सड़क हादसे
Top News

देर रात हुए दो भीषण सड़क हादसे:ट्रक की टक्कर से बाइक सवार की मौत; डिवाइडर पर चढ़ी कार

about 3 hours ago
RE-2 रोड पर फिर शुरू हुई रिमूवल कार्रवाई
Top News

RE-2 रोड पर फिर शुरू हुई रिमूवल कार्रवाई:130 बाधक मकान हटाए जा रहे; भारी पुलिस बल के साथ वरिष्ठ अधिकारी मौजूद

about 3 hours ago

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!