नगर निगम के विज्ञापन मामले में नया ट्विस्ट: ईओडब्ल्यू जांच के बीच एमआईसी में पहुंच सकता है प्रस्ताव; एक करोड़ के लाभ के लिए इतने करोड़ का नुकसान
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम के यूनिपोल और लॉलीपॉप विज्ञापन आवंटन मामले में नए सवाल खड़े हो गए हैं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा शुरू की गई जांच के बीच अब निगम प्रशासन कथित रूप से इस मामले से जुड़ा प्रस्ताव महापौर परिषद (MIC) में लाने की तैयारी कर रहा है। इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
मामला करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान से जुड़ा बताया जा रहा है। EOW में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विज्ञापन स्थलों के आवंटन और संचालन में गंभीर अनियमितताएं की गईं, जिससे नगर निगम को करीब 11 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ, जबकि कुछ लोगों को करीब एक करोड़ रुपए का लाभ पहुंचाया गया।
ईओडब्ल्यू ने मांगे अहम दस्तावेज
सूत्रों के अनुसार ईओडब्ल्यू ने नगर निगम को पत्र भेजकर पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं। जांच एजेंसी ने आउटडोर विज्ञापन नीति-2017, टेंडर प्रक्रिया, प्रशासनिक स्वीकृतियां, नोटशीट, फाइल मूवमेंट और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी मांगी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विज्ञापन स्थलों के आवंटन में नियमों का पालन किया गया था या नहीं और क्या निगम को जानबूझकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
जांच के बीच एमआईसी प्रस्ताव क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला ईओडब्ल्यू के पास जांचाधीन है और दस्तावेजों की पड़ताल चल रही है, तब अचानक एमआईसी में प्रस्ताव लाने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है। चर्चा है कि प्रस्ताव के जरिए यूनिपोल और लॉलीपॉप विज्ञापनों से जुड़े कुछ फैसलों को वैधानिक आधार देने या पूर्व में लिए गए निर्णयों को मजबूती प्रदान करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि निगम प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज
यदि ईओडब्ल्यू जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है। जांच एजेंसी दस्तावेजों के परीक्षण के बाद जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका भी तय कर सकती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
मामला सामने आने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दल और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि निगम को वास्तव में करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है तो इसकी जवाबदेही तय होना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या कुछ लोगों को सीमित आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए नगर निगम को 11 करोड़ रुपए के नुकसान की स्थिति में पहुंचाया गया? और क्या ईओडब्ल्यू जांच के बीच एमआईसी में प्रस्ताव लाकर पुराने फैसलों को वैधता देने की कोशिश की जा रही है?
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