नर्मदा-मालवा-गंभीर परियोजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: तीन बार फूटी पाइपलाइन; जर्जर हो रहा 2000 करोड़ का प्रोजेक्ट
KHULASA FIRST
संवाददाता

पावर लिंकर्स के मैनेजर मेहरा और एनवीडीए के शिवहरे कर रहे सरकार का आर्थिक नुकसान भ्रष्टाचार के लिए बता रहे हैं आईएएस, मंत्री और ऊपर वालों को जिम्मेदार
डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नर्मदा-मालवा-गंभीर लिफ्ट परियोजना में घटिया उपकरणों के इस्तेमाल के आरोपों की सच्चाई पूरे प्रोजेक्ट के पंप, पाइपलाइन, मोटर पंप आदि की खस्ता हालत देखकर साबित हो जाती है।
प्रदेश सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण इस करोड़ों की सिंचाई योजना को मेंटेनेंस ठेकेदार कंपनी पावर लिंकर्स चेन्नई के प्रबंधकों और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों ने मात्र 3 वर्ष में बर्बाद कर दिया है।
भ्रष्टाचार, आर्थिक गड़बड़ियों और प्रोजेक्ट को तकनीकी रूप से कमजोर करके मरम्मत की लागत कई गुना ज्यादा करने का काम सुनियोजित तरीके से किया गया है। भ्रष्टाचार से सरकार के खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंच रहा है।
हालात ऐसे ही रहे तो यह परियोजना पावर लिंकर्स कंपनी के प्रबंधकों और प्राधिकरण के संबंधित कार्यपालन यंत्री, मुख्य अभियंता आदि के कारण भंगार में बदल जाएगी। ठेकेदार कंपनी पावर लिंकर्स अपना काम करके भाग जाएगी, लेकिन जो नुकसान होगा उसकी भरपाई आम जनता और किसानों से वसूल की जाएगी।
ऐसा लगता है कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है। सरकार के राजस्व नुकसान व बदनामी से अधिकारियों को कोई मतलब नहीं रह गया है।
गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे...इस महत्वपूर्ण परियोजना में पंप, पाइपलाइन और वाल्व की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। एक साल में तीन बार पाइपलाइन फूटी। घटिया उपकरण जानबूझकर लगाए गए।
इस मामले में आपत्ति लेने पर कहा गया कि सब ऊपर यानी भोपाल में बैठे प्राधिकरण के शीर्ष आईएएस अधिकारियों से लेकर इंजीनियरिंग इन चीफ, मंत्री के ऊपर जो भी हैं, उनके कहने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। इस तरह का खाने का मतलब विभाग के जिम्मेदार अधिकारी का था, जिनके सामने शिकायत मौखिक रूप से रखी गई।
परियोजना को भंगार होने से बचाया जाए... राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठन भारतीय मजदूर संघ ने आरोप लगाते हुए बताया कि जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच अविलंब करवाई जाए और इस परियोजना को भंगार होने से बचाया जाए।
आज इस परियोजना की लागत 4000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी। इतनी महंगी परियोजना को ठेकेदार कंपनी के प्रबंधक और प्राधिकरण के अधिकारी वर्ग ने मिलकर मात्र 3 साल में जर्जर हालत में ला दिया है।
मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण नर्मदा-मालवा-गंभीर लिफ्ट सिंचाई परियोजना के मेंटेनेंस कार्य में अनियमितताओं और उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 2000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य वाली इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना के रखरखाव का ठेका चेन्नई की पावर लिंकर्स कंपनी के पास होने की जानकारी सामने आई है।
आरोप है कि परियोजना के पंप, पाइपलाइन, नॉन-रिटर्न वाल्व (एनआरवी), बटरफ्लाई वाल्व, मोटर तथा कूलिंग सिस्टम में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। यह मामला केवल मेंटेनेंस की लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक धन, सिंचाई व्यवस्था और किसानों के हितों से जुड़ा गंभीर विषय है।
हल्के उपकरणों से महंगी परियोजना को नुकसान... शिकायत में पावर लिंकर्स कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज मेहरा तथा एनवीडीए अधिकारी आशीष शिवहरे कार्यपालन यंत्री की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
आरोप है कि परियोजना में उपयोग किए गए उपकरणों और पुर्जों की गुणवत्ता निर्धारित मानकों से कम है। परियोजना के विशेषज्ञों बताया कि हल्की गुणवत्ता की सामग्री का जानबूझकर प्रयोग किया गया है। डिजाइन में भी बदलाव किया गया प्रतीत हो रहा है।
इसके कारण पूरा प्रोजेक्ट संकट में आ गया है। पंप हाउस पूरी तरह से खंडहर में बदल दिए गए हैं, क्योंकि इनका रखरखाव नहीं किया गया। इस आधार पर भारतीय मजदूर संघ ने अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच की मांग की है।
तकनीकी दृष्टि से लिफ्ट सिंचाई परियोजना में पंप, मोटर, नॉन रिटर्निंग वाल्व, बटरफ्लाई वाल्व, पाइपलाइन, वाल्व और कूलिंग सिस्टम एक-दूसरे से जुड़े महत्वपूर्ण घटक होते हैं। इनमें से किसी एक हिस्से की गुणवत्ता कमजोर होने पर पूरी प्रणाली का संचालन प्रभावित होता है।
विशेष रूप से उच्च दबाव पर चलने वाली पाइपलाइन में निर्धारित क्षमता से कम गुणवत्ता वाले उपकरणों का इस्तेमाल दुर्घटना, रिसाव और बार-बार मरम्मत की समस्या पैदा करते हैं। इस परियोजना में बीते कुछ वर्षों से ऐसा ही हो रहा है। किसानों को पानी भी कम क्षमता से मिल रहा है। पंप को ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ रही है, इससे इसका खर्च भी बढ़ता जा रहा है।
वाल्व की समस्या... परियोजना में एनआरवी और बटरफ्लाई वाल्व में गड़बड़ी हर समय रहती है। नॉन-रिटर्न वाल्व (एनआरवी ) का प्रमुख कार्य पानी के उलटे प्रवाह को रोकना है।
पंप बंद होने पर पानी का अचानक पीछे लौटना पाइपलाइन में दबाव का तेज बदलाव पैदा कर सकता है। यदि एनआरवी सही गुणवत्ता का न हो, उसकी फिटिंग में खामी हो या वह निर्धारित दबाव के अनुरूप काम न करे तो पंप और पाइपलाइन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
इसी तरह बटरफ्लाई वाल्व पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने और आवश्यकता पड़ने पर उसे बंद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वाल्व की बॉडी, डिस्क, शाफ्ट, सील या रबर की गुणवत्ता कमजोर होने पर रिसाव, वाल्व जाम होने और दबाव नियंत्रण में समस्या आ सकती है।
इन उपकरणों में निर्धारित तकनीकी मानकों के विपरीत सामग्री लगाई गई है, इससे परियोजना की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ रखरखाव का खर्च भी बढ़ गया है। इसकी पुष्टि के लिए स्वीकृत डिजाइन, तकनीकी विनिर्देश, खरीद रिकॉर्ड और वास्तविक उपकरणों का स्वतंत्र परीक्षण से घोटाले का खुलासा हो जाएगा।
पाइपलाइन फूटने की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता...सूत्रों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में परियोजना की पाइपलाइन तीन बार फूट चुकी है। यदि यह जानकारी रिकॉर्ड से प्रमाणित होती है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण आधार हो सकती है। पाइपलाइन फूटने का कारण घटिया सामग्री ही बताई जा रही है।
पाइपलाइन टूटने के संभावित कारणों में पानी के दबाव में अचानक बदलाव, वाटर हैमर, गलत डिजाइन या फिटिंग, वेल्डिंग की कमजोरी, सामग्री में दोष, मिट्टी का खिसकना और रखरखाव में लापरवाही शामिल हैं, इसलिए प्रत्येक घटना की तकनीकी रिपोर्ट, टूटे हुए पाइप के नमूने, दबाव के रिकॉर्ड और मरम्मत के विवरण की जांच आवश्यक है।
बार-बार पाइपलाइन फूटने से पानी की आपूर्ति बाधित होने के साथ किसानों की फसल बड़े पैमाने पर बर्बाद हो रही है। मरम्मत पर अतिरिक्त सरकारी धन खर्च हो रहा है और सिंचाई के लिए परियोजना पर निर्भर किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मोटर और कूलिंग सिस्टम की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण...सिंचाई परियोजना में बड़ी क्षमता वाली मोटरों को लगातार निर्धारित परिस्थितियों में चलाना पड़ता है। मोटर के कूलिंग सिस्टम, बेरिंग, सील और अन्य सहायक पुर्जों में खराब गुणवत्ता वाली सामग्री इस्तेमाल की गई हैं।
अत्यधिक तापमान, कंपन, घिसावट और समय से पहले खराबी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसी प्रकार पंप के इम्पेलर, शाफ्ट, सील और अन्य आंतरिक पुर्जे निर्धारित डिजाइन एवं गुणवत्ता के अनुरूप नहीं होने पर पंप की दक्षता घटती है।
इससे बिजली की खपत बढ़ने, पानी उठाने की क्षमता कम होने और बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ने की आशंका रहती है, इसलिए परियोजना में लगाए गए उपकरणों की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन केवल बाहरी निरीक्षण से नहीं, बल्कि तकनीकी परीक्षण और स्वीकृत मानकों से तुलना करके किया जाना चाहिए।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि परियोजना में कथित गड़बड़ियों की जानकारी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) के संबंधित अधिकारियों को समय-समय पर दी गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारियों को उपकरणों की गुणवत्ता में गंभीर खामियों की जानकारी थी और इसके बावजूद नियमों के विपरीत भुगतान या सामग्री को मंजूरी दी गई, यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई गई। यह प्रशासनिक जवाबदेही का मामला है।
वहीं, ठेकेदार ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया है। इस के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाना जरूरी हैं। इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या परियोजना में इस्तेमाल किए गए उपकरण स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुरूप हैं और क्या पाइपलाइन फूटने की घटनाओं के पीछे डिजाइन, संचालन, रखरखाव या सामग्री की गुणवत्ता से जुड़ी कोई गंभीर खामी है।
मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए इन कदमों को उठाना चाहिए
परियोजना के पंप, पाइपलाइन, एनआरवी, बटरफ्लाई वाल्व, मोटर और कूलिंग सिस्टम का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए। स्वीकृत डिजाइन और वास्तविक उपकरणों की मोटाई, दबाव सहन करने की क्षमता, सामग्री तथा गुणवत्ता प्रमाणपत्रों का मिलान किया जाए। पिछले एक वर्ष में पाइपलाइन फूटने की घटनाओं की अलग-अलग तकनीकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
मेंटेनेंस ठेकेदार के बिल, निरीक्षण प्रमाणपत्र, गुणवत्ता नियंत्रण रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया की जांच की जाए।
पहले दी गई शिकायतों पर एनवीडीए के संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने लाया जाए।
जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार ठेकेदार या अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
नर्मदा-मालवा-गंभीर लिफ्ट सिंचाई परियोजना हजारों किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें प्रयुक्त उपकरणों की गुणवत्ता और रखरखाव में किसी भी तरह की गंभीर लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पूरे प्रोजेक्ट की पाइपलाइन पंप हाउस और मेंटेनेंस के काम की निष्पक्ष जांच इंजीनियरिंग कॉलेज एसजीआईटीएस के विशेषज्ञों से करवानी चाहिए। निष्पक्ष तकनीकी और प्रशासनिक जांच इस पूरे घोटाले के जिम्मेदार लोगों को दंडित किया जा सकता है।
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