महाकाल का गर्भगृह दो घंटे सबके लिए खुले सांसद: वीआईपी एंट्री विवाद पर बोले फिरोजिया; व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता जरूरी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
सांसद अनिल फिरोजिया ने महाकाल मंदिर में वीआईपी प्रवेश को लेकर उठे विवाद पर कहा है बाबा महाकाल के दर्शन और स्पर्श का अधिकार चुनिंदा लोगों तक सीमित न हो। गर्भगृह में प्रवेश की व्यवस्था है तो लाभ आम श्रद्धालुओं को भी मिले।
प्रशासन न भूले आज पद है, कल नहीं रहेगा। बाबा महाकाल को सबको जवाब देना होगा। अन्याय और पद का दुरुपयोग यहीं भुगतना पड़ता है। प्रतिदिन कम से कम एक या दो घंटे गर्भगृह सभी के लिए खोला जाए, ताकि भेदभाव न रहे।
दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें आधा दर्जन लोग गर्भगृह के भीतर पूजा-अर्चना और अभिषेक करते दिख रहे हैं जबकि श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है और विशेष परिस्थिति में ही जिला प्रशासन की अनुमति से प्रवेश दिया जाता है।
15 जून की रात वीआईपी प्रोटोकॉल के तहत कुछ लोगों ने गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की। तस्वीरें वायरल होने से आम श्रद्धालुओं में नाराजगी है।
सबसे बड़ा सवाल
गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित है तो ये विशेष श्रद्धालु पहुंचे कैसे? क्या नियम बदल दिए थे? अनुमति दी तो किस आधार पर? बिना अनुमति प्रवेश हुआ तो जिम्मेदार कौन है? आम श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहते हैं, कई बार सैकड़ों किमी से आकर दूर से दर्शन कर लौट जाते हैं। वहीं कुछ का गर्भगृह तक पहुंच जाना व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
श्रद्धालुओं में दो तरह की प्रतिक्रिया
एक ओर कुछ लोग सांसद का समर्थन कर रहे हैं दूसरी ओर मंदिर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और परंपरागत व्यवस्थाओं को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं गर्भगृह को आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने से पहले विस्तृत योजना आवश्यक होगी।
आस्था का अधिकार सबका
लेकिन तस्वीरें कुछ और कहानी कह रही हैं। सवाल यह नहीं गर्भगृह में कौन गया, यह है जिन दरवाजों पर करोड़ों भक्तों के लिए ताला लगा है, वे आखिर चुनिंदा लोगों के लिए बार-बार कैसे खुलते हैं? नियम हैं तो सबके लिए हों, और अपवाद हैं तो उनका खुलासा होना चाहिए। वरना यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा महाकाल के दरबार में भी ‘वीआईपी पास’ आस्था से बड़ा हो गया है।
न्यायाधीशों के नाम पर मनमानी
मंदिर प्रशासन मामले में कुछ भी कहने से बच रहा है। वायरल तस्वीरों के मामले में कहना है अक्षय आनंद नाम का भक्त 15 जून को किसी ज्यूडिशियल वीआईपी प्रोटोकॉल से आया था।
सवाल है आखिर वे जज कौन हैं, जो व्यवस्था से भी बड़े हो गए? क्या नियम तोड़ने के लिए उन्हें सजा नहीं मिलना चाहिए।
क्लब चलाने वाले से ज्यूडिशियल का क्या रिश्ता
जुडिशल vip प्रोटोकॉल से गर्भ ग्रह के भीतर प्रवेश करने वाला अक्षय आनंद दिल्ली-मुम्बई व अन्य बड़े शहरों में क्लब और बार का संचालन करता है, ऐसे में यह सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर जुडिशल के लोगों का क्लब व बार मालिकों से क्या रिश्ता है...!
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