42 सौ किलोमीटर तक दौड़ने वाले कार्तिक की राह में अभावों का ब्रेक: ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतने की चाह; पर शासन-प्रशासन से नहीं मिल रही कोई मदद
KHULASA FIRST
संवाददाता

राजेंद्र खंडेलवाल 98931-90781 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
24 साल के कार्तिक जोशी ने जब बचपन में चाय की दुकान पर बैठे हुए आर्मी जवानों को दौड़ते देखा था तो मन में धावक बनने का सपना संजो बैठे और आज वे देश में एक जाना-पहचाना नाम बन गए हैं। कारगिल से कन्याकुमारी तक 67 दिन में 4200 किलोमीटर दौड़कर उन्होंने इतिहास रच दिया।
अब उनका सपना है कि ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर पदक जीतें, लेकिन उनकी राह में अभाव का ब्रेक लग गया है। इसके लिए उन्हें न शासन से कोई मदद मिल रही, न प्रशासन से।
जेलरोड निवासी कार्तिक पिता ओम जोशी व अपने छोटे भाई हिमांशु के साथ छोटे से व्यवसाय में हाथ बंटाते हैं। कार्तिक का कहना है सपने देखने का हक संपन्न परिवारों के बच्चों को ही माना जाता है, लेकिन उन्होंने मध्मयवर्गीय परिवार से होने के बावजूद धावक बनने का सपना देखा और अपनी अद्भुत जीवटता व धैर्य के साथ मन की ताकत से इसे काफी हद तक पूरा कर लिया है।
वे बताते हैं कि रामबलि नगर में उनकी छोटी-सी चाय की दुकान थी, जहां बैठे-बैठे वे पीछे पीटीसी में सैनिकों को दौड़ते देखते थे। यहीं से उनके बालमन में धावक बनने की इच्छा जागी और इसके बाद वे अपने सफर पर निकल पड़े, क्योंकि जीवन का लक्ष्य मिल गया था। महू में ट्रेनिंग के लिए पहुंचे, जहां की आइडियल एकेडमी में उन्होंने बीकॉम किया।
कार्तिक ने सीमित संसाधनों के बीच अपने सपने को जिस जज्बे से पूरा किया, वो आज के युवाओं के लिए आदर्श है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर अशोभनीय टिप्पणी करने, अनुचित हरकतें करने वाले युवाओं को उनसे सबक सीखना चाहिए, जिन्होंने अदम्य साहस और सपने को जीने का परिचय दिया है।
कार्तिक के नाम एक अद्भुत रिकॉर्ड है 4200 किमी दौड़ का। ये दौड़ 2 मई को कारगिल से शुरू हुई थी और 67 दिन में 7 जुलाई को कन्याकुमारी जाकर पूरी हुई। वे रोजाना 62 किमी दौड़ते। जब कारगिल से दौड़ शुरू हुई तो कहा गया कि लैंड स्लाइड (भूस्खलन) होता है, इसलिए सूर्य निकलने पर निकलें।
वे 7 बजे निकलते। बाद में उन्होंने कभी सुबह 4 बजे तो कभी 5 बजे से दौड़ शुरू कर इस इतिहास को रचा। उनके साथ 7 लोगों की टीम थी, जिनमें डायटीशियन भी शामिल था।
डर के आगे जीत है... : साउथ में दौड़ते वक्त स्वास्थ्य को लेकर गंभीर परेशानियां सामने आईं। कहते हैं कि डर के आगे जीत है, तो वे डर को हराते और सपने को जीतते चले गए। कहीं 47 डिग्री तापमान में दौड़े तो कहीं मायनस 11 डिग्री में, लेकिन देखा गया सपना उन्हें सदा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।
पैरों में छाले पड़ गए, खून रिसने लगा, पूरे शरीर में मौसम की वजह से रेशेज हो गए, लेकिन कार्तिक कभी न रुकने वाले का नाम है, ये उन्होंने सार्थक कर दिया।
...तब भाग्य ने साथ नहीं दिया : कार्तिक जोशी का तीन बार अमेरिका में आयोजित स्पर्धा में चयन हो चुका था, लेकिन दो बार भाग न ले सके। एक बार भाग लिया तो मौसम के कारण दौड़ पूरी नहीं हो सकी। इसका उन्हें अफसोस है और वो चाहते हैं कि एक बार फिर अमेरिका जाएं और भारत व इंदौर का नाम रोशन करें।
अयोध्या तक लगाई थी 1008 किमी दौड़: कार्तिक राम मंदिर के शुभारंभ के वक्त अयोध्या तक 1008 किमी की दौड़ लगा चुके हैं। गुरुग्राम में सालाना स्पर्धा में वे 277 किमी दौड़कर भी रिकॉर्ड कायम कर चुके हैं। कार्तिक ने साउथ अफ्रीका में भी इतिहास रचा।
वहां के 96 साल में पहली बार उन्होंने दौड़ स्पर्धा जीती। मुंबई में होने वाली सिल्वर मेड पोशियन टूर्नामेंट में भी विजयी रहे। गुरुग्राम की दौड़ लास्ट मैन स्टैंड होती है, यानी जो अंत तक दौड़ता रहता है, वही जीतता है। उन्होंने यह दौड़ भी जीती।
अल्ट्रा रनर हैं कार्तिक : कार्तिक जोशी अल्ट्रा रनर हैं। इसका मतलब ये कि वे एक बार में 42 किमी से ज्यादा दौड़ते हैं। इस दूरी से कम दौड़ सामान्य होती है। भारत में ऐसे अल्ट्रा रनर्स की संख्या काफी कम है और इंदौर से तो कार्तिक एकमात्र ही हैं।
सम्मानों की कमी नहीं
कार्तिक का विभिन्न मंचों पर सम्मान हो चुका है। हाल ही उन्हें मुंबई में ‘के टू के’ यानी कारगिल से कन्याकुमारी तक के मिशन के लिए सम्मानित कर 4.40 लाख रुपए का नकद इनाम प्रदान किया गया। हालांकि यह राशि उन्हें समय-समय पर मिलेगी।
स्ट्रैचर इंडिया द्वारा दिए गए सम्मान के अलावा कार्तिक को राजस्थान व मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में सम्मानित किया जा चुका है। कंपनी उनके लिए जूते, कपड़े और दौड़ में सहायक अन्य संसाधन जुटाने में मदद करेगी। पीटी उषा, पानसिंह तोमर हैं आदर्श
कार्तिक ने बताया एशियाड, ओलिम्पिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाली पीटी उषा व मप्र के तेज धावक पानसिंह तोमर उनके आदर्श हैं। पानसिंह पर फिल्म बन चुकी है, जिसमें इरफान खान ने अभिनय किया था।
तीन सपनों को जी रहे
कार्तिक की दौड़ युवाओं में नशामुक्ति और फिटनेस के प्रति जाग्रति लाने के लिए है। उनका तीसरा बड़़ा सपना ऐसे 100 धावक तैयार करना है, जो उनकी तरह दौड़ें और देश का नाम रोशन करें। अभी महू की पाथ इंडिया उन्हें स्पांसर कर रही है, लेकिन उनके मन में इस बात का दर्द है कि उनकी उपलब्धियों को शासन-प्रशासन से तवज्जो नहीं मिल रही। आश्वासन तो खूब मिले, लेकिन पूरा एक भी नहीं हुआ।
मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री तक से मिल चुके, लेकिन कोई खास मदद नहीं मिली।
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