अब तोते की तरह कबूलेगा जुर्म: पुलिस दबाएगी टेंटुआ
KHULASA FIRST
संवाददाता

जालसाज नवीन ओझा पांच दिनों के रिमांड पर
खुलासा फर्स्ट की खबर के बाद तीन नए पीड़ित और आए सामने
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रॉपर्टी के फर्जी पेपर तैयार कर कीमत से ज्यादा वैल्यूएशन बताकर लोगों को बैंकों से लोन करवाकर उन्हें ठगने वाला जालसाज नवीन ओझा पांच दिनों के रिमांड पर है।
रिमांड अवधि में पुलिस नवीन ओझा का ऐसा टेंटुआ दबाने की तैयारी में है कि वह तोते की तरह अपना जुर्म कबूलते हुए केस से जुड़े सारे फर्जी दस्तावजों का सच बताएगा। साथ ही इस पूरे खेल में उसका साथ देने वालों के नाम भी कबूलेगा।
चोलामंडलम बैंक के इस पूर्व जालसाज कर्मचारी को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था। केस दर्ज होने के पहले से ही खुलासा फर्स्ट इस जालसाज के खिलाफ खबरें प्रकाशित कर उसकी करतूतों का खुलासा कर चुका था।
ताजा जानकारी के अनुसार खुलासा फर्स्ट में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद मामले में तीन नए पीड़ित और सामने आए हैं, जिन्होंने पुलिस कमिश्नर को शिकायत की है। भोलेभाले जरुरतमंद लोगों से धोखाधड़ी के खेल में बैंक अफसरों की साठगांठ भी सामने आई है।
उल्लेखनीय है कि क्राइम ब्रांच ने नवीन ओझा पर धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। आरोपी को बचाने उसके रसूखदार करीबी क्राइम ब्रांच थाने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के हस्तक्षेप के चलते अफसर उसकी किसी तरह की मदद नहीं कर सके और मुकदमा दर्ज करने के साथ उसकी गिरफ्तारी दिखानी पड़ी।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके द्वारा प्रताड़ित किए गए तीन और पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर आरोपी नवीन ओझा, उसके भाई विशाल ओझा और चोलामंडलम बैंक के अधिकारियों-कर्मचारियों पर मिलीभगत कर फर्जी तरह से पेपर तैयार कर कॉलोनी के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत की हैं।
उधर, क्राइम ब्रांच ने हर्ष शर्मा की शिकायत पर केस दर्ज कर जालसाज आरोपी नवीन ओझा को गिरफ्तार करते हुए आरोपी को कोर्ट पेश कर उसका पांच दिनों का पुलिस रिमांड मांगा है। रिमांड पर आरोपी तोते की तरह उसकी जालसाजी करतूतों का खुलासा करेगा।
न कॉलोनी बनी और न प्लॉट मिले
ओझा बंधुओं ने किसी को पांच, किसी को दस तो किसी को पंद्रह प्लॉट देने का भरोसा दिया था। प्रत्येक प्लॉट करीब 1500 वर्गफीट का बताया था। आरोपियों ने 36 महीने में कॉलोनी विकसित कर प्लॉटों का कब्जा देने की बात कही थी, लेकिन 36 महीने बीतने के बाद भी न कॉलोनी बनी और न प्लॉट मिले।
पीड़ितों ने जब धामनोद पहुंचकर जमीन की जानकारी जुटाई तो उन्हें पता चला कि जिस जमीन को कॉलोनी के लिए दिखाया गया था, उसका आरोपियों से कोई सौदा ही नहीं हुआ था और जमीन किसी किसान की निकली।
इसके बाद पीड़ितों ने रकम वापस मांगी तो पैसे लौटाने से इनकार कर धमकाया। दबाव बनाने के बाद चंदन के लोन खाते में 7-8 किस्तों में कुछ रकम जमा कराई गई, लेकिन पूरी रकम वापस नहीं की गई और न ही प्लॉटों का कब्जा दिया गया।
चार साल तक आश्वासन मिलने के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की। खुलासा फर्स्ट में नवीन ओझा के कथित जालसाजी के खेल का खुलासा पढ़ने के बाद तीनों पीड़ित सामने आए और उन्होंने बताया कि वे भी इसी तरीके से करोड़ों रुपए के कथित खेल में फंस गए हैं।
अब नवीन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने बैंक लोन से लेकर जमीन और खातों में हुए करोड़ों के लेन-देन की पूरी कड़ी खंगालने की चुनौती है।
दबाव बनाने के लिए अफसरों के साथ
जानकारी के अनुसार धामनोद निवासी फरियादी लोकेंद्र पिता जानकीराम विश्वकर्मा, सांई ग्राफिक्स, जितेंद्र पिता मथुरालाल जायसवाल, नागमणि टूर्स एंड ट्रेवल्स और चंदन कुमार पिता जगदीश विश्वकर्मा, शिवशक्ति मेडिकल एजेंसी के संचालक हैं।
तीनों ने बताया व्यापार बढ़ाने के लिए उन्होंने चोलामंडलम बैंक की निपानिया ब्रांच के क्रेडिट मैनेजर केतन सांसिया और एरिया मैनेजर भूपेंद्र सिंह चौहान से संपर्क किया था।
बैंक अधिकारियों ने इनकी मुलाकात पुष्कर एसोसिएट्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के प्रोप्राइटर जालसाज आरोपी नवीन ओझा और विशाल ओझा से करवाई थी। इसके बाद ओझा बंधुओं ने वैल्यूएशन से ज्यादा लोन पास करवाने का भरोसा दिया था।
साथ ही धामनोद में जमीन दिखाकर बताया कि यहां पर कॉलोनी विकसित की जाएगी और निवेश करने वाले ग्राहकों को कम कीमत में प्लॉट देकर बड़ा फायदा कराया जाएगा। इस झांसे में आकर पीड़ितों ने आरोपियों को रकम देना शुरू कर दी।
बताया गया कि एक पीड़ित ने करीब 2 करोड़ 21 लाख 64 हजार रुपए, दूसरे ने करीब 1 करोड़ 89 लाख रुपए का लोन लिया। लोन और अन्य रकम में से आरोपी नवीन ओझा और उसके सहयोगियों के खातों में अलग-अलग तारीखों पर बड़ी रकम ट्रांसफर की गई।
पीडि़तों के अनुसार लोकेंद्र से करीब 1 करोड़ 74 लाख 88 हजार रुपए, जितेंद्र से करीब 55 लाख 49 हजार रुपए तथा चंदन से 19 लाख, 12 लाख 80 हजार और 10 लाख रुपए अलग-अलग समय में लिए गए। इस तरह शिकायत में करीब 2 करोड़ 72 लाख रुपए से ज्यादा की रकम आरोपियों लेकर डकार ली।
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